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... हमारे देश में फिर से सुखद मकरंद हो जाए

Mon, 21 May 2018 12:24 AM IST
Updated Mon, 21 May 2018 12:24 AM IST
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... हमारे देश में फिर से सुखद मकरंद हो जाए
आजमगढ़। नगर के एसकेपी इंटर कालेज परिसर में बाबू कृष्ण मुरारी स्मृति न्यास द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का रविवार की देर रात शानदार तरीके से शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डा. महेंद्रनाथ पांडेय, संगठन मंत्री हृदय नाथ सिंह और आयोजक खड़ग बहादुर सिंह ने संयुक्त रूप से मां राधिका देवी और स्व. बाबू कृष्ण मुरारी सिंह के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया। इसके बाद दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
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डा. महेंद्रनाथ पांडेय ने कहा कि आजमगढ़ की धरती पर इस तरह का कवि सम्मेलन निश्चित ही सराहनीय है। मैं आयोजक को इसके लिए बधाई देता हूं। सम्मेलन को भाजपा के संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, अतुल गर्ग, इस्कान चेयरमैन लखेंद्र खुराना, एमएलसी अशोक धवन, विद्यासागर सोनकर, विजय बहादुर पाठक, नीतू सिंह, शिवकुमार पाठक, महिला मोर्चा भाजपा अध्यक्ष दर्शना सिंह, क्षेत्रीय मंत्री विनोद राय, सांसद सकलदीप राजभर, नीलम सोनकर, फागू चौहान, राजा बुंदेला आदि ने संबोधित किया। इसके बाद कवियों ने कविता पाठ शुरू किया। प्रख्यात कवि हरिओम पंवार ने अपनी रचना घाटी के दिल की धड़कन काश्मीर, जो खुद सूरज के बेटे की राजधानी था, डमरू वाले शिव शंकर की जो घाटी कल्याणी था, काश्मीर जो इस धरती का स्वर्ग बताया जाता था, जिस मिट्टी को दुनिया भर में अर्घ्य चढ़ाया जाता था। इसके बाद कवि गजेंद्र सोलंकी ने ‘ये जो तेरे अपने घर में तेरी इज्जत अफजाई है, गलतफहमियों में मत रहना दौलत अपने संग लाई है, वो चला था इस जमाने को सिखाने तैरना नाम उसका डूबने वालों में यारो जुड़ गया, मौत कैसे आसमां से आएगी सोचा था बस, इक परिंदा झील से मछली पकड़कर उड़ गया, जब उजियारे मिले हमें पता चला अंधियारा क्या कितनी घोर आमावस थी। वीररस की कविताओं की माहिर कवियित्री कविता तिवारी ने कथानक व्याकरण समझें तो सुरभित छंद हो जाए, हमारे देश में फिर से सुखद मकरंद हो जाए। मेरे ईश्वर मेरे दाता ये कविता मांगती तुझसे, युवा पीढ़ी संभल करके विवेकानंद हो जाए। सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। अरुण जैमिनी ने मैंने सोचा जरा पुराने युग को वापिस लाया जाए, अब के प्रेम पत्र, कबूतर से भिजवाया जाए, मैंने कबूतर के पंजे में चिठ्ठी अटकाई और उसे ये बात समझाई ये तो याद नहीं ये कौन से प्यार की कौन सी चिठ्ठी है, पर तू यहां से पांच गलियां छोड़ कर छठीं गली में जाना, गुलाबी छत वाली गुलाबी सी लड़की नीलू की मम्मी को ये चिठ्ठी दे आना। कबूतर बोला.हे आदिकालीन युग के देवदास, इस जमाने में भी चिठ्ठियों से आस, अब मैं ऐसी फालतू उड़ान नहीं भरता, मैं खुद अपनी कबूतरी को व्हाट्सएप करता हूं। कवि डा. अनिल बौझड़ ने हिंदू होइकै दियै बधाई ईद आउर रमजान कै, मुसलमान होइकै जय बोलै कृष्ण राम भगवान कै। बस तैसे हम जानि लेइत हैं ऊंच छलांग लगैया है, यहौ बहादुर पक्का अबकी कोई चुनाव लड़ैया है। कवयित्री अंजुम रहबर ने रौशनी का जबाब होती हैं, खुशबुओं की किताब होती हैं, तोड़ लेते हैं क्यूँ हवस वाले, लडकियां तो गुलाब होती हैं। प्रस्तुत कर समारोह में चार चांद लगा दिया। कवि शंभू शिखर ने कहा कि मनहूस से चेहरों को सदा डांटता हूँ मैं, गम की बदलियों में भी खुशी छांटता हूँ मैं, भाता नहीं मुझको कोई चेहरा उदास सा बस इसलिए ही सबको हँसी बांटता हूं मैं। डा. सुनील जोगी दिल्ली ने हार के संग कभी जीत भी मिल सकती है, लगे रहो तो प्रभु की प्रीत भी मिल सकती है, कई बाबा तो इसलिए धुनी रमाए हैं, इन्हीं भक्तों में हनीप्रीत भी मिल सकती है। इसी तरह से डा. विष्णु सक्सेना डा. अर्जुन सिसोदिया और कवि अब्दुल गफ्फार ने भी अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों को दिल छू लिया। जनपद के युवा कवि विनम्र सेन सिंह ने आईना देख कर सब संवरने लगे अपने चेहरे में अब रंग भरने लगे कैसा है रूप उनका असल में की वो अपनी खुद की हकीकत से डरने लगे सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी।अंत में न्यास के प्रबंधक खड़ग बहादुर सिंह ने कहा कि बाबू जी सदैव कहते थे कि समाज का सर्वांगीण उत्थान शिक्षा के बल पर ही हो सकता हैं इसलिए शिक्षण संस्थान को प्रगति देकर मैं उनके सपने को पूरा कर रहा हूं। मंच का सफल संचालन संस्थान की निदेशिका डा. सुनीता ने किया।
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