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लक्ष्य 90 हजार का, बने सिर्फ 23 सौ

Sun, 03 Sep 2017 11:47 PM IST
Updated Sun, 03 Sep 2017 11:47 PM IST
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लक्ष्य 90 हजार का, बने सिर्फ 23 सौ
आजमगढ़। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत का जो ताना-बाना बुना वह शौचालय से होकर गुजरता है। लेकिन अभी तक जनपद में यह योजना शैशवावस्था में है। अधिकारियों के अनुसार इस योजना को परवान चढ़ाने में धन की कमी भी आड़े आ रही है। यही कारण है कि लक्ष्य 90 हजार के बावजूद सिर्फ 23 सौ शौचालय ही जिले में बने हैं।
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सरकार ने 2018 तक पूरे प्रदेश को ओडीएफ घोषित करने की योजना बनाई है। इसके तहत तेजी से कार्य भी हो रहा है। लेकिन जागरूकता की कमी के कारण गांवों में अभी तक यह योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी हैं। जो शौचालय का पैसा खाते से निकालकर अपने सहूलियत के हिसाब से दूसरे कामों में खर्च कर देते हैं। जनपद में ऐसे कई मामलों में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और कई लोगों ने निकाले गए पैसे को वापस लौटाया है। इस योजना को परवान चढ़ाने के लिए अधिकारी अपनी तरफ से पूरा प्रयास कर रहे हैं लेकिन धन की कमी उनके सारे प्रयासों पर पानी फेर रही है। जिले में शौचालय निर्माण के लिए 90362 शौचालय निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लेकिन इसके सापेक्ष जनपद में यह शौचालय निर्माण का कार्य लक्ष्य से कोसों दूर है। जिले में अब तक 3800 शौचालयों के लिए पैसा भेजा गया है इनमें से 2300 शौचालय का निर्माण हो चुका है। इस योजना के तहत लाभार्थियों को सरकार की ओर से शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये की धनराशि मिलती है। पहले यह राशि दो किश्तों में मिलती थी लेकिन अब यह तीन किश्तों में भेजी जा रही है। पहले ग्राम पंचायतों द्वारा शौचालय का निर्माण कराया जाता था। लेकिन अब ग्राम प्रधानों के द्वारा सीधे लाभार्थियों के खाते में धनराशि भेजी जाती है। दरअसल पूर्ववर्ती सरकार में 19 गांवों को ओडीएफ घोषित किया गया। अमर उजाला ने जब इन गांवों की जांच कराई तो पता चला कि इनमें से ज्यादातर गांव ऐसे हैं जिनकी आबादी एक या दो घरों की है। जो बड़े गांव हैं उनमें अभी भी बहुत से लोग खुले में शौच जाते हैं।
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केस नंबर 1-
आजमगढ़। शौचालय निर्माण में धांधली के कारण अब तक जनपद में यह योजना परवान नहीं चढ़ सकी। ऐसा ही एक मामला लालगंज तहसील के ठेकमा विकास खंड के भगवानपुर गांव में जांच के दौरान सामने आया। जिसमें सेक्रेटरी अजय कुमार सोनी द्वारा 137 लोगों के शौचालय का पैसा निकाला गया। जिसमें से 24 लोगों का 2.88 लाख रुपये बांटे ही नहीं गए। जांच में मामला प्रकाश में आने पर सेक्रेटरी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
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केस नंबर 2-
आजमगढ़। पल्हना विकास खंड के भोजपुर गांव के प्रधान और सेक्रेटरी ने 72 शौचालय का पैसा निकाल लिया। जब इसकी शिकायत मिली तो सीडीओ ने इसकी जांच कराई। जांच में पता चला कि भोजपुर गांव में 175 शौचालय निर्माण के लिए 21लाख रुपये दिए गए थे। सारी रकम ग्राम प्रधान पूनम देवी पत्नी रविंद्र और सेक्रेटरी संतोष कुमार के संयुक्त खाते में भेजी गई है। जांच में 72 शौचालयों के 7.68 लाख रुपये गबन का मामला सामने आया। इस पर मुख्य विकास अधिकारी के निर्देश पर शनिवार को एडीओ पंचायत प्रथम राजेंद्र कुुमार ने देवगांव कोतवाली में ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।

इनसेट:
शासन की ओर से जनपद के लिए शौचालय निर्माण का लक्ष्य तो निर्धारित कर दिया गया। लेकिन इसके निर्माण के लिए पैसा नहीं भेजा गया। जो पैसा था उससे 3800 शौचालय बन सकते थे। जिसे भेज दिया गया है इनमें से 2300 शौचालय का निर्माण पूरा हो चुका है। बाकी का निर्माण चल रहा है।
जितेंद्र कुमार मिश्र, जिला पंचायत राज अधिकारी
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