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मार्च 2018 में समाप्त हो रही कुक्कुट विकास नीति

Tue, 02 Jan 2018 11:49 PM IST
Updated Tue, 02 Jan 2018 11:49 PM IST
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मार्च 2018 में समाप्त हो रही कुक्कुट विकास नीति
आजमगढ़। प्रदेश सरकार द्वारा संचालित कुक्कुट विकास नीति 2013 का मार्च 2018 में समापन हो रहा है। इस नीति के तहत पशुपालन विभाग द्वारा जिले में 11 इकाइयों की स्थापना कराई गई है। जिससे एक लाख 70 हजार अंडों का उत्पादन हो रहा है। लेकिन जिले मेें उत्पादित अंडे जिले की मांग को पूरा करने में नाकाफी साबित हो रहे हैं। क्योंकि जिले में प्रतिदिन लगभग चार से साढ़े चार लाख अंडों की खपत है।
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इस नीति के तहत जनपद में तीन तरह के इकाइयों की स्थापना होनी थी। जिसमें 30 हजार पक्षी क्षमता, 10 हजार पक्षी क्षमता ब्रायलर पैरेंट फार्मिंग स्थापित की जानी थी। इसमें से 30 हजार पक्षी क्षमता की तीन और 10 हजार पक्षी क्षमता की आठ इकाइयों की स्थापना हो चुकी है। जबकि ब्रायलर पैरेंट फार्मिंग की एक भी इकाई जिले में स्थापित नहीं हो सकी। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. वीके सिंह की मानें तो ब्रायलर पैरेंट फार्मिंग बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है। इसमें अंडों से चूजों का निर्माण होता है। जिसके कारण लोग इसमें हाथ नहीं लगाना चाहते हैं। फरवरी तक 10 हजार अंडों की 10 से 12 और इकाइयों को स्थापित करने की योजना है। इसके लिए आवेदनों को स्वीकृति के लिए भेजा जा चुका है। जैसे ही यह स्वीकृत होकर आ जाएंगे इनकी स्थापना करा दी जाएगी।
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इकाई लगाने की शर्तें और अनुदान
आजमगढ़। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि 30 हजार पक्षी क्षमता की इकाई की स्थापना के लिए लाभार्थी के पास तीन एकड़ जमीन होनी चाहिए। यह जमीन हाइवे, जलश्रोत, जलाशय, आबादी आदि से 500 मीटर दूर होने चाहिए। इस इकाई की लागत एक करोड़ 60 लाख रुपये हैं। जिसमें लाभार्थी को 54 लाख और उक करोड़ 26 लाख का बैंक ऋण पास कराना होगा। पांच वर्ष तक 10 प्रस्त्रत्त्तिशत की दर से व्याज की प्रतिपूर्ति सीधे लाभार्थी के खाते में भेजी जाएगी। वहीं 10 हजार पक्षी क्षमता की इकाई के लिए बाकी सारे नियम तो पहले की तरह ही रहेंगे लेकिन लाभार्थी के पास एक एकड़ जमीन होनी जरूरी है। इकाई की स्थापना के लिए 70 लाख रुपये की लागत निर्धारित है। जिसमें 21 लाख रुपये लाभार्थी को लगाना होगा और 49 लाख रुपये का बैंक ऋण होगा। जबकि ब्रायलर पैरेंट फार्मिंग के लिए लाभार्थी के पास छह एकड़ भूमि होनी आवश्यक है। इस प्रोजेक्ट की लागत दो करोड़ छह लाख रुपये होगी।
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कुक्क़ुट विकास नीति 2013 मार्च 2018 में समाप्त हो रही है। आगे के बारे में फिलहाल कोई सूचना नहीं है। लेकिन फरवरी माह के अंत तक 10 से 12 इकाइयों की स्थापना करने का लक्ष्य है। जिसके लिए शासन को आवेदन भेजे जा चुके हैं। जैसे ही स्वीकृति मिल जाएगी इनकी स्थापना करा दी जाएगी।
डा. वीके सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।
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