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योजना के तहत स्कूल से निकली थी छात्राएं
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आजमगढ़। शहर के शिब्ली नर्सरी स्कूल में पढने वाली कक्षा छह की फरार हुई तीनों छात्राएं शुक्रवार की देर रात परिवारवालों के साथ अपने-अपने घर पहुंच गई। शनिवार की सुबह आरपीएफ आजमगढ़ की पुलिस ने भी इन्हें थाने बुलाकर पूछताछ की। इस दौरान छात्राओं ने बताया कि यह तीनों योजनाबद्ध तरीके से 27 दिसंबर को घर से स्कूल के लिए निकली। दोपहर को छुट्टी होने पर स्कूल से रेलवे स्टेशन पहुंची और पैसेंजर ट्रेन में बैठकर शाहगंज रेलवे स्टेशन पहुंची। वहां से मुंबई जाने वाली ट्रेन में बैठ गई। हालांकि पुलिस की सक्रियता से इन्हें प्रयागराज रेलवे स्टेशन की आरपीएफ ने पकड़ लिया।
आरपीएफ प्रभारी मिर्जा राशिद बेग ने बताया कि तीनों छात्राएं अपने घर वालों के व्यहार और अध्यापको के रवैए से परेशान थी। इसी के चलते 26 दिसंबर को एक साथ बैठकर योजना बनाई और 27 दिसंबर को इंटरवल में स्कूल से फरार हो गयी। इन तीनों छात्राओं में एक ने ही रेलवे स्टेशन देखा था। शेष दोनों अनजान थी। आरपीएफ प्रभारी के मुताबिक इन तीनों छात्राओं की मंशा थी कि मुंबई के होटल ताज में जाकर पहले चाय पीएंगी। इसके बाद वहीं पर झाड़ूपोछा लगाने की नौकरी करके अपना जीवन बिताएंगी। छात्राओं के मुताबिक इन्हें जहां परिवार के लोग मारतेपीटते थे। वहीं स्कूल में भी डांट पड़ती थी। इन्हीं परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए यह तीनों योजना बनाई। योजना के तहत ही 27 दिसंबर की सुबह तीनों स्कूल पहुंची। इनके साथ स्कूल में पढने वाली बहनें भी गई। यह तीनों छात्राएं अपने कमरे में बैठने की बजाय निकलने की तरकीब सोचते हुए दोपहर को निकल गई। इस संबंध में पूछने पर कालेज प्रबंधक शाहमोहम्मद आबिद ने बताया कि स्कूल में पहले पीरियड में ही छात्रों की हाजिरी होती है। 27 दिसंबर को इन तीनों छात्राओं की हाजिरी नहीं लगी है। प्रबंधक ने बताया कि हाजिरी कैसे नहीं लगी है। इसकी जांच की जा रही।
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आरपीएफ प्रभारी मिर्जा राशिद बेग ने बताया कि तीनों छात्राएं अपने घर वालों के व्यहार और अध्यापको के रवैए से परेशान थी। इसी के चलते 26 दिसंबर को एक साथ बैठकर योजना बनाई और 27 दिसंबर को इंटरवल में स्कूल से फरार हो गयी। इन तीनों छात्राओं में एक ने ही रेलवे स्टेशन देखा था। शेष दोनों अनजान थी। आरपीएफ प्रभारी के मुताबिक इन तीनों छात्राओं की मंशा थी कि मुंबई के होटल ताज में जाकर पहले चाय पीएंगी। इसके बाद वहीं पर झाड़ूपोछा लगाने की नौकरी करके अपना जीवन बिताएंगी। छात्राओं के मुताबिक इन्हें जहां परिवार के लोग मारतेपीटते थे। वहीं स्कूल में भी डांट पड़ती थी। इन्हीं परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए यह तीनों योजना बनाई। योजना के तहत ही 27 दिसंबर की सुबह तीनों स्कूल पहुंची। इनके साथ स्कूल में पढने वाली बहनें भी गई। यह तीनों छात्राएं अपने कमरे में बैठने की बजाय निकलने की तरकीब सोचते हुए दोपहर को निकल गई। इस संबंध में पूछने पर कालेज प्रबंधक शाहमोहम्मद आबिद ने बताया कि स्कूल में पहले पीरियड में ही छात्रों की हाजिरी होती है। 27 दिसंबर को इन तीनों छात्राओं की हाजिरी नहीं लगी है। प्रबंधक ने बताया कि हाजिरी कैसे नहीं लगी है। इसकी जांच की जा रही।
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