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Ayodhya News: 2017 के बाद औद्योगिक शक्ति के रूप में उभरा उत्तर प्रदेश
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24 आर- अवध विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित आयोजित संवाद
अयोध्या। इंडियन स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी के एसोसिएट डीन व प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस पूर्व आईएएस राजीव कपूर ने कहा कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश औद्योगिक शक्ति के रूप में उभरा है। प्रदेश में निवेश काफी बढ़ा है। निवेश सारथी प्लेटफार्म ने यूपी को निवेश का वैश्विक केंद्र बना दिया है। प्रदेश में निवेश के लिए निवेश सारथी सर्वोत्तम व्यावसायिक अवसर प्रदान करता है।
वह सोमवार को डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश-2047 अभियान के तहत आयोजित संवाद कार्यक्रम में शिक्षकों व छात्रों को संबोधित कर रहे थे। कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश दुनिया के लिए निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। 2047 तक प्रदेश को भारत का सबसे अग्रणी राज्य बनाने के लिए विकसित उत्तर प्रदेश 2047 की कार्ययोजना बनाई जा रही है।
मुख्य विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षा और कौशल में व्यापक सुधार के साथ हम विकसित प्रदेश के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए व्यापक तैयारी की जा रही है। पूर्व कृषि निदेशक डॉ. एपी श्रीवास्तव ने कहा कि 2017 से पहले कृषि विकास सीमित रहा। बीते आठ सालों में कृषि विकास दर नई ऊंचाइयों को छू रही है। प्रदेश को केवल उत्पादन में ही नहीं बल्कि उत्पादकता और निर्यात में भी आगे बढ़ाना है।
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विश्वविद्यालय के पूर्व डीन प्रो.आरएन राय ने कहा कि भारत बहुत तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपना स्थान बना रहा है। कुलसचिव विनय सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना रहा है। सभी छात्रों को विजन 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए तकनीकी तौर पर खुद को समृद्ध करना होगा। चीफ प्रॉक्टर प्रो. एसएस मिश्र ने कहा कि उच्च शिक्षा में क्रांतिकारी परिवर्तन के लिए हमें दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षण संस्थाएं विकसित करनी होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में हमें डिजिटल डिवीजन को खत्म करना होगा।
वाणिज्य संकायाध्यक्ष प्रो. शैलेंद्र वर्मा ने कहा कि विकसित प्रदेश के लिए मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया अच्छे प्लेटफार्म हैं लेकिन इस पर अभी काफी काम किया जाना बाकी है। स्नातक छात्रा श्रजनिका मिश्रा ने कहा कि विकसित उत्तर प्रदेश 2047 के लिए प्रदेश को अलग-अलग क्षेत्र में विकसित कर लखनऊ को वाणिज्य की राजधानी, वाराणसी को आध्यात्मिक और प्रयागराज को न्यायिक राजधानी के रूप में विकसित करना होगा। इस दौरान अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. नीलम पाठक, प्रो. केके वर्मा, प्रो. हिमांशु शेखर सिंह, प्रो. गंगाराम, प्रो. सुरेंद्र मिश्र, डॉ. मनीष सिंह, डॉ. अनिल यादव सहायक अभियंता आरके सिंह व अनुराग सोनी सहित शिक्षक,अधिकारी व विद्यार्थी मौजूद रहे।
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वह सोमवार को डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश-2047 अभियान के तहत आयोजित संवाद कार्यक्रम में शिक्षकों व छात्रों को संबोधित कर रहे थे। कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश दुनिया के लिए निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। 2047 तक प्रदेश को भारत का सबसे अग्रणी राज्य बनाने के लिए विकसित उत्तर प्रदेश 2047 की कार्ययोजना बनाई जा रही है।
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मुख्य विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षा और कौशल में व्यापक सुधार के साथ हम विकसित प्रदेश के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए व्यापक तैयारी की जा रही है। पूर्व कृषि निदेशक डॉ. एपी श्रीवास्तव ने कहा कि 2017 से पहले कृषि विकास सीमित रहा। बीते आठ सालों में कृषि विकास दर नई ऊंचाइयों को छू रही है। प्रदेश को केवल उत्पादन में ही नहीं बल्कि उत्पादकता और निर्यात में भी आगे बढ़ाना है।
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विश्वविद्यालय के पूर्व डीन प्रो.आरएन राय ने कहा कि भारत बहुत तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपना स्थान बना रहा है। कुलसचिव विनय सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना रहा है। सभी छात्रों को विजन 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए तकनीकी तौर पर खुद को समृद्ध करना होगा। चीफ प्रॉक्टर प्रो. एसएस मिश्र ने कहा कि उच्च शिक्षा में क्रांतिकारी परिवर्तन के लिए हमें दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षण संस्थाएं विकसित करनी होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में हमें डिजिटल डिवीजन को खत्म करना होगा।
वाणिज्य संकायाध्यक्ष प्रो. शैलेंद्र वर्मा ने कहा कि विकसित प्रदेश के लिए मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया अच्छे प्लेटफार्म हैं लेकिन इस पर अभी काफी काम किया जाना बाकी है। स्नातक छात्रा श्रजनिका मिश्रा ने कहा कि विकसित उत्तर प्रदेश 2047 के लिए प्रदेश को अलग-अलग क्षेत्र में विकसित कर लखनऊ को वाणिज्य की राजधानी, वाराणसी को आध्यात्मिक और प्रयागराज को न्यायिक राजधानी के रूप में विकसित करना होगा। इस दौरान अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. नीलम पाठक, प्रो. केके वर्मा, प्रो. हिमांशु शेखर सिंह, प्रो. गंगाराम, प्रो. सुरेंद्र मिश्र, डॉ. मनीष सिंह, डॉ. अनिल यादव सहायक अभियंता आरके सिंह व अनुराग सोनी सहित शिक्षक,अधिकारी व विद्यार्थी मौजूद रहे।