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Ayodhya News: कॉलेज खुद नहीं चाहते प्रायोगिक परीक्षकों की नियुक्ति में बदलाव

Sun, 25 May 2025 10:51 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 25 May 2025 10:51 PM IST
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The colleges themselves do not want any change in the appointment of practical examiners
अयोध्या। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से संबंद्ध सात जिलों के 750 कॉलेजों में से ज्यादातर प्रायोगिक और मौखिक परीक्षा के लिए आंतरिक व वाह्य परीक्षकों की नियुक्ति की मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं चाहते हैं। कई कॉलेजों के प्रबंधक और प्राचार्याें ने अवध विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक संघ के प्रस्ताव का विरोध किया है। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति का भी हवाला दिया है।
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विश्वविद्यालय से संबंद्ध कॉलेजों के प्रबंधक और प्राचार्यों का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के जारी होने के बाद से अभी तक कॉलेजों के प्राचार्यों की ओर से ही आंतरिक और वाह्य परीक्षकों को नामित कर प्रयोगात्मक परीक्षा कराई जाती रही है। इस व्यवस्था से समय से परीक्षाफल घोषित करने में विश्वविद्यालय को भी सहायता मिलती है। वैसे भी एनईपी के तहत सम सेमेस्टर परीक्षाएं आधी से अधिक बीत चुकी है। जल्द ही परास्नातक कक्षाओं में प्रवेश की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी।
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एक कॉलेज के प्रबंधक शीवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यदि प्रयोगात्मक परीक्षाओं के लिए आंतरिक और वाह्य परीक्षक नामित करने की मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव किया जाता है तो इससे परीक्षाफल समय से घोषित कर पाना संभव नहीं हो पाएगा। इसका सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ेगा। डॉ. सत्यवान शुक्ल ने कहा कि एनईपी-2020 की नियमावली में भी प्रयोगात्मक परीक्षाओं को संपंन्न कराने का संपूर्ण दायित्व संबंधित कॉलेजों के प्राचार्यों को ही सौंपा गया है। प्राचार्य प्रायोगिक परीक्षा कराने के बाद अंक चिट के साथ संबंधित शिक्षक के अभिलेख को भी विश्वविद्यालय में जमा करते हैं।
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अवध विश्वविद्यालय से संबंद्ध कई जिलों के 70 कॉलेजों के प्राचार्य और प्रबंधकों ने इस संबंध में प्रभारी कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह को संयुक्त हस्ताक्षरित पत्र भी भेजा है। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की नियमावली का पालन करते हुए वर्तमान में जारी प्रक्रिया को ही बहाल रखा जाए। प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए आंतरिक और वाह्य दोनों ही परीक्षकों को नामित करने का अधिकार कॉलेजों के प्राचार्य के ही पास रहने दिया जाए। इसमें किसी तरह के बदलाव की कोई जरूरत नहीं है।


अवध विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक संघ चाहता है कि प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए आंतरिक और वाह्य परीक्षकों को नामित करने की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव लाते हुए वर्ष 2021 के पहले के प्रावधान लागू किए जाएं। इसके तहत कॉलेजों के प्राचार्यों के अनुमोदन पर सिर्फ आंतरिक परीक्षक नामित किए जाएं। वाह्य परीक्षक नियुक्त करने का अधिकार विश्वविद्यालय के पास रहे।
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