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उत्तर प्रदेश: अयोध्या के विकास में उजड़ जाएंगे 20 हजार से ज्यादा परिवार, मुआवजे और सरकारी दावों के बाद भी रोजगार का संकट

Tue, 09 Nov 2021 04:12 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अयोध्या से लौटकर
अमित शर्मा, अयोध्या से लौटकर Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 09 Nov 2021 04:12 PM IST
सार

दशरथ महल के ठीक सामने ‘रहमान की दुकान’ है। कोरोना काल में रहमान का देहावसान हो चुका है और अब उनके बेटे इस दुकान को चलाते हैं। उन्होंने अमर उजाला को बताया कि उनका परिवार पीढ़ियों से दशरथ महल के सामने पूजा-सामग्री बेचकर अपनी आजीविका चलाता आया है। अब जिला प्रशासन ने उन्हें दुकान खाली करने का नोटिस दे दिया है। अब उनके सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो सकता है...

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Ayodhya is being renovated by Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust and Uttar Pradesh ुovernment
अयोध्या मे चल रहा निर्माण कार्य - फोटो : Amar Ujala (File Photo)

विस्तार

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की ओर से अयोध्या का रंग रूप बदला जा रहा है। रामलला की जन्मभूमि, राम से जुड़े अन्य धार्मिक स्थलों के साथ पूरे अयोध्या शहर में मूलभूत ढांचे का विकास किया जा रहा है। रेलवे स्टेशन, सड़कों का चौड़ीकरण, आध्यात्मिक ध्यान केंद्रों, होटलों और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास के साथ भगवान राम के जन्मस्थल को आधुनिक त्रेतायुग की अयोध्या के रूप में पेश करने की तैयारी है। यूपी सरकार का दावा है कि इससे अयोध्या का न केवल आध्यात्मिक विकास होगा, बल्कि यहां रोजगार के भारी अवसर भी पैदा होंगे। लेकिन इसी विकास के दावों के बीच अयोध्या के 20 हजार से ज्यादा परिवारों के हमेशा-हमेशा के लिए उजड़ने का खतरा भी पैदा हो गया है जो रामनगरी में कई पीढ़ियों से रहते चले आए हैं।

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सड़क किनारे बने मकान और दुकान होंगे ध्वस्त

दरअसल, सरकार की योजना है कि शुरुआती दौर में ही अयोध्या में रोजाना कम से कम एक लाख देशी-विदेशी धार्मिक पर्यटक आएं। इतनी भारी संख्या में पर्यटकों के आने-जाने के लिए अयोध्या की सड़कों को चौड़ा करने का काम किया जा रहा है। सरयू घाट राम की पैड़ी से अयोध्या रेलवे स्टेशन के लिए जाने वाले मुख्य मार्ग को चौड़ाकर 45 फीट तक किए जाने की योजना है। इसी तरह इस मुख्य मार्ग से हनुमानगढ़ी और दशरथ महल होते हुए भगवान राम के जन्मस्थल तक जाने वाले मुख्य मार्ग की चौड़ाई भी बढ़ाई जा रही है।

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मुख्य मार्गों के चौड़ीकरण से इसके दोनों किनारों पर बनी दुकानों और घरों को तोड़ना पड़ेगा। इससे इन दुकानदारों की रोजी-रोटी हमेशा के लिए उजड़ जाने का खतरा पैदा हो गया है। जिला प्रशासन की तरफ से इन दुकानदारों-निवासियों को नोटिस थमा दिया गया है। लेकिन इन दुकानदारों की मांग है कि उन्हें उजाड़ने से पहले उनके लिए रोजगार की उपयुक्त व्यवस्था की जानी चाहिए। इसके लिए वे कई बार विरोध प्रदर्शन भी कर चुके हैं, लेकिन अब तक सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी है।
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हनुमानगढ़ी से रामलला के जन्मस्थल जाने के बीच में दशरथ महल पड़ता है। इस दशरथ महल के संत अमरदास ने अमर उजाला को बताया कि महल के सामने की सड़कों पर संस्थान की दुकानें हैं। इन दुकानों को किराए पर देने से हुई आय से ही दशरथ महल का खर्च चलाया जाता है। लेकिन दुकानों को उजाड़ दिये जाने से मंदिर के चलाने के लिए भी संकट पैदा हो सकता है।

अमरदास ने कहा कि योगी आदित्यनाथ सरकार ने सड़कों को चौड़ा करने के लिए मार्ग में आने वाली सभी दुकानों-घरों के लोगों को भारी मुआवजा दिया है। आज के बाजार की कीमत से कई गुना ज्यादा कीमत देकर लोगों को संतुष्ट करने की कोशिश की गई है। लेकिन यह मुआवजा किसी संस्थान या परिवार के लिए हमेशा के लिए कमाई का जरिया नहीं हो सकता है। प्रशासन को उन्हें कोई विकल्प उपलब्ध कराना चाहिए।

दशरथ महल के ठीक सामने ‘रहमान की दुकान’ यहां आने-जाने वालों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होती है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि एक हिंदू धर्मस्थल के बाहर मुस्लिम समुदाय के रहमान की दुकान इस क्षेत्र की सबसे पहली दुकान हुआ करती थी। कोरोना काल में रहमान का देहावसान हो चुका है और अब उनके बेटे इस दुकान को चलाते हैं। उन्होंने अमर उजाला को बताया कि उनका परिवार पीढ़ियों से दशरथ महल के सामने पूजा-सामग्री बेचकर अपनी आजीविका चलाता आया है। अब जिला प्रशासन ने उन्हें दुकान खाली करने का नोटिस दे दिया है। अब उनके सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो सकता है।

इसी तरह हनुमान गढ़ी मंदिर के ठीक सामने के मार्ग पर पूजा-पाठ की सामग्री बेचने की दुकान कर रहे केशवप्रसाद उपाध्याय ने अमर उजाला से कहा कि प्रशासन ने दुकानों को हटाने के लिए उन्हें पर्याप्त मुआवजा दिया है। आज के बाजार मूल्य से दो से तीन गुना ज्यादा मुआवजा दिया गया है। इतनी भारी कीमत की उम्मीद उन्होंने या उनके जैसे हजारों दुकानदारों ने नहीं की थी। लेकिन यह मुआवजा कुछ ही दिनों में समाप्त हो जाने वाला है। उसके बाद उनके परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो जाएगा।

केशवप्रसाद ने बताया कि उनके जैसे तमाम दुकानदार चाहते हैं कि मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन मिलकर कोई ऐसी योजना तैयार करें, जिसमें उनके जैसे हजारों परिवारों की रोजी-रोटी को उजड़ने से बचाया जा सके। इसके लिए मंदिर के आसपास कहीं बाजार बसाने और उसमें दुकानें आवंटित करने जैसे विकल्पों को आजमाया जा सकता है। इस सुझाव के बाद भी अब तक प्रशासन ने इस पर कोई हामी नहीं भरी है।     

क्या-क्या किए जा रहे हैं उपाय...

विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता डॉ. सुरेंद्र जैन ने अमर उजाला से कहा कि भगवान राम का आदर्श रहा है कि उनके राज्य में समाज के सबसे निचले स्तर के अंतिम व्यक्ति को भी किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। अयोध्या के विकास के दौरान भी राममंदिर ट्रस्ट ने इसी भावना के अनुरूप काम किया है। सड़कों के विकास में जिन लोगों की दुकानें-भवन लिए जा रहे हैं, उन्हें बाजार मूल्य से कई गुना ज्यादा बढ़ाकर मुआवजा दिया जा चुका है। वे इन पैसों से अपने लिए किसी भी अच्छी जगह पर अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। इसके बाद भी, यदि कोई व्यक्ति अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए कर्ज लेना चाहे तो उसे बेहद सस्ती दरों पर कर्ज उपलब्ध कराया जा रहा है।  



डॉ. सुरेंद्र जैन ने बताया कि भगवान राम के जन्मस्थान के मूल मंदिर के विकास का क्षेत्र बढ़ा दिया गया है। इसके कारण आसपास के कई भवनों को इसके अंदर लेना पड़ रहा है। लेकिन इसके लिए उन सभी परिवारों से सहमति लेकर, उन्हें बाजार मूल्य से कई गुना मुआवजा देकर, इन जगहों पर निर्माण कार्य चल रहा है। इसके साथ ही, जिन लोगों के घरों को लिया जा रहा है, जिला प्रशासन के द्वारा उनकी मनचाही जगह पर उन्हें आवास भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

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