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हेमंत कुमार की कहानी गुलइची पर आयोजित हुई परिचर्चा
Updated Sun, 04 Feb 2018 11:52 PM IST
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जनसंस्कृति मंच के तत्वावधान में रविवार को प्रेस क्लब सभागार में कथाकार हेमंत कुमार की कहानी गुलइची पर केंद्रित सामाजिक न्याय के अंतर्विरोध के संदर्भ में गुलइची विषयक परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए।
मुख्य वक्ता रामजी यादव ने कहा कि यह कहानी सामाजिक न्याय की दृष्टि से नहीं पढ़ी जानी चाहिए। बल्कि यह कहानी भाषा और बुनावट के स्तर पर काफी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराती है। लेकिन विचारों के स्तर पर जरूर कुछ कमजोर दिखती है। आलोचक कल्पनाथ यादव ने कहा कि कहानीकार संवेदना के स्तर पर गुलइची के पक्ष में या सामंती प्रवृत्ति किस के पक्ष में खड़ा है स्पष्ट होना चाहिए था। प्रसिद्ध कहानीकार और आलोचक मूलचंद सोनकर ने कहानी को गैर लोकतांत्रिक घोषित करते हुए कहा कि 70 साल की आजादी के पश्चात भी कहानीकार एक सामंती सोच में रह रहा है, जो उसकी असफलता है और संवैधानिक लोकतांत्रिक चेतना के विरुद्ध है। अध्यक्षता कर रहे जयप्रकाश नारायण ने कहा कि हेमंत की कहानी गुलइची सामाजिक न्याय के अंतर्विरोध को रेखांकित करती है। यदि सामाजिक न्याय समानता तक नहीं जाता है तो उसका कोई मतलब नहीं है। सामाजिक न्याय एकरेखीय नहीं होता इसका स्वरूप व्यापक होता है इसे विस्तृत नजरिये से देखा जाना चाहिए। परिचर्चा को रविंद्रनाथ राय, रामकुमार यादव, अरविंद, रामबदन यादव, डा. बद्रीनाथ ने संबोधित किया। संचालन विजय कुमार देवव्रत और धन्यवाद ज्ञापन डा. रमेश कुमार मौर्य ने किया। इस मौके पर बैजनाथ यादव, डा. विनय सिंह यादव, रामनिवास यादव, महताब आलम, राम अवध यादव, नरेंद्र प्रताप, बृजेश राय, अश्विनी कुमार, रामसिंह यादव, यमुना प्रजापति, हंसराज यादव, मोतीराम आदि उपस्थित थे।
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मुख्य वक्ता रामजी यादव ने कहा कि यह कहानी सामाजिक न्याय की दृष्टि से नहीं पढ़ी जानी चाहिए। बल्कि यह कहानी भाषा और बुनावट के स्तर पर काफी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराती है। लेकिन विचारों के स्तर पर जरूर कुछ कमजोर दिखती है। आलोचक कल्पनाथ यादव ने कहा कि कहानीकार संवेदना के स्तर पर गुलइची के पक्ष में या सामंती प्रवृत्ति किस के पक्ष में खड़ा है स्पष्ट होना चाहिए था। प्रसिद्ध कहानीकार और आलोचक मूलचंद सोनकर ने कहानी को गैर लोकतांत्रिक घोषित करते हुए कहा कि 70 साल की आजादी के पश्चात भी कहानीकार एक सामंती सोच में रह रहा है, जो उसकी असफलता है और संवैधानिक लोकतांत्रिक चेतना के विरुद्ध है। अध्यक्षता कर रहे जयप्रकाश नारायण ने कहा कि हेमंत की कहानी गुलइची सामाजिक न्याय के अंतर्विरोध को रेखांकित करती है। यदि सामाजिक न्याय समानता तक नहीं जाता है तो उसका कोई मतलब नहीं है। सामाजिक न्याय एकरेखीय नहीं होता इसका स्वरूप व्यापक होता है इसे विस्तृत नजरिये से देखा जाना चाहिए। परिचर्चा को रविंद्रनाथ राय, रामकुमार यादव, अरविंद, रामबदन यादव, डा. बद्रीनाथ ने संबोधित किया। संचालन विजय कुमार देवव्रत और धन्यवाद ज्ञापन डा. रमेश कुमार मौर्य ने किया। इस मौके पर बैजनाथ यादव, डा. विनय सिंह यादव, रामनिवास यादव, महताब आलम, राम अवध यादव, नरेंद्र प्रताप, बृजेश राय, अश्विनी कुमार, रामसिंह यादव, यमुना प्रजापति, हंसराज यादव, मोतीराम आदि उपस्थित थे।
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