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Ayodhya News: जब भी मिले, पंकज उधास की जिंदादिली ने बना लिया मुरीद
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अयोध्या। मशहूर गजल गायक पंकज उधास से अयोध्या में तो नहीं लेकिन दिल्ली में छह से सात बार मुलाकात हुई। ज्यादातर संगीत नाटक अकादमी के आयोजनों में मिले। एक बार लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी के कार्यक्रम में मिलने का अवसर मिला। जब भी मिले तो उनकी जिंदादिली ने मुरीद बना लिया।
पंकज उधास से जुड़ी स्मृतियों को याद करते हुए प्रख्यात संगीत अध्येता यतींद्र मिश्र भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में जब वह प्रसार भारती के सलाहकार थे तो डीडी भारती पर उन पर केंद्रित एक कार्यक्रम बनाया था। रिमेम्बरिंग लीजेंड्स नामक सीरीज में उनकी पुरानी रिकार्डिंग को नए स्वरूप में प्रस्तुत किया था। इसकी उन्होंने भी सराहना की थी। एक बार मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा था कि कभी मौका मिला तो अयोध्या जरूर आऊंगा लेकिन ऐसा हो नहीं सका और अब वे हमेशा के लिए दुनिया से चले गए।
यतींद्र कहते हैं कि वह बड़े गायक थे। जगजीत सिंह व पंकज उधास यही दो नाम हैं जिन्होंने गजल को घर-घर पहुंचाया। चिट्ठी आई है से वो मशहूर हुए। इस गाने से विदेशों में रहने वाले अप्रवासी भारतीयों का दर्द छलका और वे पूरी दुनिया में छा गए। गजल के शास्त्रीय रंग के लोकप्रिय करण में उनका अप्रतिम योगदान रहा। आकाशवाणी के उद्घोषक देश दीपक मिश्र कहते हैं कि गजल की दुनिया के वे बड़ी शख्सियत थे। उनसे मुलाकात का सौभाग्य तो कभी नहीं मिला लेकिन गायन शैली का हमेशा मुरीद रहा।
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पंकज उधास से जुड़ी स्मृतियों को याद करते हुए प्रख्यात संगीत अध्येता यतींद्र मिश्र भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में जब वह प्रसार भारती के सलाहकार थे तो डीडी भारती पर उन पर केंद्रित एक कार्यक्रम बनाया था। रिमेम्बरिंग लीजेंड्स नामक सीरीज में उनकी पुरानी रिकार्डिंग को नए स्वरूप में प्रस्तुत किया था। इसकी उन्होंने भी सराहना की थी। एक बार मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा था कि कभी मौका मिला तो अयोध्या जरूर आऊंगा लेकिन ऐसा हो नहीं सका और अब वे हमेशा के लिए दुनिया से चले गए।
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यतींद्र कहते हैं कि वह बड़े गायक थे। जगजीत सिंह व पंकज उधास यही दो नाम हैं जिन्होंने गजल को घर-घर पहुंचाया। चिट्ठी आई है से वो मशहूर हुए। इस गाने से विदेशों में रहने वाले अप्रवासी भारतीयों का दर्द छलका और वे पूरी दुनिया में छा गए। गजल के शास्त्रीय रंग के लोकप्रिय करण में उनका अप्रतिम योगदान रहा। आकाशवाणी के उद्घोषक देश दीपक मिश्र कहते हैं कि गजल की दुनिया के वे बड़ी शख्सियत थे। उनसे मुलाकात का सौभाग्य तो कभी नहीं मिला लेकिन गायन शैली का हमेशा मुरीद रहा।
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