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जेल जाने की आई नौबत तो पूरा हुआ तिराहे का निर्माण
Updated Thu, 07 Sep 2017 12:47 AM IST
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आजमगढ़। वर्ष 2014 से नगर के रैदोपुर स्थित त्रिमूर्ति तिराहे का निर्माण विशाल कांस्ट्रक्शन द्वारा कराया जा रहा था। लगभग तीन वर्ष बीतने के बाद भी तिराहे के सुंदरीकरण का कार्य पूरा नहीं हो सका। जैसे ही जिलाधिकारी ने कंपनी के ठेकेदार को जेल भेजने के लिए कहा, एक हफ्ते ही तिराहे पर मार्बल आदि लगाने का कार्य पूरा हो गया। अब चौराहे पर फव्वारा लगाने के व्यवस्था की जा रही है।
बताते चलें कि पूर्व जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने नगर के चौराहों और तिराहों का सुंदरीकरण का कार्य शुरू कराया था। प्राइवेट संस्था के लोगों को एक-एक चौराहा देकर उसके सुंदरीकरण का जिम्मा सौंपा गया था। इस दौरान नगरपालिका ने भी त्रिमूर्ति तिराहा, नरौली तिराहा और सिविल लाइन में घंटाघर बनाने का जिम्मा संभाला। नगरपालिका 2014 में इस कार्य को करने के लिए टेंडर के जरिए त्रिमूर्ति तिराहे और घंटाघर निर्माण का जिम्मा विशाल कांस्ट्रक्शन को दिया। 10 लाख से हो रहे त्रिमूर्ति तिराहे का ठेकेदार की ओर से शुरू में तेजी से कार्य कराया गया, लेकिन बाद में उसके निर्माण की रफ्तार धीमी हो गई। कार्य अधूरा छोड़ दिया गया। नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी ने कई बार ठेकेदार को त्रिमूर्ति तिराहे के निर्माण को पूरा करने के लिए कहा, लेकिन ठेकेदार द्वारा कार्य नहीं कराया गया। मामला जिलाधिकारी के दरबार में पहुंचा। जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने ठेकेदार को तलब किया और जेल भेजने की चेतावनी दी। इतना कहना था कि ठेकेदार की ओर से एक हफ्ते में ही त्रिमूर्ति तिराहे के निर्माण को पूरा कर लिया गया।
नहीं सेट हुआ घड़ियों का टाइम
आजमगढ़। विशाल कंस्ट्रक्शन कंपनी को ही नगर के सिविल लाइन स्थित घंटाघर के निर्माण की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस घंटाघर के निर्माण में भी लगभग तीन वर्ष का समय लग चुका है, लेकिन अभी तक निर्माण पूरा नहीं हो सका। पिलर खड़े कर घड़ियां टांग दी गईं, लेकिन इसके निचले हिस्से का कार्य अभी अधूरा है। ठेकेदार ने घंटाघर का पिलर खड़ाकर इसमें घड़ी तो लगवा दीं, लेकिन वह इन घड़ियों में टाइम सेट करना भूल गया। इसका परिणाम है कि घड़ी लगे हुए कई माह बीत गए लेकिन यहां लगी चारों घड़ियां आज भी चार समय बताती हैं।
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बताते चलें कि पूर्व जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने नगर के चौराहों और तिराहों का सुंदरीकरण का कार्य शुरू कराया था। प्राइवेट संस्था के लोगों को एक-एक चौराहा देकर उसके सुंदरीकरण का जिम्मा सौंपा गया था। इस दौरान नगरपालिका ने भी त्रिमूर्ति तिराहा, नरौली तिराहा और सिविल लाइन में घंटाघर बनाने का जिम्मा संभाला। नगरपालिका 2014 में इस कार्य को करने के लिए टेंडर के जरिए त्रिमूर्ति तिराहे और घंटाघर निर्माण का जिम्मा विशाल कांस्ट्रक्शन को दिया। 10 लाख से हो रहे त्रिमूर्ति तिराहे का ठेकेदार की ओर से शुरू में तेजी से कार्य कराया गया, लेकिन बाद में उसके निर्माण की रफ्तार धीमी हो गई। कार्य अधूरा छोड़ दिया गया। नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी ने कई बार ठेकेदार को त्रिमूर्ति तिराहे के निर्माण को पूरा करने के लिए कहा, लेकिन ठेकेदार द्वारा कार्य नहीं कराया गया। मामला जिलाधिकारी के दरबार में पहुंचा। जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने ठेकेदार को तलब किया और जेल भेजने की चेतावनी दी। इतना कहना था कि ठेकेदार की ओर से एक हफ्ते में ही त्रिमूर्ति तिराहे के निर्माण को पूरा कर लिया गया।
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नहीं सेट हुआ घड़ियों का टाइम
आजमगढ़। विशाल कंस्ट्रक्शन कंपनी को ही नगर के सिविल लाइन स्थित घंटाघर के निर्माण की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस घंटाघर के निर्माण में भी लगभग तीन वर्ष का समय लग चुका है, लेकिन अभी तक निर्माण पूरा नहीं हो सका। पिलर खड़े कर घड़ियां टांग दी गईं, लेकिन इसके निचले हिस्से का कार्य अभी अधूरा है। ठेकेदार ने घंटाघर का पिलर खड़ाकर इसमें घड़ी तो लगवा दीं, लेकिन वह इन घड़ियों में टाइम सेट करना भूल गया। इसका परिणाम है कि घड़ी लगे हुए कई माह बीत गए लेकिन यहां लगी चारों घड़ियां आज भी चार समय बताती हैं।
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