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Ayodhya News: दीपोत्सव में 34 हजार स्वयंसेवक संभालेंगे घाटों की कमान
Fri, 11 Sep 2026 11:20 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Fri, 11 Sep 2026 11:20 PM IST
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अयोध्या। दीपोत्सव में रामनगरी के घाटों पर दीपों की कतार सजाने के साथ व्यवस्था संभालने के लिए इस बार तकनीक और समयबद्धता पर विशेष जोर रहेगा। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय ने करीब 34 हजार से अधिक स्वयंसेवकों को आयोजन से जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। स्वयंसेवकों का ऑनलाइन पंजीकरण कर डाटा बेस तैयार किया जाएगा। वहीं, घाटों को सेक्टरों में बांटकर व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
कौटिल्य प्रशासनिक भवन में दीपोत्सव की तैयारियों को लेकर कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में संबद्ध महाविद्यालयों और माध्यमिक विद्यालयों के प्राचार्यों व प्रतिनिधियों के साथ तैयारियों पर चर्चा की गई। कुलपति ने कहा कि इतने बड़े आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी विभागों और संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए तैयारियों को समय से पूरा करने पर जोर दिया गया। बैठक में नोडल अधिकारी प्रो. एसएस मिश्र, साकेत महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. दानपति तिवारी समेत विभिन्न महाविद्यालयों और विद्यालयों के प्राचार्य व प्रतिनिधि मौजूद रहे।
इनसेट-
ऑनलाइन पंजीकरण के बाद तय होगी जिम्मेदारी
दीपोत्सव में शामिल होने वाले करीब 34 हजार स्वयंसेवकों का ऑनलाइन डाटा तैयार होगा। विश्वविद्यालय स्तर से पंजीकरण प्रक्रिया को जल्द पूरा कर सूची अंतिम रूप देने की तैयारी है। इसके बाद स्वयंसेवकों को घाटों और निर्धारित सेक्टर के अनुसार जिम्मेदारी दी जाएगी। घाटों के सेक्टरवार विभाजन से भीड़ प्रबंधन और व्यवस्थाओं की निगरानी को आसान बनाने की योजना है।
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इनसेट-
पानी, सफाई और आवागमन पर भी फोकस
घाटों पर स्वयंसेवकों के लिए पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था, स्वच्छता और कूड़ा निस्तारण के लिए डस्टबिन उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई। स्वयंसेवकों के सुरक्षित आवागमन के लिए वाहनों की व्यवस्था की जाएगी। आयोजन के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए संबंधित संस्थानों को पहले से जिम्मेदारियां सौंपने की तैयारी है।
इनसेट-
छोटे बच्चों को नहीं बनाया जाएगा स्वयंसेवक
दीपोत्सव में सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर विश्वविद्यालय ने स्पष्ट रुख अपनाया है। जिला प्रशासन के सहयोग और शासन के निर्देशों के तहत छोटे बच्चों को किसी भी स्थिति में स्वयंसेवक नहीं बनाया जाएगा। आयोजन में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
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कौटिल्य प्रशासनिक भवन में दीपोत्सव की तैयारियों को लेकर कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में संबद्ध महाविद्यालयों और माध्यमिक विद्यालयों के प्राचार्यों व प्रतिनिधियों के साथ तैयारियों पर चर्चा की गई। कुलपति ने कहा कि इतने बड़े आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी विभागों और संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए तैयारियों को समय से पूरा करने पर जोर दिया गया। बैठक में नोडल अधिकारी प्रो. एसएस मिश्र, साकेत महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. दानपति तिवारी समेत विभिन्न महाविद्यालयों और विद्यालयों के प्राचार्य व प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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ऑनलाइन पंजीकरण के बाद तय होगी जिम्मेदारी
दीपोत्सव में शामिल होने वाले करीब 34 हजार स्वयंसेवकों का ऑनलाइन डाटा तैयार होगा। विश्वविद्यालय स्तर से पंजीकरण प्रक्रिया को जल्द पूरा कर सूची अंतिम रूप देने की तैयारी है। इसके बाद स्वयंसेवकों को घाटों और निर्धारित सेक्टर के अनुसार जिम्मेदारी दी जाएगी। घाटों के सेक्टरवार विभाजन से भीड़ प्रबंधन और व्यवस्थाओं की निगरानी को आसान बनाने की योजना है।
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पानी, सफाई और आवागमन पर भी फोकस
घाटों पर स्वयंसेवकों के लिए पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था, स्वच्छता और कूड़ा निस्तारण के लिए डस्टबिन उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई। स्वयंसेवकों के सुरक्षित आवागमन के लिए वाहनों की व्यवस्था की जाएगी। आयोजन के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए संबंधित संस्थानों को पहले से जिम्मेदारियां सौंपने की तैयारी है।
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छोटे बच्चों को नहीं बनाया जाएगा स्वयंसेवक
दीपोत्सव में सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर विश्वविद्यालय ने स्पष्ट रुख अपनाया है। जिला प्रशासन के सहयोग और शासन के निर्देशों के तहत छोटे बच्चों को किसी भी स्थिति में स्वयंसेवक नहीं बनाया जाएगा। आयोजन में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।