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कलेक्ट्रेट के सभागार में एक दिवसीय स्वच्छता जागरूकता कार्यशाला
Updated Fri, 07 Jul 2017 12:19 AM IST
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आजमगढ़। जिले को खुले में शौचमुक्त बनाने के लिए स्वच्छता जागरूकता कार्यशाला गुरुवार को कलेक्ट्रेट के सभागार में आयोजित की गई। इसमें खुले में शौच और गंदगी से होने वाली बीमारियों के बारे में बताया गया। अधिकारियों, स्वयंसवी व सामाजिक संगठनों के लोगों से अपील की गई कि वे लोगों को समझाएं ताकि जिले को खुले में शौचमुक्त किया जा सके।
कार्यशाला में फीडबैक फाउंडेशन के ट्रेनर अजय कुमार सिन्हा ने जिले को खुले में शौचमुक्त बनाने के लिए रोचक और व्यावहारिक ढंग से तथ्यों और आंकड़ों के साथ विभिन्न विभागों के अधिकारियों, स्वयंसेवी और सामाजिक संघटनों के लोगों को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि तमाम बीमारियों की जड़ गंदगी है। खुले में शौच कुपोषण का बड़ा कारण है। इससे प्रदूषण होता है और हानिकारक वैक्टीरिया शरीर में प्रवेश करते हैं। मां बच्चों को खूब खिलाती है लेकिन वैक्टीरिया के प्रभाव से बच्चा कुपोषित हो जाता है। इसी प्रकार गंदगी पर बैठने वाली मक्खियां लोगों के घरों में पहुंचती है और भोजन तथा अन्य खाद्य पदार्थों पर बैठती है जिससे भोजन भी प्रदूषित हो जाता है। इसके चलते लोग डायरिया समेत अन्य कई बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। अगर जिला खुले में शौचमुक्त हो जाए तो लोग स्वस्थ रहेंगे और तमाम बीमारियों से बच जाएंगे। यह तभी संभव है जब कार्यशालामें जानकारी लनेने वाले लोग ग्रामीण क्षेत्र केलोगों को जागरूक करें।
जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने जिले को खुले शौचमुक्त करना मुश्किल नहीं है। इसके लिए लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग, बेसिक शिक्षा, पंचायती राज विभाग के माध्यम से लोगों को जागरूक बनाने का कार्य किया जाएगा। ताकि अक्टूबर 2018 तक जनपद को खुले में शौच मुक्त तथा स्वच्छ बनाया जा सके। कहा कि स्वच्छता कार्यक्रम के अन्तर्गत आजमगढ़ में विशेष क्षेत्रों में कार्य करने वालें लोगों की एक कोर कमेटी बनाई जाएगी। इस कमेटी की बैठक प्रत्येक 15 दिन पर की जाएगी। तीन से सात जुलाई के बीच कोटवा स्थित कृषि महाविद्यालय में फीडबैक फाउंडेशन की ओर से ग्रामीणों को जागरूक करने के उद्देश्य से कौशल विकास, स्वयं सहायता समूह, नेहरू युवा केंद्र तथा अन्य स्वंय सेवी संगठनों के सदस्यों के अलावा ग्रामीणों को प्रेरित किया जाएगा। जिलाधिकारी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य करने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, आशा, रोजगार सेवक, लेखपाल, कानूनगो, अध्यापकों से अपील किया कि वे ग्रामीणों को जागरूक करें।
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कार्यशाला में फीडबैक फाउंडेशन के ट्रेनर अजय कुमार सिन्हा ने जिले को खुले में शौचमुक्त बनाने के लिए रोचक और व्यावहारिक ढंग से तथ्यों और आंकड़ों के साथ विभिन्न विभागों के अधिकारियों, स्वयंसेवी और सामाजिक संघटनों के लोगों को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि तमाम बीमारियों की जड़ गंदगी है। खुले में शौच कुपोषण का बड़ा कारण है। इससे प्रदूषण होता है और हानिकारक वैक्टीरिया शरीर में प्रवेश करते हैं। मां बच्चों को खूब खिलाती है लेकिन वैक्टीरिया के प्रभाव से बच्चा कुपोषित हो जाता है। इसी प्रकार गंदगी पर बैठने वाली मक्खियां लोगों के घरों में पहुंचती है और भोजन तथा अन्य खाद्य पदार्थों पर बैठती है जिससे भोजन भी प्रदूषित हो जाता है। इसके चलते लोग डायरिया समेत अन्य कई बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। अगर जिला खुले में शौचमुक्त हो जाए तो लोग स्वस्थ रहेंगे और तमाम बीमारियों से बच जाएंगे। यह तभी संभव है जब कार्यशालामें जानकारी लनेने वाले लोग ग्रामीण क्षेत्र केलोगों को जागरूक करें।
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जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने जिले को खुले शौचमुक्त करना मुश्किल नहीं है। इसके लिए लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग, बेसिक शिक्षा, पंचायती राज विभाग के माध्यम से लोगों को जागरूक बनाने का कार्य किया जाएगा। ताकि अक्टूबर 2018 तक जनपद को खुले में शौच मुक्त तथा स्वच्छ बनाया जा सके। कहा कि स्वच्छता कार्यक्रम के अन्तर्गत आजमगढ़ में विशेष क्षेत्रों में कार्य करने वालें लोगों की एक कोर कमेटी बनाई जाएगी। इस कमेटी की बैठक प्रत्येक 15 दिन पर की जाएगी। तीन से सात जुलाई के बीच कोटवा स्थित कृषि महाविद्यालय में फीडबैक फाउंडेशन की ओर से ग्रामीणों को जागरूक करने के उद्देश्य से कौशल विकास, स्वयं सहायता समूह, नेहरू युवा केंद्र तथा अन्य स्वंय सेवी संगठनों के सदस्यों के अलावा ग्रामीणों को प्रेरित किया जाएगा। जिलाधिकारी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य करने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, आशा, रोजगार सेवक, लेखपाल, कानूनगो, अध्यापकों से अपील किया कि वे ग्रामीणों को जागरूक करें।
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