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मंडल के तीन ब्लाक 2013 से ही डार्क जोन में
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आजमगढ़। मंडल के तीनों जनपदों में तीन ब्लाक ऐसे हैं जो वर्ष 2013 से ही डार्क जोन में चल रहे हैं। इसमें दो ब्लाक आजमगढ़ के और एक ब्लाक बलिया का शामिल हैं। इसके साथ ही तीन ब्लाक ऐसे हैं जो सेमी क्रिटीकल जोन में वर्ष 2017 से ही चल रहे हैं। इसमें भी आजमगढ़ के दो ब्लाक और बलिया का एक ब्लाक शामिल हैं। इन दोनों जनपदों के बीच में पडने वाला मऊ जनपद अभी तक सेफ हैं। जल ही जीवन है कहते तो सभी हैं लेकिन जल को बचाने की कवायद में कोई आगे नहीं है। जिसका परिणाम है कि भविष्यवाणियां की जा रही हैं कि अगर भूजल के दोहन की स्थिति यही रही तो वह दिन दूर नहीं जब अगला विश्व युत्र जल के लिए हो। भूजल पर कार्य करने वाले सावित्री बाई फुले राजकीय पालिटेक्निक कालेज के शिक्षक कुलभूषण सिंह की मानें तो बंगलौर से लेकर दिल्ली तक का भूजल स्तर लगभग समाप्त हो चुका है। यह इलाका सूख चुका है। अगर यही हाल रही तो अन्य क्षेत्रों की हालत भी ऐसी होगी। उनका कहना है कि हर कोई यह मानता है कि धरती के अंदर भूजल का भंडार है। लेकिन जब किसी चीज का जरूरत से ज्यादा दोहन होता है तो उसे समाप्त होने में देर नहीं लगती है। उनकी बातों को सत्य साबित करती है भूजल कार्यालय की रिपोर्ट। 2013 में विभाग द्वारा की गई जांच में मंडल के तीन ब्लाक डार्क जोन में पाए गए। इसमें आजमगढ़ जनपद के सठियांव और पल्हनी ब्लाक शामिल हैं। जबकि बलिया जनपद का अकेला रसड़ा ब्लाक शामिल है। वहीं 2017 की रिपोर्ट के अनुसार सेमी क्रिटीकल जोन में भी आजमगढ़ के दो ब्लाक मिर्जापुर और अजमतगढ़ और बलिया जनपद का एक ब्लाक सोहावं शामिल है। अगर जल्द इन तीनों ब्लाकों में भूजल के स्तर को सुधारने के कार्य नहीं किए गए तो इनका भी जल्द ही डार्क जोन में जाना तय है। वहीं मंडल के मऊ जनपद की हालत अभी ठीक है लेकिन यहां भी आबादी बढ़ने के साथ भूजल का दोहन बढ़ गया है।
दुखद तो यह है कि जनपद के दो ब्लाक सठियांव और पल्हनी 2013 से डार्क जोन में चल रहे हैं लेकिन अभी तक इनकी स्थिति में सुधार की कोई कवायद नहीं की गई। अभी तक किसी भी सरकारी बिल्डिंग में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाया जा सका है। पल्हनी ब्लाक में आने वाले नगर क्षेत्र की 45 पोखरियों का अस्तित्व ही गायब हो चुका है। इसके लिए जिम्मेदार नगरपालिका प्रशासन द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। 2017 से जनपद के दो ब्लाक मिर्जापुर और अजमगढ़ सेमी क्रिटीकल जोन में हैं लेकिन इन्हें भी सामान्य करने की दिशा में प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं की गई है।
अभी हमने हाल ही में ब्लाकों से सूची तलब कर उसकी रिपोर्ट तैयार कर शासन को रिपोर्ट भेजी है। रिपोर्ट के स्वीकृति मिलने पर इसमें कुछ बदलाव हो सकते हैं। इन ब्लाकों की स्थिति में सुधार करना हमारा कार्य नहीं है। हम तो भूजल की स्थिति का आकलन कर रिपोर्ट करते हैं इसके बाद का कार्य अन्य विभागों को करना होता है।
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दीपक, टेक्नीकल असिस्टेंट, भूजल विभाग।
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दुखद तो यह है कि जनपद के दो ब्लाक सठियांव और पल्हनी 2013 से डार्क जोन में चल रहे हैं लेकिन अभी तक इनकी स्थिति में सुधार की कोई कवायद नहीं की गई। अभी तक किसी भी सरकारी बिल्डिंग में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाया जा सका है। पल्हनी ब्लाक में आने वाले नगर क्षेत्र की 45 पोखरियों का अस्तित्व ही गायब हो चुका है। इसके लिए जिम्मेदार नगरपालिका प्रशासन द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। 2017 से जनपद के दो ब्लाक मिर्जापुर और अजमगढ़ सेमी क्रिटीकल जोन में हैं लेकिन इन्हें भी सामान्य करने की दिशा में प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं की गई है।
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अभी हमने हाल ही में ब्लाकों से सूची तलब कर उसकी रिपोर्ट तैयार कर शासन को रिपोर्ट भेजी है। रिपोर्ट के स्वीकृति मिलने पर इसमें कुछ बदलाव हो सकते हैं। इन ब्लाकों की स्थिति में सुधार करना हमारा कार्य नहीं है। हम तो भूजल की स्थिति का आकलन कर रिपोर्ट करते हैं इसके बाद का कार्य अन्य विभागों को करना होता है।
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दीपक, टेक्नीकल असिस्टेंट, भूजल विभाग।