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Ayodhya News: तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर जोर, सरसों की नई प्रजाति का प्रदर्शन
Mon, 23 Feb 2026 09:20 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 23 Feb 2026 09:20 PM IST
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14- मवई ब्लॉक में सरसों की नई प्रजाति का अवलोकन करते हुए उपकार उप महानिदेशक व अन्य
अयोध्या। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) मसौधा ने तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया। मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) के उप महानिदेशक डॉ. प्रमेंद्र सिंह ने 2030-31 तक तिलहन में आत्मनिर्भरता के लिए उत्पादन क्षेत्र बढ़ाने पर जोर दिया। राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के तहत किसानों को बीज मिनीकिट, संकर बीज और आधुनिक कृषि तकनीकों से प्रमुख तिलहन फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
केंद्र ने मवई, रुदौली, सोहावल, पूरा बाजार, बीकापुर, तारुन एवं मया बाजार में 100 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 250 किसानों के प्रक्षेत्र पर सरसों की आर एच 725 प्रजाति का प्रदर्शन किया। वैज्ञानिकों ने बताया कि आर एच 725 प्रजाति 140-145 दिन में पकती है और प्रति एकड़ 10-11 क्विंटल उत्पादन देती है। एक किसान ने बताया कि इससे प्रति एकड़ 12-13 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है और लागत में कमी आएगी। प्रगतिशील महिला कृषक शबीना खातून ने कहा, जो बीज कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से मिला है उससे अन्य प्रजातियों की अपेक्षा उत्पादन अधिक होने की संभावना है। यहां 25 किसानों के प्रक्षेत्र पर यह प्रजाति लगी है। कार्यक्रम में केवीके के अध्यक्ष डॉ. बीपी शाही, डॉ. पंकज कुमार सिंह, अमन कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।
फसल सुरक्षा और देखभाल
वैज्ञानिकों ने किसानों को छोटे कीटों के लिए इमिडाक्लोरोपिड या डाईमेथोएट और सफेद रतुआ के लिए मेटालेक्सिल व मेन्कोजेब के छिड़काव की सलाह दी। यह भी सलाह दी कि फसल कमजोर दिखने पर हल्की यूरिया डालें। नमी बनाए रखने से उत्पादन बढ़ता है। इस प्रक्षेत्र दिवस में लगभग 55-65 किसानों और महिला किसानों ने भाग लिया।
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केंद्र ने मवई, रुदौली, सोहावल, पूरा बाजार, बीकापुर, तारुन एवं मया बाजार में 100 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 250 किसानों के प्रक्षेत्र पर सरसों की आर एच 725 प्रजाति का प्रदर्शन किया। वैज्ञानिकों ने बताया कि आर एच 725 प्रजाति 140-145 दिन में पकती है और प्रति एकड़ 10-11 क्विंटल उत्पादन देती है। एक किसान ने बताया कि इससे प्रति एकड़ 12-13 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है और लागत में कमी आएगी। प्रगतिशील महिला कृषक शबीना खातून ने कहा, जो बीज कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से मिला है उससे अन्य प्रजातियों की अपेक्षा उत्पादन अधिक होने की संभावना है। यहां 25 किसानों के प्रक्षेत्र पर यह प्रजाति लगी है। कार्यक्रम में केवीके के अध्यक्ष डॉ. बीपी शाही, डॉ. पंकज कुमार सिंह, अमन कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।
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फसल सुरक्षा और देखभाल
वैज्ञानिकों ने किसानों को छोटे कीटों के लिए इमिडाक्लोरोपिड या डाईमेथोएट और सफेद रतुआ के लिए मेटालेक्सिल व मेन्कोजेब के छिड़काव की सलाह दी। यह भी सलाह दी कि फसल कमजोर दिखने पर हल्की यूरिया डालें। नमी बनाए रखने से उत्पादन बढ़ता है। इस प्रक्षेत्र दिवस में लगभग 55-65 किसानों और महिला किसानों ने भाग लिया।
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