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अधिवक्ता हड़ताल पर फिर भी निस्तारित होंगे मुकदमे
Updated Sun, 11 Mar 2018 11:56 PM IST
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अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने पर न्यायालयों में मुकदमों का बोझ काफी बढ़ गया है। जिस पर राजस्व परिषद ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मुकदमे का गुण दोष के आधार पर निस्तारण करने का निर्देश दिया है।
हाल ही में रजिस्ट्रार उच्च न्यायालय द्वारा जनपद में आयोजित न्यायिक कार्यदिवसों के संबंध में जानकारी मांगी थी। जिसके अनुसार किसी-किसी तहसील में 12 तो किसी तहसील में 13 दिन ही न्यायिक कार्य दिवस हुए। बाकी न्यायिक कार्यदिवस अधिवक्ताओं की हड़ताल और प्रस्ताव की भेंट चढ़ गए। जिसे देखते हुए राजस्व परिषद के अध्यक्ष प्रवीर कुमार ने नौ फरवरी को पत्र जारी कर कहा कि यदि अधिवक्ताओं के बहिष्कार करने या फिर कार्य से विरत होने के कारण न्यायालय कार्य बाधित होता है तो स्थानीय बार एसोसिएशन के घोषणापत्र का उल्लेख आर्डर शीट में अंकित किया जाए। जिन न्यायालय कार्यदिवसों में अधिवक्तागण के कार्य बहिष्कार के फलस्वरूप न्यायिक कार्य संपन्न नहीं सका, उनके संबंध में संबंधित बार एसोसिएशन के पत्रों की प्रतिलिपि संकलित विवरण के साथ राजस्व परिषद को उपलब्ध कराया जाए। यदि अधिवक्तागण कार्य से विरत हैं लेकिन दोनों पक्ष उपस्थित हैं और अपना पक्ष स्वयं प्रस्तुत करने को तैयार हैं तो दोनों पक्षों केे सुनने के बाद वाद का गुण दोष के आधार पर निस्तारण किया जा सकता है।
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हाल ही में रजिस्ट्रार उच्च न्यायालय द्वारा जनपद में आयोजित न्यायिक कार्यदिवसों के संबंध में जानकारी मांगी थी। जिसके अनुसार किसी-किसी तहसील में 12 तो किसी तहसील में 13 दिन ही न्यायिक कार्य दिवस हुए। बाकी न्यायिक कार्यदिवस अधिवक्ताओं की हड़ताल और प्रस्ताव की भेंट चढ़ गए। जिसे देखते हुए राजस्व परिषद के अध्यक्ष प्रवीर कुमार ने नौ फरवरी को पत्र जारी कर कहा कि यदि अधिवक्ताओं के बहिष्कार करने या फिर कार्य से विरत होने के कारण न्यायालय कार्य बाधित होता है तो स्थानीय बार एसोसिएशन के घोषणापत्र का उल्लेख आर्डर शीट में अंकित किया जाए। जिन न्यायालय कार्यदिवसों में अधिवक्तागण के कार्य बहिष्कार के फलस्वरूप न्यायिक कार्य संपन्न नहीं सका, उनके संबंध में संबंधित बार एसोसिएशन के पत्रों की प्रतिलिपि संकलित विवरण के साथ राजस्व परिषद को उपलब्ध कराया जाए। यदि अधिवक्तागण कार्य से विरत हैं लेकिन दोनों पक्ष उपस्थित हैं और अपना पक्ष स्वयं प्रस्तुत करने को तैयार हैं तो दोनों पक्षों केे सुनने के बाद वाद का गुण दोष के आधार पर निस्तारण किया जा सकता है।
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