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ईद-ए-जहरा के रुप में शिया समुदाय ने मनाया नौरोज
Updated Sun, 18 Nov 2018 11:27 PM IST
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मेजवां। फूलपुर कस्बा समेत ग्रामीण क्षेत्र में रविवार को शिया समुदाय के लोगों ने नौरोज का पर्व ईद-ए-जहरा के रुप में मनाया। नौ रविअव्वल होने पर शोक का परित्याग कर महिलाओं ने बालियां व बूंदे पहन कर शृंगार किया। इसके साथ ही घर-घर पकवान बनाए गए और महफिलों का आयोजन हुआ। मोहर्रम के बाद आठ रविअव्वल तक जुलूसों और अमारियों का सिलसिला जारी रहा। इस दौरान शिया समुदाय की महिलाएं शृंगार का त्याग कर शोक में रहती हैं। नौ रविअव्वल को शोक का परित्याग किया जाता है और महिलाएं बलियां व बूंदा पहन कर शृंगार करती हैं। नौ रविअव्व्ल की विशेषता को बताते हुए शिया धर्म गुरु मौलाना फरहत हुसैन ईरान कहते है कि इसी दिन इमाम जैनुल आब्दीन वाकयाते कर्बला के बाद जब जनाबे मुख्तार को कैद से रिहा किया तो मुख्तार ने इमाम हुसैन के कातिलों से बदला लेना शुरू किया। कातिल हुरमुला गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में उसने अपना गुनाह कुबूल कर लिया। इस पर हुरमुला का सिर कलम कर दिया गया। इसकी जानकारी जब इमाम जैनुलआब्दीन को हुई तो इमाम एक बारगी मुस्कुरा दिए। इसी कड़ी में शिया समुदाय के लोग नौरोज को ईद-ए-जहरा के रूप में मनाकर खुशियां मनाते है। रविवार को पूरे क्षेत्र में नौरोज की खुशियां दिखायी दी। जगह-जगह महफिले आयोजित हुई तो घरों में पकवान बने। आठ रविअव्वल तक शृंगार का त्याग कर शोक में रहने वाली महिलाओं ने चूड़ियां, सुर्ख लिबास पहन कर शोक का त्याग किया।
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