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एसपी दफ्तर निर्माण की बाधा हुई दूर, भेजी रिपोर्ट
Updated Tue, 06 Feb 2018 12:28 AM IST
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आजमगढ़। अंग्रेजों के जमाने के भवन में संचालित एसपी दफ्तर काफी जर्जर हो चुका है। इसमें बैठकर काम करना खतरे से खाली नहीं है। नए भवन के स्थान पर नया अत्याधुनिक निर्माण प्रक्रिया में तकनीकि खामियां होने की वजह से पुलिस मुख्यालय ने फाइल को वापस भेज दिया था। तकनीकि खामियों को दूर करते हुए नए सिरे से रिपोर्ट दोबारा पुलिस मुख्यालय भेज दी गई है। वहां से स्वीकृति मिलते ही शासन से बजट की मांग की जाएगी।
जिलाधिकारी कार्यालय के ठीक बगल में पुुलिस अधीक्षक का कार्यालय है। यह दोनों ही कार्यालय अंग्रेजों के जमाने में बनवाए गए भवन में चल रहा था। शासन के निर्देश पर करोड़ो रुपये खर्च कर जिलाधिकारी कार्यालय का अत्याधुनिक तरीके से निर्माण हो गया। लेकिन प्ुल़िस आफिस के जर्जर भवन का निर्माणस्त्रत्त् अश्भी तक नहीं हो सका। अधिकारी और कर्मचारी पुराने जर्जर भवन में रहने को मजबूर हैं। कलेक्ट्रेट भवन निर्माण की प्रक्रिया के साथ ही एसपी दफ्तर के निर्माण के लिए पुुलिस मुख्यालय रिपोर्ट भेजी गई थी, लेकिन कुछ तकनीकि खामियों के चलते एसपी दफ्तर के निर्माण में बाधा उत्पन्न हो गई। पुलिस सूत्रों की मानें तो किसी भी भवन को कंडम घोषित करने के मामले में पांच लाख रुपये तक की लागत के भवन का अधिकारी जिलाधिकारी को है। जबकि इससे अधिक के रकम को कंडम घोषित कराने के लिए पीडब्लूडी के अधिकारियों को पावर है। एसपी दफ्तर को कंडम घोषित करते हुए उसके स्थान पर नया भवन बनाने के लिए डीएम के यहां से रिपोर्ट भेजी गई थी। इसी खामी के चलते पुलिस मुख्यालय की तरफ से फाइल वापस कर दी गई थी। जिस पर पुलिस विभाग के अधिकारियों ने गहन अध्ययन कर भवन को लोक निर्माण विभाग द्वारा कंडम घोषित करने की रिपोर्ट लगाकर मंजूरी के लिए दोबारा पुलिस मुख्यालय फाइल भेजी गई है। वहां से अनुमति मिलने के बाद बजट के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
पुलिस आफिस भवन के निर्माण के लिए पुलिस मुख्यालय फाइल भेजी गई थी, लेकिन कुछ तकनीकि खामियों की वजह से फाइल वापस भेज दी गई थी। उक्त खामी को दूर कर दोबारा रिपोर्ट भेजी गई है। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद बजट के लिए शासन को पत्र भेजा जाएगा।
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- अजय कुमार साहनी, एसपी
मूलभूत सुविधाओं के लिए भटके हैं कर्मचारी
आजमगढ़। पुलिस अधीक्षक कार्यालय काफी पुराना और जर्जर होने की वजह से परिसर में जहां प्राय: धुल उड़ते रहती है। वहीं शौचालय आदि की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। अधिकारियों के दफ्तर में उनका प्राइवेट शौचालय है, लेकिन कर्मचारियों केे लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं है। ऐसे में महिला और पुरुष दोनों को ही विकट परिस्थिति में काफी परेशानी होती है। न्याय की आस में एसपी दफ्तर आने वाले महिला और पुरुष वादकारियों को भी परेशानी होती है।
पानी में भींगकर अभिलेख होते हैं नष्ट
आजमगढ़। एसपी दफ्तर सहित अन्य भवनों की छत पुराना और जर्जर होने की वजह से हल्की सी भी बारिश होने पर छत टपकने लगाता है। इसका परिणाम यह होता है कि कर्मचारी अपनी रक्षा करें या फिर अभिलेखों को बचाए। छत टपकने की वजह से बारिश के दिनों में तमाम महत्वपूर्ण अभिलेख भींगकर नष्ट हो जाते हैं। बारिश के दिनों में इन अभिलेखों को बचाना भारी पड़ता है।
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जिलाधिकारी कार्यालय के ठीक बगल में पुुलिस अधीक्षक का कार्यालय है। यह दोनों ही कार्यालय अंग्रेजों के जमाने में बनवाए गए भवन में चल रहा था। शासन के निर्देश पर करोड़ो रुपये खर्च कर जिलाधिकारी कार्यालय का अत्याधुनिक तरीके से निर्माण हो गया। लेकिन प्ुल़िस आफिस के जर्जर भवन का निर्माणस्त्रत्त् अश्भी तक नहीं हो सका। अधिकारी और कर्मचारी पुराने जर्जर भवन में रहने को मजबूर हैं। कलेक्ट्रेट भवन निर्माण की प्रक्रिया के साथ ही एसपी दफ्तर के निर्माण के लिए पुुलिस मुख्यालय रिपोर्ट भेजी गई थी, लेकिन कुछ तकनीकि खामियों के चलते एसपी दफ्तर के निर्माण में बाधा उत्पन्न हो गई। पुलिस सूत्रों की मानें तो किसी भी भवन को कंडम घोषित करने के मामले में पांच लाख रुपये तक की लागत के भवन का अधिकारी जिलाधिकारी को है। जबकि इससे अधिक के रकम को कंडम घोषित कराने के लिए पीडब्लूडी के अधिकारियों को पावर है। एसपी दफ्तर को कंडम घोषित करते हुए उसके स्थान पर नया भवन बनाने के लिए डीएम के यहां से रिपोर्ट भेजी गई थी। इसी खामी के चलते पुलिस मुख्यालय की तरफ से फाइल वापस कर दी गई थी। जिस पर पुलिस विभाग के अधिकारियों ने गहन अध्ययन कर भवन को लोक निर्माण विभाग द्वारा कंडम घोषित करने की रिपोर्ट लगाकर मंजूरी के लिए दोबारा पुलिस मुख्यालय फाइल भेजी गई है। वहां से अनुमति मिलने के बाद बजट के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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पुलिस आफिस भवन के निर्माण के लिए पुलिस मुख्यालय फाइल भेजी गई थी, लेकिन कुछ तकनीकि खामियों की वजह से फाइल वापस भेज दी गई थी। उक्त खामी को दूर कर दोबारा रिपोर्ट भेजी गई है। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद बजट के लिए शासन को पत्र भेजा जाएगा।
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- अजय कुमार साहनी, एसपी
मूलभूत सुविधाओं के लिए भटके हैं कर्मचारी
आजमगढ़। पुलिस अधीक्षक कार्यालय काफी पुराना और जर्जर होने की वजह से परिसर में जहां प्राय: धुल उड़ते रहती है। वहीं शौचालय आदि की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। अधिकारियों के दफ्तर में उनका प्राइवेट शौचालय है, लेकिन कर्मचारियों केे लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं है। ऐसे में महिला और पुरुष दोनों को ही विकट परिस्थिति में काफी परेशानी होती है। न्याय की आस में एसपी दफ्तर आने वाले महिला और पुरुष वादकारियों को भी परेशानी होती है।
पानी में भींगकर अभिलेख होते हैं नष्ट
आजमगढ़। एसपी दफ्तर सहित अन्य भवनों की छत पुराना और जर्जर होने की वजह से हल्की सी भी बारिश होने पर छत टपकने लगाता है। इसका परिणाम यह होता है कि कर्मचारी अपनी रक्षा करें या फिर अभिलेखों को बचाए। छत टपकने की वजह से बारिश के दिनों में तमाम महत्वपूर्ण अभिलेख भींगकर नष्ट हो जाते हैं। बारिश के दिनों में इन अभिलेखों को बचाना भारी पड़ता है।