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Ayodhya News: परिजनों को सौंपे गए तस्करों के चंगुल से छूटे पांच बच्चे
Fri, 20 Feb 2026 12:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Fri, 20 Feb 2026 12:01 AM IST
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अयोध्या। बाल तस्करों के चंगुल से छूटकर कैंट स्टेशन पर आए बच्चों को बाल कल्याण समिति के आदेश पर परिजनों को सौंप दिया गया। समिति ने परिजनों को पश्चिम बंगाल के हंसीमारा थाने में मानव तस्करों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने का निर्देश दिया है।
14 फरवरी को पांच नाबालिग बच्चे कैंट रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। आरपीएफ से संपर्क करके उन्होंने पूरी घटना की जानकारी दी थी। बाल कल्याण समिति के निर्देश पर बच्चों को बाल गृह लखनऊ भेजकर पश्चिम बंगाल से उनके परिजनों को बुलाया गया था। बुधवार को बच्चों के परिजन न्यायपीठ बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत हुए। परिजनों ने बताया कि सभी बच्चे एक गांव के रहने वाले हैं और घर पर बिना किसी को सूचित किए 12 हजार रुपये की नौकरी की लालच में निकले थे।
एक व्यक्ति ने बच्चों को सिलीगुड़ी में काम दिलाने का झांसा दिया था। संदीप नामक आरोपी के विषय में परिजनों ने किसी भी तरह की जानकारी होने से अनभिज्ञता जताई। उन्होंने बताया कि बच्चे फोन पर ठीक से बोल नहीं पा रहे थे। उन्हें यह भी पता नहीं था कि वह अयोध्या आ गए हैं। परिजनों ने ही उन्हें स्टेशन की फोटो खींचकर भेजने और पुलिस से बात करने को कहा था, जिस पर उनके अयोध्या में होने की जानकारी मिली थी।
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उन्होंने आशंका जताई कि तस्कर ने उन्हें नशीला पदार्थ खिला दिया था, जिससे वह कुछ भी सोच समझ नहीं पा रहे थे। समिति के अध्यक्ष सर्वेश अवस्थी, सदस्य सिद्धार्थ तिवारी, लल्लन प्रसाद, अंबेश व स्मृता तिवारी ने परिजनों को पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार स्थित हंसीमारा थाने में इस मामले की एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश भी दिया है। अध्यक्ष ने बताया कि इस प्रकरण में पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार सीडब्ल्यूसी व राज्य बाल आयोग को भी कार्रवाई के लिए पत्र भेजकर संस्तुति की जाएगी। बच्चों का परिवार अत्यंत गरीब है। वह चाय बागान में काम करते हैं।
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14 फरवरी को पांच नाबालिग बच्चे कैंट रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। आरपीएफ से संपर्क करके उन्होंने पूरी घटना की जानकारी दी थी। बाल कल्याण समिति के निर्देश पर बच्चों को बाल गृह लखनऊ भेजकर पश्चिम बंगाल से उनके परिजनों को बुलाया गया था। बुधवार को बच्चों के परिजन न्यायपीठ बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत हुए। परिजनों ने बताया कि सभी बच्चे एक गांव के रहने वाले हैं और घर पर बिना किसी को सूचित किए 12 हजार रुपये की नौकरी की लालच में निकले थे।
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एक व्यक्ति ने बच्चों को सिलीगुड़ी में काम दिलाने का झांसा दिया था। संदीप नामक आरोपी के विषय में परिजनों ने किसी भी तरह की जानकारी होने से अनभिज्ञता जताई। उन्होंने बताया कि बच्चे फोन पर ठीक से बोल नहीं पा रहे थे। उन्हें यह भी पता नहीं था कि वह अयोध्या आ गए हैं। परिजनों ने ही उन्हें स्टेशन की फोटो खींचकर भेजने और पुलिस से बात करने को कहा था, जिस पर उनके अयोध्या में होने की जानकारी मिली थी।
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उन्होंने आशंका जताई कि तस्कर ने उन्हें नशीला पदार्थ खिला दिया था, जिससे वह कुछ भी सोच समझ नहीं पा रहे थे। समिति के अध्यक्ष सर्वेश अवस्थी, सदस्य सिद्धार्थ तिवारी, लल्लन प्रसाद, अंबेश व स्मृता तिवारी ने परिजनों को पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार स्थित हंसीमारा थाने में इस मामले की एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश भी दिया है। अध्यक्ष ने बताया कि इस प्रकरण में पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार सीडब्ल्यूसी व राज्य बाल आयोग को भी कार्रवाई के लिए पत्र भेजकर संस्तुति की जाएगी। बच्चों का परिवार अत्यंत गरीब है। वह चाय बागान में काम करते हैं।