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Ayodhya News: पीजीआई के डाॅक्टरों की निगरानी में होगा इलाज
Sun, 04 Oct 2026 11:31 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 04 Oct 2026 11:31 PM IST
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कार्यक्रम में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को सम्मानित करते अतिथि।
अयोध्या। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) लखनऊ के स्पोक-हब नेटवर्क से अब अयोध्या मेडिकल कॉलेज भी जुड़ेगा। यह प्रदेश का सातवां स्पोक हब होगा। इससे मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों की निगरानी और इलाज में पीजीआई के विशेषज्ञ सीधे मदद कर सकेंगे। लखनऊ स्थित कंट्रोल रूम से विशेषज्ञ स्क्रीन पर मरीजों की स्थिति देखकर आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श देंगे।
एसजीपीजीआई और मेडिकल कॉलेज, गंजा के संयुक्त तत्वावधान में गंभीर मरीजों की देखभाल, इलाज और औषधियों पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन समारोह में स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने यह घोषणा की।
एसजीपीजीआई के निदेशक पद्मश्री प्रो. आरके धीमान ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को व्यवस्था शुरू करने के लिए आवश्यक उपकरण तत्काल खरीदने के निर्देश दिए। इनमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम, बड़ी स्क्रीन, कैमरे और ब्रॉडबैंड इंटरनेट शामिल हैं। उन्होंने उपलब्ध फंड से इनकी खरीद करने को कहा।
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समापन समारोह में प्राचार्य प्रो. दिनेश सिंह, आईएसआईसीपीएम अध्यक्ष प्रो. एसपी अंबरीश, आयोजन अध्यक्ष प्रो. संजय धीराज, एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष प्रो. जेपी तिवारी, आयोजन सचिव प्रो. पुनीत गोयल, महापौर गिरीश पति त्रिपाठी, विधायक अभय सिंह और चंद्रभानु पासवान समेत फैकल्टी सदस्य और विद्यार्थी मौजूद रहे।
स्पोक हब मॉडल में पीजीआई मुख्य केंद्र (हब) है और मेडिकल कॉलेज स्पोक। आईसीयू के गंभीर मरीजों की वास्तविक स्थिति कैमरे और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पीजीआई विशेषज्ञों तक पहुंचती है। विशेषज्ञ स्थानीय डॉक्टरों को इलाज और दवाओं पर सलाह देते हैं। इससे गंभीर मरीजों के इलाज में मदद मिलती है।
स्पोक बनने से मरीजों को भी फायदा होगा। गंभीर मरीजों का रेफर नहीं किया जाएगा। लखनऊ आने-जाने का अतिरिक्त खर्च बचेगा। अभी बीआरडी गोरखपुर, जीएसवीएम कानपुर, एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा, झांसी मेडिकल कॉलेज, स्वरूप रानी प्रयागराज और एलएलआरएम मेरठ इससे जुड़े हैं। अयोध्या अब सातवां स्पोक बनेगा।
मेडिकल कॉलेज में तीन नए विभाग खोलने की तैयारी : मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और न्यूरोलॉजी के अलग-अलग विभाग स्थापित करने की तैयारी है।
स्वास्थ्य मंत्री ने इसके लिए प्रस्ताव भेजने को कहा है। साथ ही मेडिकल कॉलेज के आवासीय क्वार्टर के प्रस्ताव को जल्द स्वीकृति देने का आश्वासन दिया। पीजीआई के फैकल्टी सदस्य जरूरत के अनुसार मेडिकल कॉलेज का दौरा करेंगे। विद्यार्थियों के लिए गेस्ट लेक्चर भी आयोजित किए जाएंगे।
2017 के बाद प्रदेश में जुड़े 45 मेडिकल कॉलेज : स्वास्थ्य मंत्री
समारोह में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 1947 से 2017 तक 70 वर्षों में प्रदेश में सरकारी क्षेत्र में 17 और निजी क्षेत्र में 23 मेडिकल कॉलेज थे। एमबीबीएस की करीब पांच हजार सीटें थीं।
2017 के बाद करीब साढ़े नौ वर्षों में मेडिकल कॉलेजों की कुल संख्या 85 हो गई। सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या 17 से बढ़कर 26 हुई और 45 नए मेडिकल कॉलेज जोड़े गए।
एमबीबीएस सीटें 12500 से अधिक हो गई। एमडी-एमएस सीटों में ढाई गुना बड़ा। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों के साथ नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाने की बात कही।
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एसजीपीजीआई और मेडिकल कॉलेज, गंजा के संयुक्त तत्वावधान में गंभीर मरीजों की देखभाल, इलाज और औषधियों पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन समारोह में स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने यह घोषणा की।
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एसजीपीजीआई के निदेशक पद्मश्री प्रो. आरके धीमान ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को व्यवस्था शुरू करने के लिए आवश्यक उपकरण तत्काल खरीदने के निर्देश दिए। इनमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम, बड़ी स्क्रीन, कैमरे और ब्रॉडबैंड इंटरनेट शामिल हैं। उन्होंने उपलब्ध फंड से इनकी खरीद करने को कहा।
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समापन समारोह में प्राचार्य प्रो. दिनेश सिंह, आईएसआईसीपीएम अध्यक्ष प्रो. एसपी अंबरीश, आयोजन अध्यक्ष प्रो. संजय धीराज, एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष प्रो. जेपी तिवारी, आयोजन सचिव प्रो. पुनीत गोयल, महापौर गिरीश पति त्रिपाठी, विधायक अभय सिंह और चंद्रभानु पासवान समेत फैकल्टी सदस्य और विद्यार्थी मौजूद रहे।
स्पोक हब मॉडल में पीजीआई मुख्य केंद्र (हब) है और मेडिकल कॉलेज स्पोक। आईसीयू के गंभीर मरीजों की वास्तविक स्थिति कैमरे और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पीजीआई विशेषज्ञों तक पहुंचती है। विशेषज्ञ स्थानीय डॉक्टरों को इलाज और दवाओं पर सलाह देते हैं। इससे गंभीर मरीजों के इलाज में मदद मिलती है।
स्पोक बनने से मरीजों को भी फायदा होगा। गंभीर मरीजों का रेफर नहीं किया जाएगा। लखनऊ आने-जाने का अतिरिक्त खर्च बचेगा। अभी बीआरडी गोरखपुर, जीएसवीएम कानपुर, एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा, झांसी मेडिकल कॉलेज, स्वरूप रानी प्रयागराज और एलएलआरएम मेरठ इससे जुड़े हैं। अयोध्या अब सातवां स्पोक बनेगा।
मेडिकल कॉलेज में तीन नए विभाग खोलने की तैयारी : मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और न्यूरोलॉजी के अलग-अलग विभाग स्थापित करने की तैयारी है।
स्वास्थ्य मंत्री ने इसके लिए प्रस्ताव भेजने को कहा है। साथ ही मेडिकल कॉलेज के आवासीय क्वार्टर के प्रस्ताव को जल्द स्वीकृति देने का आश्वासन दिया। पीजीआई के फैकल्टी सदस्य जरूरत के अनुसार मेडिकल कॉलेज का दौरा करेंगे। विद्यार्थियों के लिए गेस्ट लेक्चर भी आयोजित किए जाएंगे।
2017 के बाद प्रदेश में जुड़े 45 मेडिकल कॉलेज : स्वास्थ्य मंत्री
समारोह में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 1947 से 2017 तक 70 वर्षों में प्रदेश में सरकारी क्षेत्र में 17 और निजी क्षेत्र में 23 मेडिकल कॉलेज थे। एमबीबीएस की करीब पांच हजार सीटें थीं।
2017 के बाद करीब साढ़े नौ वर्षों में मेडिकल कॉलेजों की कुल संख्या 85 हो गई। सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या 17 से बढ़कर 26 हुई और 45 नए मेडिकल कॉलेज जोड़े गए।
एमबीबीएस सीटें 12500 से अधिक हो गई। एमडी-एमएस सीटों में ढाई गुना बड़ा। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों के साथ नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाने की बात कही।