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दिव्यांगजनों की प्रतिभाओं को निखारने की जरूरत- ओमप्रकाश
Updated Fri, 19 Jan 2018 12:09 AM IST
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आजमगढ़। प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री ओम प्रकाश राजभर का गुरुवार को मार्टीनगंज तहसील के बरौना बाजार में आयोजित उपकरण वितरण कार्यक्रम में आगमन हुआ। इस दौरान उन्होंने दिव्यांगजनों में 25 ट्राइसाइकिल और 10 जोड़ी बैसाखी का वितरण किया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार दिव्यांगजनों के कल्याणार्थ अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। उन तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना ही लक्ष्य है। दिव्यांगजनों के अन्दर अनेक प्रतिभाएं छिपी हुई हैं इसे निखारने की जरूरत है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सभी दिव्यांजनों को पेंशन उपलब्ध कराएं इसके लिए शिविर आयोजित कर इनका चिन्हांकन करते हुए पेंशन की कार्रवाई प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करें, धन की कमी आड़े नहीं आएगी। उन्होंने शिक्षा पर बल देते हुए कहा कि समाज में शिक्षित होना बहुत ही आवश्यक है और शिक्षित व्यक्ति ही विकास के पथ पर अग्रसर होता है। उन्होंने लड़कियों के शिक्षा पर विशेष बल दिया। बोले हमारा यह कर्तव्य है कि हम विकलांगों के प्रति अपना दृष्टिकोंण बदलें। उनके प्रति मानवीय दृष्टि का परिचय दें। उनमें निहित हीन भावना को दूर कर उनके आत्म विश्वास जगाएं। उनके पुनर्वास के लिए प्रयत्नशील रहें। उनके अनुभव कराया जाए कि वे भी समाज का एक महत्वपूर्ण अंग हैं। उन्हें भी एक सामान्य व्यक्ति के समान अधिकार प्राप्त है। इस मौके पर दिव्यांग, उनके अभिभावक और संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
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उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार दिव्यांगजनों के कल्याणार्थ अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। उन तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना ही लक्ष्य है। दिव्यांगजनों के अन्दर अनेक प्रतिभाएं छिपी हुई हैं इसे निखारने की जरूरत है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सभी दिव्यांजनों को पेंशन उपलब्ध कराएं इसके लिए शिविर आयोजित कर इनका चिन्हांकन करते हुए पेंशन की कार्रवाई प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करें, धन की कमी आड़े नहीं आएगी। उन्होंने शिक्षा पर बल देते हुए कहा कि समाज में शिक्षित होना बहुत ही आवश्यक है और शिक्षित व्यक्ति ही विकास के पथ पर अग्रसर होता है। उन्होंने लड़कियों के शिक्षा पर विशेष बल दिया। बोले हमारा यह कर्तव्य है कि हम विकलांगों के प्रति अपना दृष्टिकोंण बदलें। उनके प्रति मानवीय दृष्टि का परिचय दें। उनमें निहित हीन भावना को दूर कर उनके आत्म विश्वास जगाएं। उनके पुनर्वास के लिए प्रयत्नशील रहें। उनके अनुभव कराया जाए कि वे भी समाज का एक महत्वपूर्ण अंग हैं। उन्हें भी एक सामान्य व्यक्ति के समान अधिकार प्राप्त है। इस मौके पर दिव्यांग, उनके अभिभावक और संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
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