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Ayodhya News: लद्दाख की पश्मीना शॉल व उत्तराखंड के ऊनी वस्त्र पहनेंगे रामलला

Thu, 07 Nov 2024 12:07 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Thu, 07 Nov 2024 12:07 AM IST
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Ramlala will wear Pashmina shawl of Ladakh and woolen clothes of Uttarakhand
अयोध्या। भव्य महल में विराजमान रामलला के ठाठ-बाट किसी राजकुमार से कम नहीं हैं। मौसम के अनुसार उनकी सेवा का भी ध्यान रखा जाता है। अब चूंकि ठंडक का दौर शुरू हो रहा है, इसलिए उनके वास्ते मौसम के अनुकूल वस्त्र तैयार कराए जा रहे हैं। इस सर्दी में रामलला लद्दाख की पश्मीना शॉल व उत्तराखंड के ऊनी वस्त्र धारण करेंगे जो अपनी गुणवत्ता के लिए मशहूर हैं। ये ऊनी वस्त्र 15 दिन के भीतर अयोध्या पहुंच जाएंगे।
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रामलला के वस्त्र तैयार करने का जिम्मा मशहूर डिजाइनर मनीष त्रिपाठी को मिला है। उन्होंने अमर उजाला को बताया कि राममंदिर ट्रस्ट की ओर से उन्हें रामलला के लिए विशेष ऊनी वस्त्र तैयार करने का निर्देश मिला है। रामलला रोजाना नए कपड़े पहनते हैं। अबकी सर्दियों में रामलला लद्दाख की पश्मीना शॉल, उत्तराखंड व हिमाचल के कुल्लू के श्रमसाधकों की ओर से तैयार किए जा रहे ऊनी वस्त्र धारण करेंगे।
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उन्होंने बताया कि श्रमसाधक वस्त्र तैयार करने में जुटे हुए हैं। वस्त्र तैयार करने के बाद उनके पास दिल्ली भेजे जाएंगे। फिर दिल्ली में उन वस्त्रों पर कढ़ाई व छपाई की जाएगी। सोने व चांदी के तार से रत्न जड़े जाएंगे।
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मनीष त्रिपाठी ने बताया कि दिल्ली में 10 कारीगरों की टीम रामलला के कपड़े तैयार करती है फिर विमान के जरिये रामलला के कपड़े अयोध्या भेजे जाते हैं। ट्रस्ट की ओर से इन कपड़ों को एयरपोर्ट से हैंडओवर किया जाता है।

बताया कि बालक राम राममंदिर में एक राजकुमार के रूप में विराजमान हैं, इसलिए उनके कपड़े भी राजकुमार जैसे ही बनाए जाते हैं। उत्सव मूर्ति के रूप में विराजमान रामलला समेत चारों भाइयों व हनुमान जी के लिए भी ऊनी कपड़े तैयार किए जा रहे हैं।


लद्दाख के पश्मीना ऊन की खासियत
मनीष बताते हैं कि लद्दाख का पश्मीना ऊन ओरिजिनल सिल्क है। इसकी खासियत है कि यह कभी पुराना नहीं होता। यह सालों साल एक ही जैसा नजर आता है। इसे साफ करने के लिए किसी भी तरह के वाशिंग पाउडर या साबुन का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। इसे धोने का सबसे आसान तरीका यह है कि गर्म पानी में रातभर डुबो कर रख दीजिए और सुबह निकाल दीजिए। इसकी चमक कभी फीकी नहीं पड़ने वाली है। कितनी भी सर्दी हो, इसे धारण करने से शरीर में तत्काल गर्माहट आ जाती है। उत्तराखंड के ऊनी वस्त्रों की मांग देश-विदेश में खूब रहती है।




रोजाना नए वस्त्र धारण करते हैं रामलला
भव्य महल में विराजने के बाद रामलला के ठाठ-बाट में और वृद्धि हो गई है। उनकी सेवा एक राजकुमार की तरह की जाती है। राजसी अंदाज में उनके राग-भोग व सेवा का प्रबंधन किया जाता है। उन्हें दिन के हिसाब से वस्त्र पहनाए जाते हैं।


दिन- वस्त्र का रंग
रविवार- गुलाबी
सोमवार- सफेद
मंगलवार-लाल
बुधवार-हरा
बृहस्पतिवार-पीला
शुक्रवार-क्रीम कलर
शनिवार-नीला
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