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13 पुलिसवालों को मिली थी बैडइंट्री
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आजमगढ़। आतंक का पर्याय सचिन पांडेय लखनऊ में हुए पुलिस मुठभेड़ में ढेर हो गया। रविवार को उसके मारे जाने के बाद उन तेरह पुलिस वालों के भी कलेजे पर ठंडक पड़ गई, जिन्हें सचिन और उसके साथी वैभव यादव को गिरफ्तार करने पर बधाई देने की बजाय बैडइंट्री दे दी गई थी। इसमें दो इंस्पेक्टर, तीन दरोगा और छह सिपाही शामिल थे। यह सभी किसी तरह से अपनी नौकरी बचाने में सफल हुए। एक साथ 13 पुलिसवालों की नौकरी दाव पर लगने से जिले की फोर्स का मनोबल टूट गया था।
जिन पुलिस वालों को अधिकारियों की तरफ से बैडइंट्री दी गई थी। उसमें इंस्पेक्टर रहे मो. ईसा खां, आशीष मिश्रा, दरोगा राजेश यादव, अशेषनाथ सिंह, बीबी सिंह के अलावा छह कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल का नाम शामिल है। इन सभी पुलिस वालों को साल 2015 में इनके पद से हटाकर लाइन हाजिर कर दिया गया। साथ ही सचिन पांडेय और वैभव यादव को गिरफ्तार करने का कारण पूछा गया था। पुरानी याद ताजा करते हुए मऊ जिले के स्वांट टीम प्रभारी राजेश यादव ने बताया कि साल 2013 में सचिन और वैभव ने सीओसिटी के हमराही को गोली मार दी। पुलिस के लिए यह घटना चुनैती बन गई थी। क्योंकि इन बदमाशों का आतंक शहर और उसके आसपास रहा। ऐसे में तत्कालीन एसपी अरविंद सेन ने इन पुलिस वालों को दोनों बदमाशों की गिरफ्तारी का टारगेट दिया था। जिसके तहत पुलिस कठिन परिश्रम करते हुए इन दोनों को गिरफ्तार कर ली। इस दौरान सचिन पांडेय मुठभेड़ में पुलिस की गोली से घायल हो गया था। गिरफ्तारी के बाद बदमाशों के परिवार के लोग मानवाधिकार सहित अन्य संगठनों में शिकायत किए थे। वहां से जवाब मांगा गया तो तत्कालीन अधिकारीगण दबाव में आकर संगठन को जवाब देने की बजाय इन पुलिस वालों को उनके पद से हटाते हुए बैडइंट्री दे दिया था।
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जिन पुलिस वालों को अधिकारियों की तरफ से बैडइंट्री दी गई थी। उसमें इंस्पेक्टर रहे मो. ईसा खां, आशीष मिश्रा, दरोगा राजेश यादव, अशेषनाथ सिंह, बीबी सिंह के अलावा छह कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल का नाम शामिल है। इन सभी पुलिस वालों को साल 2015 में इनके पद से हटाकर लाइन हाजिर कर दिया गया। साथ ही सचिन पांडेय और वैभव यादव को गिरफ्तार करने का कारण पूछा गया था। पुरानी याद ताजा करते हुए मऊ जिले के स्वांट टीम प्रभारी राजेश यादव ने बताया कि साल 2013 में सचिन और वैभव ने सीओसिटी के हमराही को गोली मार दी। पुलिस के लिए यह घटना चुनैती बन गई थी। क्योंकि इन बदमाशों का आतंक शहर और उसके आसपास रहा। ऐसे में तत्कालीन एसपी अरविंद सेन ने इन पुलिस वालों को दोनों बदमाशों की गिरफ्तारी का टारगेट दिया था। जिसके तहत पुलिस कठिन परिश्रम करते हुए इन दोनों को गिरफ्तार कर ली। इस दौरान सचिन पांडेय मुठभेड़ में पुलिस की गोली से घायल हो गया था। गिरफ्तारी के बाद बदमाशों के परिवार के लोग मानवाधिकार सहित अन्य संगठनों में शिकायत किए थे। वहां से जवाब मांगा गया तो तत्कालीन अधिकारीगण दबाव में आकर संगठन को जवाब देने की बजाय इन पुलिस वालों को उनके पद से हटाते हुए बैडइंट्री दे दिया था।
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