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Ayodhya News: विधिक सहायता प्रणाली ने 439 कैदियों को रिहा कराया
Sun, 20 Sep 2026 11:36 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 20 Sep 2026 11:36 PM IST
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अयोध्या। लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के तहत जनवरी 2023 से जुलाई 2026 के बीच 439 बंदियों को जेल से रिहा कराया गया। इस अवधि में कुल 12,744 गरीब और असहाय लोगों को निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई गई। यह प्रणाली जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में संचालित होती है। इसका उद्देश्य आर्थिक अभाव के कारण किसी व्यक्ति को न्याय से वंचित होने से बचाना है।
काउंसिल की ओर से हत्या, चोरी, दुष्कर्म, एनडीपीएस, लूट और डकैती जैसे गंभीर अपराधों में आरोपी बंदियों की पैरवी की गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने 930 वाद काउंसिल को आवंटित किए, जिनमें से 324 मामलों का निस्तारण हुआ। अदालतों में 448 जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए गए। इसके अलावा, लंबे समय से जेल में बंद 439 ऐसे आरोपियों को रिहाई मिली, जिनकी पैरवी के लिए कोई अधिवक्ता उपलब्ध नहीं था।
विभिन्न अदालतों में विचाराधीन 690 मामलों में गवाहों का परीक्षण भी कराया गया। लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम का संचालन 20 जनवरी 2023 को जिला न्यायालय परिसर से शुरू हुआ था। इसका उद्घाटन तत्कालीन सचिव शैलेंद्र यादव की देखरेख में हुआ था। प्रणाली का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि धन के अभाव में कोई भी व्यक्ति न्याय पाने से वंचित न रहे।
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प्रणाली की संरचना और उद्देश्य
लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम को हिंदी में विधिक सहायता रक्षा परामर्श प्रणाली कहा जाता है। यह सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में संचालित है। इसका उद्देश्य गरीब, असहाय और संसाधनविहीन लोगों को निशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है।
मजिस्ट्रेट अदालतों में असिस्टेंट अजीज हसन, सुरभि त्रिपाठी और आदर्श कुमार श्रीवास्तव विधिक सहायता प्रदान करते हैं। वहीं, सत्र न्यायालयों में डिफेंस काउंसिल के चीफ अरुण प्रकाश तिवारी, डिप्टी चीफ कुलशेखर सिंह और अमित तिवारी सेवाएं दे रहे हैं।
जेल में विधिक सहायता क्लीनिक
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से जिला कारागार अयोध्या में लीगल एड क्लीनिक स्थापित किया गया है। यहां जेल में बंद कैदियों से उनके मामलों की जानकारी ली जाती है। जिन बंदियों की ओर से पैरवी के लिए कोई अधिवक्ता उपलब्ध नहीं होता, उनके मामले लीगल एड डिफेंस काउंसिल को भेजे जाते हैं।
क्लीनिक का उद्देश्य जेल में बंद असहाय और बेसहारा कैदियों को निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराना और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया में प्रभावी पैरवी का अवसर दिलाना है।
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काउंसिल की ओर से हत्या, चोरी, दुष्कर्म, एनडीपीएस, लूट और डकैती जैसे गंभीर अपराधों में आरोपी बंदियों की पैरवी की गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने 930 वाद काउंसिल को आवंटित किए, जिनमें से 324 मामलों का निस्तारण हुआ। अदालतों में 448 जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए गए। इसके अलावा, लंबे समय से जेल में बंद 439 ऐसे आरोपियों को रिहाई मिली, जिनकी पैरवी के लिए कोई अधिवक्ता उपलब्ध नहीं था।
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विभिन्न अदालतों में विचाराधीन 690 मामलों में गवाहों का परीक्षण भी कराया गया। लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम का संचालन 20 जनवरी 2023 को जिला न्यायालय परिसर से शुरू हुआ था। इसका उद्घाटन तत्कालीन सचिव शैलेंद्र यादव की देखरेख में हुआ था। प्रणाली का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि धन के अभाव में कोई भी व्यक्ति न्याय पाने से वंचित न रहे।
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प्रणाली की संरचना और उद्देश्य
लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम को हिंदी में विधिक सहायता रक्षा परामर्श प्रणाली कहा जाता है। यह सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में संचालित है। इसका उद्देश्य गरीब, असहाय और संसाधनविहीन लोगों को निशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है।
मजिस्ट्रेट अदालतों में असिस्टेंट अजीज हसन, सुरभि त्रिपाठी और आदर्श कुमार श्रीवास्तव विधिक सहायता प्रदान करते हैं। वहीं, सत्र न्यायालयों में डिफेंस काउंसिल के चीफ अरुण प्रकाश तिवारी, डिप्टी चीफ कुलशेखर सिंह और अमित तिवारी सेवाएं दे रहे हैं।
जेल में विधिक सहायता क्लीनिक
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से जिला कारागार अयोध्या में लीगल एड क्लीनिक स्थापित किया गया है। यहां जेल में बंद कैदियों से उनके मामलों की जानकारी ली जाती है। जिन बंदियों की ओर से पैरवी के लिए कोई अधिवक्ता उपलब्ध नहीं होता, उनके मामले लीगल एड डिफेंस काउंसिल को भेजे जाते हैं।
क्लीनिक का उद्देश्य जेल में बंद असहाय और बेसहारा कैदियों को निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराना और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया में प्रभावी पैरवी का अवसर दिलाना है।