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विभागीय बजट और मनरेगा से कराएं पौधरोपण
Updated Mon, 07 May 2018 11:16 PM IST
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आजमगढ़। जनपद में फारेस्ट कवरेज एक फीसदी से कम होने की मुद्दा अमर उजाला की ओर से उठाने के बाद कमिश्नर ने इसका संज्ञान लिया है। उन्होंने मंडल के तीनों जिले में फारेस्ट कवरेज एक फीसदी से कम होने पर चिंता जताई है। विभागीय बजट और मनरेगा के तहत डबटेलिंग की धनराशि से पौधरोपण कराने के निर्देश दिए हैं। नदियों की चौड़ाई का सीमांकन कर हर सौ मीटर पर पिलर लगाने और नदी किनारे की जमीन पर पौधरोपण कराने के निर्देश जिलाधिकारियों को दिए हैं।
पर्यावरण की दृष्टि से किसी भी जनपद में उसके क्षेत्र के सापेक्ष 17 से 20 फीसदी तक वन क्षेत्र होना चाहिए। अमर उजाला ने 15 अप्रैल के अपने अंक में इस मुद्दे को प्रमुखता के साथ प्रकाशि किया था। बताया था कि 3.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल के आजमगढ़ जनपद में मात्र 110 हेक्टेयर पर ही वन क्षेत्र हैं। अमर उजाला की ओर से उठाए गए इस मुद्दे का संज्ञान कमिश्नर एसवीएस रंगाराव ने लिया है। उन्होंने मंडल के तीनों जिलाधिकारी को पत्र लिखकर एक फीसदी से कम फारेस्ट कवरेज होने पर नाराजगी जताई है। कहा है कि मानक के अनुसार 17 फीसदी भू-भाग पर फारेस्ट कवरेज होनी चाहिए। उपलब्ध सरकारी जमीन पर विभागीय बजट और मनरेगा की डबटेलिंग धनराशि से पौधरोपण कराया जाए। इसके साथ ही जनपद से होकर गुजरने वाली नदियों की चौड़ाई की पैमाइश करा हर सौ मीटर पर समांकन कर पीलर लगाया जाए। इसके लिए धनराशि का प्रबंध निकाय और ग्राम पंचायत का खाते से किया जाए। जहां पिलर लगाया जाए उस स्थान का जीपीए कोआर्डिनेट लेकर अभिलेखों में सुरक्षित किया जाए। इसके साथ ही नदी के किनारे बची जमीन पर वन विभाग की ओर से पौधरोपण कराया जाए। ताकि मंडल के तीनों जनपदों की फारेस्ट कवरेज मानक के अनुसार हो जाए।
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पर्यावरण की दृष्टि से किसी भी जनपद में उसके क्षेत्र के सापेक्ष 17 से 20 फीसदी तक वन क्षेत्र होना चाहिए। अमर उजाला ने 15 अप्रैल के अपने अंक में इस मुद्दे को प्रमुखता के साथ प्रकाशि किया था। बताया था कि 3.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल के आजमगढ़ जनपद में मात्र 110 हेक्टेयर पर ही वन क्षेत्र हैं। अमर उजाला की ओर से उठाए गए इस मुद्दे का संज्ञान कमिश्नर एसवीएस रंगाराव ने लिया है। उन्होंने मंडल के तीनों जिलाधिकारी को पत्र लिखकर एक फीसदी से कम फारेस्ट कवरेज होने पर नाराजगी जताई है। कहा है कि मानक के अनुसार 17 फीसदी भू-भाग पर फारेस्ट कवरेज होनी चाहिए। उपलब्ध सरकारी जमीन पर विभागीय बजट और मनरेगा की डबटेलिंग धनराशि से पौधरोपण कराया जाए। इसके साथ ही जनपद से होकर गुजरने वाली नदियों की चौड़ाई की पैमाइश करा हर सौ मीटर पर समांकन कर पीलर लगाया जाए। इसके लिए धनराशि का प्रबंध निकाय और ग्राम पंचायत का खाते से किया जाए। जहां पिलर लगाया जाए उस स्थान का जीपीए कोआर्डिनेट लेकर अभिलेखों में सुरक्षित किया जाए। इसके साथ ही नदी के किनारे बची जमीन पर वन विभाग की ओर से पौधरोपण कराया जाए। ताकि मंडल के तीनों जनपदों की फारेस्ट कवरेज मानक के अनुसार हो जाए।
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