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Ayodhya News: राम वन गमन पथ पर श्रद्धालुओं के लिए विश्राम गृह की मांग
Mon, 02 Feb 2026 10:56 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 02 Feb 2026 10:56 PM IST
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अयोध्या। राज्यसभा सांसद व भाजपा के प्रदेश महामंत्री अमर पाल मौर्य ने राम वन गमन पथ पर श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर सरकार का ध्यान आकृष्ट किया है। उन्होंने सदन के माध्यम से अयोध्या से चित्रकूट तक जाने वाले पावन राम वन गमन पथ पर ‘श्रीराम विश्राम गृहों’ के निर्माण की मांग की है। इसके लिए राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखा है।
सांसद अमर पाल मौर्य ने बताया कि अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के लोकार्पण के बाद राम वन गमन पथ पर श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। लगभग 210 किलोमीटर लंबा यह मार्ग सुलतानपुर, प्रतापगढ़, कौशांबी और प्रयागराज जैसे जिलों से होकर गुजरता है, लेकिन पूरे मार्ग पर पदयात्रियों और श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित व किफायती रात्रि विश्राम की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि राम वन गमन पथ पर प्रत्येक 20 से 25 किलोमीटर की दूरी पर दोनों ओर विश्राम गृहों का निर्माण किया जाए। सांसद ने सुझाव दिया कि विश्राम गृहों के परिसरों में उत्तर प्रदेश सरकार की ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ योजना के तहत स्टॉल लगाए जाएं। इससे प्रतापगढ़ के आंवला, सुलतानपुर और प्रयागराज के मूंज शिल्प, कौशाम्बी के केले, अयोध्या के गुड़ और चित्रकूट के लकड़ी के खिलौनों को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही स्थानीय रेहड़ी-पटरी संचालकों और स्वयं सहायता समूहों को संगठित बाजार उपलब्ध होगा।
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सांसद अमर पाल मौर्य ने बताया कि अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के लोकार्पण के बाद राम वन गमन पथ पर श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। लगभग 210 किलोमीटर लंबा यह मार्ग सुलतानपुर, प्रतापगढ़, कौशांबी और प्रयागराज जैसे जिलों से होकर गुजरता है, लेकिन पूरे मार्ग पर पदयात्रियों और श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित व किफायती रात्रि विश्राम की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि राम वन गमन पथ पर प्रत्येक 20 से 25 किलोमीटर की दूरी पर दोनों ओर विश्राम गृहों का निर्माण किया जाए। सांसद ने सुझाव दिया कि विश्राम गृहों के परिसरों में उत्तर प्रदेश सरकार की ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ योजना के तहत स्टॉल लगाए जाएं। इससे प्रतापगढ़ के आंवला, सुलतानपुर और प्रयागराज के मूंज शिल्प, कौशाम्बी के केले, अयोध्या के गुड़ और चित्रकूट के लकड़ी के खिलौनों को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही स्थानीय रेहड़ी-पटरी संचालकों और स्वयं सहायता समूहों को संगठित बाजार उपलब्ध होगा।
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