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न ध्रुवीकरण, न कोई लहर...बदले समीकरण में साख दांव पर

Sun, 14 Apr 2019 11:07 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 14 Apr 2019 11:07 PM IST
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न ध्रुवीकरण, न कोई लहर...बदले समीकरण में साख दांव पर
ध्रुवीकरण न लहर, बदले समीकरण में साख दांव पर
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लालगंज लोकसभा सीट पर पिछड़े क्षेत्र का विकास ही बनेगा मुख्य मुद्दा
संदीप सौरभ सिंह
आजमगढ़। पिछड़ापन दूर करने के लिए खेवनहार तलाश रही लालगंज सुरक्षित लोकसभा सीट पर इस बार कड़े मुकाबले के आसार हैं। खास बात यह है कि इस बार के चुनाव में न कोई लहर है और न ही ध्रुवीकरण के आसार दिख रहे हैं। पिछड़े क्षेत्र का विकास तो मुख्य मुद्दा बनेगा ही बदले हालात में प्रत्याशियों की साख भी अहम भूमिका निभाएगी।
1989 के बाद कांग्रेस के लगातार कमजोर पड़ते जाने से लेकर 2014 के पहले तक यह सीट जनता दल, बसपा और सपा के बीच झूलती रही है। पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में जनपद की इस सीट पर पहली बार कमल खिला था। भाजपा प्रत्याशी नीलम सोनकर ने सपा के प्रत्याशी बेचई सरोज को हराया था। इस बार इस सीट के समीकरण बदल गए हैं। भाजपा ने फिर नीलम सोनकर पर भरोसा जताया है जिनका सीधा मुकाबला बसपा के टिकट पर लड़ रही संगीता आजाद जो स्थानीय विधायक आजाद अरिमर्दन की पत्नी हैं से होगा। यहां से कांग्रेस ने युवा चेहरे पंकज मोहन सोनकर पर दांव लगाया है वे मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। इसके अलावा शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया से हेमराज पासवान और आम आदमी पार्टी से अजीत सोनकर प्रत्याशी हैं। इस तरह सभी प्रमुख दलों ने प्रत्याशियों को मैदान में उतार दिया है। पिछले चुनाव में मोदी लहर में तो नीलम सोनकर यहां जीत गई थी पर इस बार उनके लिए मुकाबला कहीं से आसान नहीं है। बसपा प्रत्याशी के लिए भी गठबंधन की एका का प्रदर्शन वोट के रूप में करना बड़ी चुनौती है। कुल मिला कर इस चुनाव में परिदृश्य बदला हुआ है। इस बार न लहर है और न ही ध्रुवीकरण का असर दिख रहा है। ऐसे में दल के साथ प्रत्याशियों की साख ही सबसे बड़ा फैक्टर होगी। वैसे चुप्पी साधे मतदाता अभी हवा का रुख ही भांप रहे हैं।
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विकास, चुस्त प्रशासन और शिक्षा बनेगी मु्द्दा
लालगंज। विकास के लिहाज से लालगंज क्षेत्र काफी पिछड़ा माना जाता है। यहां पिछड़ी जातियों की संख्या भी ज्यादा है। सड़कों की हालत, शिक्षा की स्थिति, स्वास्थ्य सुविधा, परिवहन आदि क्षेत्रों में यहां काम किए जाने की जरूरत है।
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वाराणसी, जौनपुर, सुल्तानपुर, अंबेडकरनगर, संत कबीरनगर से बार्डर से घिरे इस लोकसभा क्षेत्र में इस बार विकास ही प्रमुख मुद्दा बनेगा। चट्टी-चौराहों पर इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय संतोष पांडेय ने बताया कि इस बार चुनाव का मुख्य मुद्दा विकास है। जिसने अपने एजेंडे में विकास को मुख्य मुद्दा बनाया है वह सभी पर भारी पड़ेगा। आनंद ने कहा कि सख्त एवं चुस्त प्रशासन का मुद्दा चुनाव में हावी रहेगा। पूर्व प्रधानाचार्य ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि शिक्षा इस बार चुनाव में मुद्दा बनकर उभरा है। पुरानी पेंशन की बहाली भी एक बड़ा मुद्दा होगी। गौरव सिंह रघुवंशी का कहना था कि चुनाव में वादे तो सभी नेता करते हैं परंतु, कार्य तो जीतनेवाले दल की सरकार ही कराती है। इस बार के चुनाव में विकास ही मुद्दा होगा।
अब तक ये बने सांसद (लालगंज सीट 1962 में अस्तित्व में आई थी।)
1962 विश्राम प्रसाद पीएसपी
1967 रामधन कांग्रेस
1971 रामधन कांग्रेस
1977 रामधन बीएलडी
1980 छांगुर जेएनपी (एस)
1984 रामधन कांग्रेस
1989 रामधन जनता दल
1991 रामबदन जनता दल
1996 डॉ. बलिराम बसपा
1998 दरोगा प्रसाद सरोज सपा
1999 डॉ. बलिराम बसपा
2004 दरोगा प्रसाद सरोज सपा
2009 डॉ. बलिराम बसपा
2014 नीलम सोनकर भाजपा
पिछले चुनाव का परिणाम
- नीलम सोनकर-भाजपा-324016
- बेचई सरोज-सपा-260930
- डॉ. बलिराम-बसपा-233971
- बलिहारी बाबू-कांग्रेस-21832
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