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तहसीलदार ने कटान पीड़ितों की भूख हड़ताल खत्म कराई
Updated Tue, 22 May 2018 11:56 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
आजमगढ़।
घाघरा में बाढ़ से बेघर ग्रामीणों की ओर से की जा रही भूख हड़ताल और धरना-प्रदर्शन मंगलवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। जिलाधिकारी के निर्देश पर तहसीलदार सगड़ी मनोज कुमार दोपहर में धरना स्थल पर पहुंचे। भूख हड़ताल पर बैठे सुग्रीव निषाद और रामदीन निषाद को जूस पिलाकर धरना समाप्त कराया। एक माह के भीतर समस्त मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया। इसके पहले ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मांगों को पूरा करने की मांग की थी।
वक्ताओं ने कहा कि जुलाई 2017 में घाघरा नदी में भीषड़ बाढ़ आने की वजह से नौबरा देवारा जदीद किला प्रथम और देवारा जदीद विकास नगर गांव की समस्त कृषि भूमि और मकान कटकर घाघरा नदी में विलीन हो गया था। तत्कालीन जिलाधिकारी की ओर से आराजी नंबर 3937 स्थित नौबरार देवारा जदीद किता प्रथम में आवासीय पट्टा किया गया था, लेकिन लेखपाल और प्रधान ने ग्रामीणों के खिलाफ साजिश करके उनको उनकी आर्थिक तौर पर मिली मदद से भी अछूता रखा। ग्रामवासियों का राशन कार्ड तक नहीं है। जबकि गांव में कई हजार एकड़ भूमि नवीन परती और बंजर के रूप में पड़ी है। लालचंद निषाद ने कहाकि अगर जिला प्रशासन हमारी समस्याओं का समाधान नहीं किया तो ग्रामीण प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में पहुंचकर अपनी बातों को रखेंगे। धरने में रामलवट निषाद, नौमी, रामदीन, सुखई, नरायन, रामबचन, प्रभावती, माया, सीताराम, मंती, संती मौजूद थे।
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आजमगढ़।
घाघरा में बाढ़ से बेघर ग्रामीणों की ओर से की जा रही भूख हड़ताल और धरना-प्रदर्शन मंगलवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। जिलाधिकारी के निर्देश पर तहसीलदार सगड़ी मनोज कुमार दोपहर में धरना स्थल पर पहुंचे। भूख हड़ताल पर बैठे सुग्रीव निषाद और रामदीन निषाद को जूस पिलाकर धरना समाप्त कराया। एक माह के भीतर समस्त मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया। इसके पहले ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मांगों को पूरा करने की मांग की थी।
वक्ताओं ने कहा कि जुलाई 2017 में घाघरा नदी में भीषड़ बाढ़ आने की वजह से नौबरा देवारा जदीद किला प्रथम और देवारा जदीद विकास नगर गांव की समस्त कृषि भूमि और मकान कटकर घाघरा नदी में विलीन हो गया था। तत्कालीन जिलाधिकारी की ओर से आराजी नंबर 3937 स्थित नौबरार देवारा जदीद किता प्रथम में आवासीय पट्टा किया गया था, लेकिन लेखपाल और प्रधान ने ग्रामीणों के खिलाफ साजिश करके उनको उनकी आर्थिक तौर पर मिली मदद से भी अछूता रखा। ग्रामवासियों का राशन कार्ड तक नहीं है। जबकि गांव में कई हजार एकड़ भूमि नवीन परती और बंजर के रूप में पड़ी है। लालचंद निषाद ने कहाकि अगर जिला प्रशासन हमारी समस्याओं का समाधान नहीं किया तो ग्रामीण प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में पहुंचकर अपनी बातों को रखेंगे। धरने में रामलवट निषाद, नौमी, रामदीन, सुखई, नरायन, रामबचन, प्रभावती, माया, सीताराम, मंती, संती मौजूद थे।
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