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सेवानिवृत होने के बाद भी प्रतिदिन जाते हैं कालेज
Updated Tue, 05 Sep 2017 12:15 AM IST
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आजमगढ़। पैसे के लिए जहां लोग सबकुछ करने को उतारू रहते हैं वहीं एक ऐसे शिक्षक भी हैं जो सेवानिवृत्त होने के बाद भी प्रतिदिन समय से विद्यालय जाते हैं। जहां वह पूर्व की तरह की बच्चों को पढ़ाते हैं और छुट्टी होने के बाद ही घर जाते हैं।
सगड़ी तहसील के पहवानपुर गांव निवासी महेंद्र राय की नियुक्ति जुलाई 1974 में आदर्श इंटर कालेज अंवती गौरी में हुई। तबसे वह लगातार बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाते आ रहे हैं। पूरे सर्विस के दौरान महेंद्र राय कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि समय से विद्यालय नहीं पहुंचे हों। आज उनके पढ़ाए कई लड़के विभिन्न क्षेत्रों में अपना नाम रोशन कर रहे हैं। 2011 में महेंद्र राय सेवानिवृत्त हो गए। सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने अपने को दूसरे कार्यों में लगाने के बजाए खुद को बच्चों को शिक्षित करने में लगाया। इसके लिए वह अपने रूटीन के अनुसार कालेज जाते हैं। वह प्रतिदिन पूर्व की ही भांति बच्चों को पढ़ाने का कार्य करते हैं। महेंद्र राय का कहना है कि सेवानिवृत्त होने के बाद समझ में नहीं आ रहा था कि खाली बैठकर क्या करें। इसलिए सोचा कि क्यों न मैं पढ़ाने का कार्य करता रहूं। चाहे इसके लिए मुझे कुछ मिले या न मिले। अगर मेरी शिक्षा से किसी बच्चे का भला होता है तो मुझे इस कार्य करने से कोई आपत्ति नहीं है। पूर्व में मैं यह कार्य करता रहा हूं इसलिए मुझे किसी प्रकार की परेशानी भी नहीं होती है।
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सगड़ी तहसील के पहवानपुर गांव निवासी महेंद्र राय की नियुक्ति जुलाई 1974 में आदर्श इंटर कालेज अंवती गौरी में हुई। तबसे वह लगातार बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाते आ रहे हैं। पूरे सर्विस के दौरान महेंद्र राय कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि समय से विद्यालय नहीं पहुंचे हों। आज उनके पढ़ाए कई लड़के विभिन्न क्षेत्रों में अपना नाम रोशन कर रहे हैं। 2011 में महेंद्र राय सेवानिवृत्त हो गए। सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने अपने को दूसरे कार्यों में लगाने के बजाए खुद को बच्चों को शिक्षित करने में लगाया। इसके लिए वह अपने रूटीन के अनुसार कालेज जाते हैं। वह प्रतिदिन पूर्व की ही भांति बच्चों को पढ़ाने का कार्य करते हैं। महेंद्र राय का कहना है कि सेवानिवृत्त होने के बाद समझ में नहीं आ रहा था कि खाली बैठकर क्या करें। इसलिए सोचा कि क्यों न मैं पढ़ाने का कार्य करता रहूं। चाहे इसके लिए मुझे कुछ मिले या न मिले। अगर मेरी शिक्षा से किसी बच्चे का भला होता है तो मुझे इस कार्य करने से कोई आपत्ति नहीं है। पूर्व में मैं यह कार्य करता रहा हूं इसलिए मुझे किसी प्रकार की परेशानी भी नहीं होती है।
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