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मानकों की अनदेखी कर संचालित हो रहे स्कूली वाहन
Updated Sat, 15 Dec 2018 11:20 PM IST
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आजमगढ़। स्कूल वाहनों के संचालन में खुलेआम मानकों की अनदेखी हो रही है। कई वाहनों पर चालक के नाम व नंबर अंकित ही नहीं है और जिस पर अंकित भी है तो नंबर गलत है। इन वाहनों के चेकिंग की जिम्मेदारी आरटीओ विभाग की है, लेकिन वह भी हवा-हवाई कार्रवाई कर अपने जिम्मेदारियों की इतिश्री कर ले रहा है।
स्कूली बच्चों को सुरक्षित घर से स्कूल लाने और स्कूल से घर पहुंचाने के लिए ज्यादातर प्राइवेट स्कूलों ने खुद के वाहन लगा रखे हैं। वहीं कुछ प्राइवेट वाहन चालक भी बच्चों को ढोने का काम करते हैं। स्कूली वाहनों के रुप में आरटीओ विभाग में छोटे बड़े छह सौ से अधिक वाहन पंजीकृत हैं। इन वाहनों के लिए शासन ने विशेष मानक भी निर्धारित कर रखे हैं। एक तो स्कूली वाहन पीले रंग को होने चाहिए तो वहीं उस पर स्कूल का नाम व मोबाइल नंबर भी अंकित होना चाहिए। इसके साथ ही चालाक का नाम व मोबाइल नंबर उसकी सीट के दरवाजे पर लिखा होना चाहिए। स्कूल वाहनों पर ड्यूटी देने वाले चालक अक्सर ही बदल दिए जाते हैं लेकिन उनके नाम व मोबाइल नंबर बदलने की कवायद नहीं की जाती है। ऐसे में अभिभावक जब वाहन पर लिखे नंबर पर संपर्क करने का प्रयास करता है तो काल चालक के बजाए कहीं और लग जाता है। वहीं कई प्राइवेट वाहन चालक अपनी गाड़ी से बच्चों को ढो रहे हैं, जिस पर न तो स्कूल का नाम लिखा है न ही उनका रंग ही पीला है।
बच्चों को ढोने वाले वाहनों पर विभाग की सख्त निगाह है। यह सहीं है कि कई वाहनों पर चालक का नाम व मोबाइल नंबर ठीक ढंग से अंकित नहीं है, जिसके लिए लगातार विद्यालयों को पत्र लिख कर चेतावनी दी जा रही है। इतना ही नहीं विभाग की टीम लगातार स्कूली वाहनों की चेकिंग करती रहती है। सभी स्कूलों को यह निर्देश जारी किया गया है कि वे अपने स्कूल में मानक अनुरूप वाहनों पर नजर रखने के लिए अलग कमेटी भी बनाए।
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संतोष सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन, आजमगढ़।
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स्कूली बच्चों को सुरक्षित घर से स्कूल लाने और स्कूल से घर पहुंचाने के लिए ज्यादातर प्राइवेट स्कूलों ने खुद के वाहन लगा रखे हैं। वहीं कुछ प्राइवेट वाहन चालक भी बच्चों को ढोने का काम करते हैं। स्कूली वाहनों के रुप में आरटीओ विभाग में छोटे बड़े छह सौ से अधिक वाहन पंजीकृत हैं। इन वाहनों के लिए शासन ने विशेष मानक भी निर्धारित कर रखे हैं। एक तो स्कूली वाहन पीले रंग को होने चाहिए तो वहीं उस पर स्कूल का नाम व मोबाइल नंबर भी अंकित होना चाहिए। इसके साथ ही चालाक का नाम व मोबाइल नंबर उसकी सीट के दरवाजे पर लिखा होना चाहिए। स्कूल वाहनों पर ड्यूटी देने वाले चालक अक्सर ही बदल दिए जाते हैं लेकिन उनके नाम व मोबाइल नंबर बदलने की कवायद नहीं की जाती है। ऐसे में अभिभावक जब वाहन पर लिखे नंबर पर संपर्क करने का प्रयास करता है तो काल चालक के बजाए कहीं और लग जाता है। वहीं कई प्राइवेट वाहन चालक अपनी गाड़ी से बच्चों को ढो रहे हैं, जिस पर न तो स्कूल का नाम लिखा है न ही उनका रंग ही पीला है।
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बच्चों को ढोने वाले वाहनों पर विभाग की सख्त निगाह है। यह सहीं है कि कई वाहनों पर चालक का नाम व मोबाइल नंबर ठीक ढंग से अंकित नहीं है, जिसके लिए लगातार विद्यालयों को पत्र लिख कर चेतावनी दी जा रही है। इतना ही नहीं विभाग की टीम लगातार स्कूली वाहनों की चेकिंग करती रहती है। सभी स्कूलों को यह निर्देश जारी किया गया है कि वे अपने स्कूल में मानक अनुरूप वाहनों पर नजर रखने के लिए अलग कमेटी भी बनाए।
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संतोष सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन, आजमगढ़।