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Ayodhya News: मंगल ही मंगल.... जयघोष से गूंज उठी अयोध्या
Tue, 27 May 2025 09:05 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Tue, 27 May 2025 09:05 PM IST
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अयोध्या। ज्येष्ठ माह की तपती दोपहर में जब सूर्य अपनी प्रखर किरणों से समस्त धरा को झुलसा रहा था, तब अयोध्या की पावन भूमि पर स्थित हनुमानगढ़ी धाम में एक अलौकिक छटा बिखरी हुई थी। ज्येष्ठ माह के तीसरे मंगलवार का पावन दिन, जो स्वयं हनुमान जी को समर्पित है, श्रद्धालुओं के भक्ति भाव से सराबोर हो उठा।
दूर-दूर से पैदल, धूप और गर्मी की परवाह किए बिना जनसैलाब उमड़ पड़ा। कोई अपने बालक को कंधे पर बिठाए, तो कोई मन में श्रद्धा का सैलाब लिए हनुमानगढ़ी के पावन द्वार पर आ खड़ा हुआ। घंटियों की गूंज, शंखनाद और हनुमान चालीसा के पाठ से पूरा परिसर गूंज उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो स्वयं हनुमंत लला अपने भक्तों के स्वागत के लिए विराजमान हों।
प्राचीन समय से यह मान्यता रही है कि ज्येष्ठ माह के मंगलवार पर हनुमानगढ़ी में दर्शन मात्र से समस्त संकट कट जाते हैं। यह दिन न केवल भक्तों के लिए आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह अयोध्या के जीवंत सांस्कृतिक जीवन का भी दर्पण है। मंदिर की सीढ़ियों पर चढ़ते हुए भक्तजन जब जय श्रीराम और बोलो बजरंगबली की जय का उद्धघोष करते तो वातावरण भक्तिरस में सराबोर हो जाता। फूलों से सजे दरबार में विराजे पवनपुत्र को विशेष शृंगार अर्पित किया गया। लाल वस्त्र, चंदन, गुलाल और सुगंधित इत्रों से विभूषित भगवान हनुमान जैसे अपने प्रत्येक भक्त को स्नेह से निहार रहे थे।
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बड़े मंगल पर शहर के हनुमान मंदिरों में अनुष्ठानों की धूम रही। दिन भर हनुमान चालीसा के स्वर गूंजते रहे। सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी, जानकी महल स्थित हनुमानगढ़ी, विद्याकुंड स्थित वीर भगवान मंदिर सहित शहर के नाका हनुमानगढ़ी, रिकाबगंज हनुमानगढ़ी, सहादतगंज हनुमानगढ़ी, देवकाली हनुमानगढ़ी सहित अन्य हनुमान मंदिरों में दिन भर भक्तों का तांता लगा रहा। हनुमान चालीसा व हनुमंत लला के जयकारों से पूरा शहर गूंजता रहा।
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दूर-दूर से पैदल, धूप और गर्मी की परवाह किए बिना जनसैलाब उमड़ पड़ा। कोई अपने बालक को कंधे पर बिठाए, तो कोई मन में श्रद्धा का सैलाब लिए हनुमानगढ़ी के पावन द्वार पर आ खड़ा हुआ। घंटियों की गूंज, शंखनाद और हनुमान चालीसा के पाठ से पूरा परिसर गूंज उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो स्वयं हनुमंत लला अपने भक्तों के स्वागत के लिए विराजमान हों।
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प्राचीन समय से यह मान्यता रही है कि ज्येष्ठ माह के मंगलवार पर हनुमानगढ़ी में दर्शन मात्र से समस्त संकट कट जाते हैं। यह दिन न केवल भक्तों के लिए आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह अयोध्या के जीवंत सांस्कृतिक जीवन का भी दर्पण है। मंदिर की सीढ़ियों पर चढ़ते हुए भक्तजन जब जय श्रीराम और बोलो बजरंगबली की जय का उद्धघोष करते तो वातावरण भक्तिरस में सराबोर हो जाता। फूलों से सजे दरबार में विराजे पवनपुत्र को विशेष शृंगार अर्पित किया गया। लाल वस्त्र, चंदन, गुलाल और सुगंधित इत्रों से विभूषित भगवान हनुमान जैसे अपने प्रत्येक भक्त को स्नेह से निहार रहे थे।
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बड़े मंगल पर शहर के हनुमान मंदिरों में अनुष्ठानों की धूम रही। दिन भर हनुमान चालीसा के स्वर गूंजते रहे। सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी, जानकी महल स्थित हनुमानगढ़ी, विद्याकुंड स्थित वीर भगवान मंदिर सहित शहर के नाका हनुमानगढ़ी, रिकाबगंज हनुमानगढ़ी, सहादतगंज हनुमानगढ़ी, देवकाली हनुमानगढ़ी सहित अन्य हनुमान मंदिरों में दिन भर भक्तों का तांता लगा रहा। हनुमान चालीसा व हनुमंत लला के जयकारों से पूरा शहर गूंजता रहा।