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कई विभागों की वितीय प्रगति मिली शून्य, नाराजगी जताई
Updated Fri, 16 Nov 2018 11:03 PM IST
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आजमगढ़। जिले के कई विभागों की वित्तीय प्रगति शून्य पाई गई है। यह बात गुरुवार देर रात को डीएम शिवाकांत द्विवेदी के कृषि एवं सम्वर्गीय विभागों उद्यान, पशुपालन, गन्ना, मत्स्य, सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ योजनाओं की समीक्षा के दौरान सामने आई। इस दौरान सभी विभागों को नवंबर 2018 तक शत प्रतिशत व्यय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत 2018-19 में कृषि, उद्यान, गन्ना, पशुपालन, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग को सम्मिलित करते हुए कुल 202.04 लाख रुपये की प्राप्त धनराशि के सापेक्ष अक्तूबर तक कुल 81.59 लाख रुपये व्यय किया गया है। गन्ना, मत्स्य एवं सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग का व्यय शून्य पाया गया। संबंधित अधिकारियों को नवंबर तक शत प्रतिशत व्यय सुनिश्चित करने को कहा। कृषि, उद्यान एवं पशुपालन विभाग द्वारा आवंटित धनराशि के सापेक्ष क्रमश: 70.96, 30.26 और 32.47 प्रतिशत की धनराशि व्यय किया गया था। जिला कृषि योजना तैयार करने के लिए नामित कृषि उत्पादकता परिषद के निदेशक डॉ. आर.पी सिंह ने बताया कि आजमगढ़ के लिए 2017 से 2022 तक की जिला कृषि योजना की तैयारी अंतिम चरण में है। संबंधित विभाग से प्रस्ताव प्राप्त हो गए हैं। कृषि विभाग से 24.26 करोड़, उद्यान विभाग से 4.08 करोड़, गन्ना विभाग से 3.09 करोड़, पशुपालन विभाग से 3.08 करोड़, दुग्ध विकास से 42 लाख, मत्स्य उत्पादन से 2.58 करोड़ और रेशम उत्पादन से 24 लाख का प्रावधान करते हुए 05 वर्षों की कुल 37.77 करोड़ रुपये का परिव्यय प्रस्तावित किया गया है। यदि कोई संशोधन करना है तो संशोधित प्रस्ताव तीन दिवस के अंदर उप कृषि निदेशक कार्यालय को उपलब्ध करा दें।
डीएम ने अधिकारियों व एनपीसी के निदेशक को निर्देशित किया कि फसल सिंचन क्षमता में वृद्धि करने के उपकरण स्प्रिंकलर सेट, ड्रिप इरिगेशन और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए योजनाओं को समावेश किया जाए। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत परती भूमि विकास एवं जल संसाधन विभाग को 1.47 करोड़ और उद्यान विभाग को 30.6 लाख रुपये प्राप्त हुए हैं। इसके सापेक्ष भूमि विकास एवं जल संसाधन विभाग की वित्तीय प्रगति शून्य मिली। उद्यान विभाग द्वारा मात्र 22.5 लाख रुपये व्यय किया गया है। कम व्यय पर नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि नियमानुसार नवंबर में व्यय सुनिश्चित करें। राष्ट्रीय खाद सुरक्षा मिशन योजना में विभिन्न घटकों के वित्तीय प्रगति समीक्षा में पाया गया कि वित्तीय वर्ष में आवंटित कुल 3.72 करोड़ रुपये के सापेक्ष 2.13 करोड़ रुपये की धनराशि चावल, गेहूं, दलहन, अतिरिक्त दलहन तथा तिलहन के अंतर्गत विभिन्न कार्य मदों में व्यय की गई है जो आवंटित धनराशि का 58 प्रतिशत है।
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उप कृषि निदेशक डॉ. आर.के मौर्य द्वारा बताया गया कि शेष धनराशि रबी की फसल में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में व्यय होनी है। ठेकमा के मुस्तफाबाद में सामुदायिक गोदाम निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच तकनीकी अधिकारियों को टीम गठित कर कराने के निर्देश दिए। हरैया में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा निर्मित किसान कल्याण केंद्र की भी जांच कराने के निर्देश दिए। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अवर अभियंता को निर्देशित किया कि पिछले तीन वर्ष के परियोजनाओं के कार्य के प्रगति और यथा स्थिति की रिपोर्ट उप कृषि निदेशक को तत्काल उपलब्ध कराएं। सीडीओ कमलेश कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार गुप्ता, भूमि संरक्षण अधिकारी संगम सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वी.के सिंह, जिला उद्यान अधिकारी बीके वर्मा, कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा के वैज्ञानिक डॉ. आरपी सिंह सहित नहर, नलकूप, सिंचाई, सहकारिता, मत्स्य, दुग्ध तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत 2018-19 में कृषि, उद्यान, गन्ना, पशुपालन, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग को सम्मिलित करते हुए कुल 202.04 लाख रुपये की प्राप्त धनराशि के सापेक्ष अक्तूबर तक कुल 81.59 लाख रुपये व्यय किया गया है। गन्ना, मत्स्य एवं सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग का व्यय शून्य पाया गया। संबंधित अधिकारियों को नवंबर तक शत प्रतिशत व्यय सुनिश्चित करने को कहा। कृषि, उद्यान एवं पशुपालन विभाग द्वारा आवंटित धनराशि के सापेक्ष क्रमश: 70.96, 30.26 और 32.47 प्रतिशत की धनराशि व्यय किया गया था। जिला कृषि योजना तैयार करने के लिए नामित कृषि उत्पादकता परिषद के निदेशक डॉ. आर.पी सिंह ने बताया कि आजमगढ़ के लिए 2017 से 2022 तक की जिला कृषि योजना की तैयारी अंतिम चरण में है। संबंधित विभाग से प्रस्ताव प्राप्त हो गए हैं। कृषि विभाग से 24.26 करोड़, उद्यान विभाग से 4.08 करोड़, गन्ना विभाग से 3.09 करोड़, पशुपालन विभाग से 3.08 करोड़, दुग्ध विकास से 42 लाख, मत्स्य उत्पादन से 2.58 करोड़ और रेशम उत्पादन से 24 लाख का प्रावधान करते हुए 05 वर्षों की कुल 37.77 करोड़ रुपये का परिव्यय प्रस्तावित किया गया है। यदि कोई संशोधन करना है तो संशोधित प्रस्ताव तीन दिवस के अंदर उप कृषि निदेशक कार्यालय को उपलब्ध करा दें।
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डीएम ने अधिकारियों व एनपीसी के निदेशक को निर्देशित किया कि फसल सिंचन क्षमता में वृद्धि करने के उपकरण स्प्रिंकलर सेट, ड्रिप इरिगेशन और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए योजनाओं को समावेश किया जाए। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत परती भूमि विकास एवं जल संसाधन विभाग को 1.47 करोड़ और उद्यान विभाग को 30.6 लाख रुपये प्राप्त हुए हैं। इसके सापेक्ष भूमि विकास एवं जल संसाधन विभाग की वित्तीय प्रगति शून्य मिली। उद्यान विभाग द्वारा मात्र 22.5 लाख रुपये व्यय किया गया है। कम व्यय पर नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि नियमानुसार नवंबर में व्यय सुनिश्चित करें। राष्ट्रीय खाद सुरक्षा मिशन योजना में विभिन्न घटकों के वित्तीय प्रगति समीक्षा में पाया गया कि वित्तीय वर्ष में आवंटित कुल 3.72 करोड़ रुपये के सापेक्ष 2.13 करोड़ रुपये की धनराशि चावल, गेहूं, दलहन, अतिरिक्त दलहन तथा तिलहन के अंतर्गत विभिन्न कार्य मदों में व्यय की गई है जो आवंटित धनराशि का 58 प्रतिशत है।
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उप कृषि निदेशक डॉ. आर.के मौर्य द्वारा बताया गया कि शेष धनराशि रबी की फसल में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में व्यय होनी है। ठेकमा के मुस्तफाबाद में सामुदायिक गोदाम निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच तकनीकी अधिकारियों को टीम गठित कर कराने के निर्देश दिए। हरैया में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा निर्मित किसान कल्याण केंद्र की भी जांच कराने के निर्देश दिए। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अवर अभियंता को निर्देशित किया कि पिछले तीन वर्ष के परियोजनाओं के कार्य के प्रगति और यथा स्थिति की रिपोर्ट उप कृषि निदेशक को तत्काल उपलब्ध कराएं। सीडीओ कमलेश कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार गुप्ता, भूमि संरक्षण अधिकारी संगम सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वी.के सिंह, जिला उद्यान अधिकारी बीके वर्मा, कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा के वैज्ञानिक डॉ. आरपी सिंह सहित नहर, नलकूप, सिंचाई, सहकारिता, मत्स्य, दुग्ध तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।