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वित एवं लेखाधिकारी कार्यालय के पूर्व लेखाकार पर कार्रवाई की मांग
Updated Sat, 17 Feb 2018 12:20 AM IST
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आजमगढ़। भारतीय मानवाधिकार एसोसिशन के सदस्य अरूण कुमार सिंह ने शुक्रवार को जिलाधिकारी को पत्र सौंप वित्त एंव लेखाधिकारी कार्यालय के पूर्व लेखाकार से गबन किए गए धन की वसूली और एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय द्वारा उक्त लिपिक की नियुक्ति को अवैध करार देते हुए इनकी नियुक्ति को रद्द कर दिया है। इसके बाद भी इनके द्वारा कार्यालय की उपस्थिति पंजिका में हस्ताक्षर करने के साथ ही सारे कार्य किए जाते हैं। जिलाधिकारी ने बीएसए को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी को बताया कि उच्च न्यायालय द्वारा दो फरवरी 2012 को ही पूर्व लेखाकार राना प्रताप सिंह की नियुक्ति को खारिज कर दिया था। लेकिन उक्त आदेश के तथ्य का गोपन कर उनके द्वारा वेतन के नाम पर शासकीय धन का व्यहरण कर गबन और भ्रष्टाचार किया गया। उक्त कार्यालय के तत्कालीन अधिकारी और कर्मचारी द्वारा उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेश की अवहेलना भी की गई जो दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। लेकिन आज भी उनके द्वारा कार्यालय की कर्मचारी उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर बनाया जा रहा है। जो उच्च न्यायालय के आदेशों की अवमानना है। इसलिए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुए गबन किए गए शासकीय धन की वसूली की जाए।
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शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी को बताया कि उच्च न्यायालय द्वारा दो फरवरी 2012 को ही पूर्व लेखाकार राना प्रताप सिंह की नियुक्ति को खारिज कर दिया था। लेकिन उक्त आदेश के तथ्य का गोपन कर उनके द्वारा वेतन के नाम पर शासकीय धन का व्यहरण कर गबन और भ्रष्टाचार किया गया। उक्त कार्यालय के तत्कालीन अधिकारी और कर्मचारी द्वारा उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेश की अवहेलना भी की गई जो दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। लेकिन आज भी उनके द्वारा कार्यालय की कर्मचारी उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर बनाया जा रहा है। जो उच्च न्यायालय के आदेशों की अवमानना है। इसलिए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुए गबन किए गए शासकीय धन की वसूली की जाए।
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