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Ayodhya News: एनएचएम संविदाकर्मियों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित
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महिलाओं का परीक्षण करती डॉक्टर
अयोध्या। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदाकर्मियों की हड़ताल का असर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं की जांच से लेकर टीकाकरण और ओपीडी तक प्रभावित हुई। शुक्रवार को टीम की पड़ताल में कहीं अल्ट्रासाउंड के वाउचर नहीं बन सके तो कहीं एक चिकित्सक के सहारे ओपीडी संचालित हुई। जिले में 900 से अधिक संविदाकर्मी हैं। एनएचएम संविदा कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष दिवाकर पांडेय के अनुसार, मांगें पूरी नहीं होने पर संगठन 12 अक्तूबर से लखनऊ में अनिश्चितकालीन हड़ताल करने की तैयारी कर रहा है।
तारुन : 80 के सापेक्ष 33 गर्भवती महिलाएं पहुंचीं
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तारुन में शुक्रवार को आयोजित शिविर में सिर्फ 33 गर्भवती महिलाएं पहुंचीं, जबकि सामान्य दिनों में इनकी संख्या 60 से 80 रहती है। आशा कार्यकर्ताओं की 30 सितंबर से जारी हड़ताल के बीच अल्ट्रासाउंड के वाउचर नहीं बन सके। बीपी और शुगर की जांच दूसरे कर्मचारियों की मदद से कराई गई। जांच का ब्योरा रजिस्टर में दर्ज करना पड़ा और टीकाकरण भी प्रभावित रहा। लैब टेक्नीशियन दीपक कुमार के अकेले होने के कारण हैदरगंज सीएचसी से श्याम नारायण वर्मा को बुलाया गया। शिविर में डॉ. एनआर गौतम और डॉ. प्रतिभा रानी ने गर्भवती महिलाओं की जांच की।
सोहावल : एक डॉक्टर ने देखे 200 मरीज
सीएचसी सोहावल में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. संग्राम सिंह की निगरानी में डॉ. उमेश चंद तिवारी ने ओपीडी संभाली। उन्होंने करीब 200 मरीजों का उपचार किया। कर्मचारियों की कमी के कारण मातृत्व दिवस की अन्य गतिविधियां पूरी तरह संचालित नहीं हो सकीं।
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मिल्कीपुर : 16 महिलाएं उच्च जोखिम की श्रेणी में
सीएचसी मिल्कीपुर में स्थायी स्वास्थ्यकर्मियों और प्रशिक्षु छात्राओं की मदद से शिविर आयोजित किया गया। यहां 65 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इनमें 16 महिलाओं का गर्भधारण उच्च जोखिम की श्रेणी में पाया गया। 42 महिलाओं को अल्ट्रासाउंड और 57 को हीमोग्लोबिन समेत अन्य रक्त संबंधी जांच कराने की सलाह दी गई। डॉ. अंजू जायसवाल और डॉ. पूजा सरोज ने महिलाओं को उपचार और खानपान संबंधी परामर्श दिया।
रुदौली : 180 महिलाओं की हुई जांच
सीएचसी रुदौली में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत करीब 180 महिलाओं की रक्त संबंधी जांच और अल्ट्रासाउंड कराया गया। अधीक्षक डॉ. रवींद्र शुक्ला ने बताया कि हड़ताल की आशंका को देखते हुए पहले से ही कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी गई थी। यहां ओपीडी में 450 मरीजों का उपचार किया गया।
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तारुन : 80 के सापेक्ष 33 गर्भवती महिलाएं पहुंचीं
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तारुन में शुक्रवार को आयोजित शिविर में सिर्फ 33 गर्भवती महिलाएं पहुंचीं, जबकि सामान्य दिनों में इनकी संख्या 60 से 80 रहती है। आशा कार्यकर्ताओं की 30 सितंबर से जारी हड़ताल के बीच अल्ट्रासाउंड के वाउचर नहीं बन सके। बीपी और शुगर की जांच दूसरे कर्मचारियों की मदद से कराई गई। जांच का ब्योरा रजिस्टर में दर्ज करना पड़ा और टीकाकरण भी प्रभावित रहा। लैब टेक्नीशियन दीपक कुमार के अकेले होने के कारण हैदरगंज सीएचसी से श्याम नारायण वर्मा को बुलाया गया। शिविर में डॉ. एनआर गौतम और डॉ. प्रतिभा रानी ने गर्भवती महिलाओं की जांच की।
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सोहावल : एक डॉक्टर ने देखे 200 मरीज
सीएचसी सोहावल में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. संग्राम सिंह की निगरानी में डॉ. उमेश चंद तिवारी ने ओपीडी संभाली। उन्होंने करीब 200 मरीजों का उपचार किया। कर्मचारियों की कमी के कारण मातृत्व दिवस की अन्य गतिविधियां पूरी तरह संचालित नहीं हो सकीं।
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मिल्कीपुर : 16 महिलाएं उच्च जोखिम की श्रेणी में
सीएचसी मिल्कीपुर में स्थायी स्वास्थ्यकर्मियों और प्रशिक्षु छात्राओं की मदद से शिविर आयोजित किया गया। यहां 65 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इनमें 16 महिलाओं का गर्भधारण उच्च जोखिम की श्रेणी में पाया गया। 42 महिलाओं को अल्ट्रासाउंड और 57 को हीमोग्लोबिन समेत अन्य रक्त संबंधी जांच कराने की सलाह दी गई। डॉ. अंजू जायसवाल और डॉ. पूजा सरोज ने महिलाओं को उपचार और खानपान संबंधी परामर्श दिया।
रुदौली : 180 महिलाओं की हुई जांच
सीएचसी रुदौली में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत करीब 180 महिलाओं की रक्त संबंधी जांच और अल्ट्रासाउंड कराया गया। अधीक्षक डॉ. रवींद्र शुक्ला ने बताया कि हड़ताल की आशंका को देखते हुए पहले से ही कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी गई थी। यहां ओपीडी में 450 मरीजों का उपचार किया गया।

महिलाओं का परीक्षण करती डॉक्टर