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Azamgarh News: कंप्यूटरीकृत होंगी 148 बहुउद्देशीय समितियां
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आजमगढ़। जिले की 148 बहु उद्देशीय प्रारंभिक ग्रामीण समितियों (बी पैक्स) को कंप्यूटरीकृत किया जाएगा। इससे समितियों का लेखा जोखा ऑनलाइन हो जाएगा। कर्मचारियों को कार्य करने में और सहूलियत मिलेगी। प्रति समिति पर पांच लाख रुपये खर्च होंगे।
जिले में कुल 250 समितियां हैं। इसमें से 205 समितियां सक्रिय हैं। यहां से किसानों को उर्वरक, ऋण आदि सुविधाएं मिलती है। केंद्र में सहकारिता मंत्रालय बनने के बाद सरकार ने इसका नाम बदलकर बी पैक्स कर दिया है। हर समितियों पर 250-250 सदस्य भी बनाए जा चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित समितियों के जीर्णोद्धार के साथ ही केंद्र सरकार की केंद्र पुरोनिधानिक योजना के तहत कंप्यूटरीकरण करने का काम शुरू कर दिया है। समितियों पर लोगों को उर्वरक, ऋण के साथ- साथ सीएचसी, दवा आदि की सुविधा मिल सकेगी।पहले दो चरणों में 60 समितियों को कंप्यूटरीकृत किया जा चुका है। अब तीसरे चरण में 148 समितियों को कंप्यूटराइजेशन करने की शासन से स्वीकृति मिल चुकी है। प्रत्येक समिति पर पांच लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। कंप्यूटर के साथ प्रिंटर, सीपीयू, इंवर्टर, बैट्री लगाई जाएगी। इससे उर्वरक, लेन-देन, कृषक सदस्यों की सदस्यता सहित सब कुछ ऑनलाइन हो जाएगा। सभी को पैक्सफेड साफ्टवेयर से अपडेट किया जाएगा। समितियों में कंप्यूटर की सुविधा हो जाने के बाद किसानों के बिल और समितियों से संबंधित सभी कार्य यहां पर होंगे।
समितियों के कंप्यूटराइजेशन होने से धांधली रूकेगी। ब्यौरा ऑनलाइन होने से सरकार भी आसानी से साधन सहकारी समितियों के लेखा- जोखा पर निगाह रख सकेगी। अब किसी भी डेटा को इधर- उधर नहीं किया जा सकेगा। संवाद
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जिले की 138 समितियों का कंप्यूटराइजेशन करने की स्वीकृति मिली है। सभी को पैक्सफेड साफ्टवेयर से अपडेट किया जाएगा। इससे समितियों के सभी कार्य ऑनलाइन हो जाएंगे। इस पर आसानी से नजर रखी जा सकेगी। - अजय कुमार, एआर सहकारिता।
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जिले में कुल 250 समितियां हैं। इसमें से 205 समितियां सक्रिय हैं। यहां से किसानों को उर्वरक, ऋण आदि सुविधाएं मिलती है। केंद्र में सहकारिता मंत्रालय बनने के बाद सरकार ने इसका नाम बदलकर बी पैक्स कर दिया है। हर समितियों पर 250-250 सदस्य भी बनाए जा चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित समितियों के जीर्णोद्धार के साथ ही केंद्र सरकार की केंद्र पुरोनिधानिक योजना के तहत कंप्यूटरीकरण करने का काम शुरू कर दिया है। समितियों पर लोगों को उर्वरक, ऋण के साथ- साथ सीएचसी, दवा आदि की सुविधा मिल सकेगी।पहले दो चरणों में 60 समितियों को कंप्यूटरीकृत किया जा चुका है। अब तीसरे चरण में 148 समितियों को कंप्यूटराइजेशन करने की शासन से स्वीकृति मिल चुकी है। प्रत्येक समिति पर पांच लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। कंप्यूटर के साथ प्रिंटर, सीपीयू, इंवर्टर, बैट्री लगाई जाएगी। इससे उर्वरक, लेन-देन, कृषक सदस्यों की सदस्यता सहित सब कुछ ऑनलाइन हो जाएगा। सभी को पैक्सफेड साफ्टवेयर से अपडेट किया जाएगा। समितियों में कंप्यूटर की सुविधा हो जाने के बाद किसानों के बिल और समितियों से संबंधित सभी कार्य यहां पर होंगे।
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समितियों के कंप्यूटराइजेशन होने से धांधली रूकेगी। ब्यौरा ऑनलाइन होने से सरकार भी आसानी से साधन सहकारी समितियों के लेखा- जोखा पर निगाह रख सकेगी। अब किसी भी डेटा को इधर- उधर नहीं किया जा सकेगा। संवाद
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जिले की 138 समितियों का कंप्यूटराइजेशन करने की स्वीकृति मिली है। सभी को पैक्सफेड साफ्टवेयर से अपडेट किया जाएगा। इससे समितियों के सभी कार्य ऑनलाइन हो जाएंगे। इस पर आसानी से नजर रखी जा सकेगी। - अजय कुमार, एआर सहकारिता।