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एडीएम का आदेश बता दिया था सफाईकर्मियों का ठेका
Updated Thu, 26 Oct 2017 12:38 AM IST
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आजमगढ़। डीएम की बिना अनुमति के तत्कालीन पालिकाध्यक्ष और ईओ की ओर से डेलीवेजर सफाईकर्मियों तैनाती के लिए नियम विरुद्ध ठेका देने में तत्कालीन एडीएम प्रशासन के आदेश का हवाला दिया गया था, जबकि फाइल में लगाए गए कागज में ऐसा कोई आदेश था ही नहीं। यही नहीं ठेकेदार की ओर से प्रति कर्मचारी पालिका से साढ़े सात हजार रुपये प्राप्त करने और उन्हें चार से पांच हजार रुपये ही देने का मामाला सामने आया है। जांच के बाद इन पर शिकंजा कसने की उम्मीद जताई जा रही है। जांच कमेटी से एक हफ्ते के भीतर रिपोर्ट तलब की गई है।
2016 में बिना जिलाधिकारी के अनुमति के तत्कालीन पालिकाध्यक्ष इंदिरा देवी जायसवाल और ईओ दिनेश कुमार विश्वकर्मा की ओर से एक वर्ष के लिए ठेके पर सफाई कर्मचारियों को रखने के लिए निविदा निकाली गई और नियम विरुद्ध पांच साल के लिए अनुबंध करा दिया गया है। आठ वार्डों की सफाई के लिए 90 कर्मियों के स्थान पर मात्र 20 से 30 कर्मी लगाए जा रहे थे। भुगतान 2-4 कर्मियों को अनुपस्थित दिखाकर खानापूर्ति लगभग 7-8 लाख रुपये माहवार ठेकेदार को किया जा रहा था। प्रति सफाई कर्मचारियों के नाम पर माहवार साढ़े सात हजार रुपये ठेकेदार की ओर से लिया जा रहा था, लेकिन भुगतान मात्र चार से पांच हजार रुपये का ही किया जा रहा है। पिछले दिनों सफाई की जांच की गई तो फर्जीवाड़ा पकड़ में आया। दूसरा ठेका आउटसोर्सिंग के माध्यम से 10 चालकों और 50 सफाईकर्मियों का हुआ था। पालिका को इनकी जरूरत थी की नहीं इसकी भी जांच की जा रही है। डीएम ने एडीएम वित्त एवं राजस्व की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।
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2016 में बिना जिलाधिकारी के अनुमति के तत्कालीन पालिकाध्यक्ष इंदिरा देवी जायसवाल और ईओ दिनेश कुमार विश्वकर्मा की ओर से एक वर्ष के लिए ठेके पर सफाई कर्मचारियों को रखने के लिए निविदा निकाली गई और नियम विरुद्ध पांच साल के लिए अनुबंध करा दिया गया है। आठ वार्डों की सफाई के लिए 90 कर्मियों के स्थान पर मात्र 20 से 30 कर्मी लगाए जा रहे थे। भुगतान 2-4 कर्मियों को अनुपस्थित दिखाकर खानापूर्ति लगभग 7-8 लाख रुपये माहवार ठेकेदार को किया जा रहा था। प्रति सफाई कर्मचारियों के नाम पर माहवार साढ़े सात हजार रुपये ठेकेदार की ओर से लिया जा रहा था, लेकिन भुगतान मात्र चार से पांच हजार रुपये का ही किया जा रहा है। पिछले दिनों सफाई की जांच की गई तो फर्जीवाड़ा पकड़ में आया। दूसरा ठेका आउटसोर्सिंग के माध्यम से 10 चालकों और 50 सफाईकर्मियों का हुआ था। पालिका को इनकी जरूरत थी की नहीं इसकी भी जांच की जा रही है। डीएम ने एडीएम वित्त एवं राजस्व की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।
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