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जायद की फसलों का सिकुड़ रहा दायरा

Sun, 12 Jun 2016 11:59 PM IST
Auraiya, Uttar pradesh, India
Auraiya, Uttar pradesh, India Updated Sun, 12 Jun 2016 11:59 PM IST
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Zayed shrinking scope of Zayed crops
कृषि निदेशक - फोटो : amarujala
 रबी व खरीफ सीजन की फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के फेर में जायद की फसलों का रकबा घटने लगा है। कुछ साल पहले तकरीबन एक चौथाई कृषि भूमि पर जायद की फसलें बोई जाती थीं। अब ऐसा नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक जिले की 108700 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि के सापेक्ष 105000 हेक्टेयर भूमि पर रबी के सीजन में बुवाई होती है। 97954 हेक्टेयर भूमि पर खरीफ की फसलें बोई जाती हैं। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के साथ ही जिला स्तर पर भी सरकारी विभाग और गैर सरकारी स्वयं सेवी संस्थाएं रबी और खरीफ की फसलों के अधिक उत्पादन को लेकर प्रयासरत हैं।
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इन फसलों को बढ़ावा देने में जायद की फसलों की किसान अनदेखी करने लगे। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो 70 के दशक में जिले में 30 हजार हेक्टेयर भूमि पर जायद की मक्का, मूंग, उर्द, मूंगफली व सब्जियों का उत्पादन किया जाता था। 80 के दशक में जनसंख्या घनत्व के साथ संकुचित हुई कृषि भूमि के कारण 957 हेक्टेयर क्षेत्र में जायद फसलों की बुवाई प्रभावित हुई। 90 के दशक में 27750 हेक्टेयर भूमि तो वर्ष 2000 से 2010 तक के बीच जिले में लगातार भूगर्भ जल के दोहन से रबी व खरीफ सीजन की फसलों के साथ जायद की फसलों के रकबा में भारी गिरावट दर्ज की गई। इस दशक में जायद की फसलों का उत्पादन परिक्षेत्र 23000 हेक्टेयर भूमि तक सीमित रह गया।
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2010 के दशक से लेकर अब तक जायद की सीजन में सब्जियों के उत्पादन का जिम्मा उद्यान विभाग को दे दिया गया। वर्ष 2015-16 में जिले की कुल कृषि भूमि के सापेक्ष 9478 हेक्टेयर भूमि पर जायद सीजन की फसलों का उत्पादन किया गया। वहीं साल 2016-17 के लिए जायद की सीजन में जिले को 10754 हेक्टेयर कृषि भूमि पर फसलों के उत्पादन का लक्ष्य दिया गया।
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पानी का संकट बना वजह
जिले में जायद की फसलों के उत्पादन का दायरा घट रहा है। इसको लेकर कृषि नीति का कमजोर होना भी बताया जा रहा है। इन परिस्थितियों के बावजूद कृषि विभाग के जानकार जायद फसली क्षेत्र के सिकुड़ने की प्रमुख वजह इस सीजन में सिंचाई के लिए पानी की समस्या को बता रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले दो-तीन दशकों से जिले में  गिरे भू-गर्भ जलस्तर से फसलों को जरूरत के समय पानी नहीं मिल पाता है। सूखी नहरों, बंबों व रजवाहों के कारण किसान जायद की फसलों की बुवाई से कतराते हैं।

रिकार्ड से खाली है कृषि विभाग का पिटारा
 जिले में लचर कृषि नीति और जिम्मेदारों की नजरअंदाजी से कृषि विभाग ने जायद सीजन की फसलों को लेकर रिकार्ड बनाना भी बंद कर दिया।  उपनिदेशक कृषि केे दफ्तर में जायद की फसलों के आच्छादन, लक्ष्य व  उत्पादन का आंकड़ा ही नहीं है।


सभी फसलों के उत्पादन को लेकर पूरा ख्याल रखा जा रहा है। जायद सीजन की फसलों का उत्पादन क्षेत्र घटने का जलवायु परिवर्तन प्रमुख कारण है। जायद सीजन की फसलों का रकबा बढ़ाने के लिए गोष्ठी के माध्यम से किसानाें को जागरूक किया जाता है।
                डा. बनारसी यादव
                डीडी कृषि
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