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कहीं टूटा धनुष तो कहीं हुआ ताड़का वध
Updated Fri, 29 Sep 2017 11:43 PM IST
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आजमगढ़। दशहरे के अवसर पर जनपद में जगह-जगह आयोजित होने वाली रामलीला का पारंपरिक ढ़ंग से मंचन किया जा रहा है। कलाकारों के भावपूर्ण मंचन को देखने के लिए श्रद्घालुओं का रेला उमड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित रामलीला में गुरुवार को कहीं धनुष यज्ञ, कहीं ताड़का वध तो कहीं राम-सुग्रीव मित्रता का मंचन किया गया।
अंबारी संवाददाता के अनुसार फूलपुर तहसील के ओरील बाजार में आयोजित रामलीला के सातवें दिन गुरुवार की रात भगवान राम और सुग्रीव की मित्रता का मंचन किया गया। सनीता की तलाश में निकले राम और लक्ष्मण सेवरी के आश्रम में पहुंचते हैं। जहां वह सेवरी के झूठे बेर खाते हैं। सेवरी के कहने पर वह किष्किंधा पर्वत पर जाते हैं। जहां सुग्रीव से उनकी मित्रता होती है। इस मौके पर राजदेव, सजंय प्रधान, डा. रामू, डा. अरविंद आदि उपस्थित थे। वहीं माहुल की रामलीला में कलाकारों द्वारा ताड़का वध का मंचन किया गया। ऋषि विश्वामित्र यज्ञ की रक्षा के लिए राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को मांगते हैं। ऋषि के साथ जंगल में पहुंचकर राम और लक्ष्मण ताड़का का वध करते हैं।
वहीं फूलपुर तहसी के पट्टी रूपधर गांव की रामलीला में सीता स्वयंबर और धनुष यज्ञ का मंचन किया गया। धनुष टूटने के बाद परशुराम स्वयंबर में पहुंचते हैं जहां उनके और लक्ष्मण के बीच संवाद होता है। बाद में वह श्रीराम के आगे सिर झुकाते हैं। इस मौके पर जितेंद्र शुक्ला, श्रीकांत शुक्ला, विनोद शुक्ला, सोनू, मोनू, सुरेंद्र शर्मा, अर्जुन शर्मा, राम रतन शर्मा आदि उपस्थित थे। सरायमीर संवाददाता के अनुसार श्रीराम लीला सेवा समिति सरायमीर के तत्वाधान में सुग्रीव और बालि युद्घ का मंचन किया गया। युद्घ के दौरान श्रीराम सुग्रीव को अपनी माला पहनाकर भेजते हैं और बालि को मारते हैं। इसके बाद सुग्रीव सीता की खोज में राम का साथ देने का वचन देता है। मेेेजवां संवाददाता के अनुसार फूलपुर रामलीला मैदान की रामलीला में लंका दहन प्रसंग का मंचन किया गया। अयोध्या से आए कलाकारों ने लंकर दहन वृतांत का बड़ा ही मार्मिक मंचन किया। लंका दहन होते ही जय श्रीराम के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। इस मौके पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष राम आशीष रावत, प्रदीप कुमार मौर्य, शक्ति ओम चौरसिया, डा. परिमल कुमार जोधार, रत्नेश रावत आदि उपस्थित थे। सगड़ी संवाददाता के अनुसार रामगढ़ इसरापार की रामलीला में सीता हरण का मंचन किया गया। जिसमें सोने के हिरण का पीछा करते हुए राम के जाने के बाद सीता लक्ष्मण को भी भेज देती है। तभी रावण साधु के वेष में आता है और सीता का हरण करता है। इस मौके पर अशोक बारी, हरिनाथ, बड़े राय, मोनू दुबे, राजेश कुमार, संजीव सिंह, रविशंकर, धर्म शंकर आदि उपस्थित थे।
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अंबारी संवाददाता के अनुसार फूलपुर तहसील के ओरील बाजार में आयोजित रामलीला के सातवें दिन गुरुवार की रात भगवान राम और सुग्रीव की मित्रता का मंचन किया गया। सनीता की तलाश में निकले राम और लक्ष्मण सेवरी के आश्रम में पहुंचते हैं। जहां वह सेवरी के झूठे बेर खाते हैं। सेवरी के कहने पर वह किष्किंधा पर्वत पर जाते हैं। जहां सुग्रीव से उनकी मित्रता होती है। इस मौके पर राजदेव, सजंय प्रधान, डा. रामू, डा. अरविंद आदि उपस्थित थे। वहीं माहुल की रामलीला में कलाकारों द्वारा ताड़का वध का मंचन किया गया। ऋषि विश्वामित्र यज्ञ की रक्षा के लिए राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को मांगते हैं। ऋषि के साथ जंगल में पहुंचकर राम और लक्ष्मण ताड़का का वध करते हैं।
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वहीं फूलपुर तहसी के पट्टी रूपधर गांव की रामलीला में सीता स्वयंबर और धनुष यज्ञ का मंचन किया गया। धनुष टूटने के बाद परशुराम स्वयंबर में पहुंचते हैं जहां उनके और लक्ष्मण के बीच संवाद होता है। बाद में वह श्रीराम के आगे सिर झुकाते हैं। इस मौके पर जितेंद्र शुक्ला, श्रीकांत शुक्ला, विनोद शुक्ला, सोनू, मोनू, सुरेंद्र शर्मा, अर्जुन शर्मा, राम रतन शर्मा आदि उपस्थित थे। सरायमीर संवाददाता के अनुसार श्रीराम लीला सेवा समिति सरायमीर के तत्वाधान में सुग्रीव और बालि युद्घ का मंचन किया गया। युद्घ के दौरान श्रीराम सुग्रीव को अपनी माला पहनाकर भेजते हैं और बालि को मारते हैं। इसके बाद सुग्रीव सीता की खोज में राम का साथ देने का वचन देता है। मेेेजवां संवाददाता के अनुसार फूलपुर रामलीला मैदान की रामलीला में लंका दहन प्रसंग का मंचन किया गया। अयोध्या से आए कलाकारों ने लंकर दहन वृतांत का बड़ा ही मार्मिक मंचन किया। लंका दहन होते ही जय श्रीराम के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। इस मौके पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष राम आशीष रावत, प्रदीप कुमार मौर्य, शक्ति ओम चौरसिया, डा. परिमल कुमार जोधार, रत्नेश रावत आदि उपस्थित थे। सगड़ी संवाददाता के अनुसार रामगढ़ इसरापार की रामलीला में सीता हरण का मंचन किया गया। जिसमें सोने के हिरण का पीछा करते हुए राम के जाने के बाद सीता लक्ष्मण को भी भेज देती है। तभी रावण साधु के वेष में आता है और सीता का हरण करता है। इस मौके पर अशोक बारी, हरिनाथ, बड़े राय, मोनू दुबे, राजेश कुमार, संजीव सिंह, रविशंकर, धर्म शंकर आदि उपस्थित थे।
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