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Auraiya News: मुकरे गवाह, आरोपी दोषमुक्त, एससी-एसटी में मिली आर्थिक सहायता होगी वापस

Sun, 26 Apr 2026 12:23 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया Updated Sun, 26 Apr 2026 12:23 AM IST
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Witnesses turned hostile, accused acquitted, SC-ST financial assistance will be returned
औरैया। विशेष न्यायाधीश विकास गोस्वामी ने नौ साल पुराने मामले में एक आरोपी वीरू को दोषमुक्त कर दिया।
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खास बात यह है कि मुख्य गवाह और खुद वादी ही अदालत में अपने बयानों से पलट गए, जिसके बाद जज ने वादी के खिलाफ ही कानूनी कार्रवाई के आदेश दे दिए हैं। कोर्ट ने एससी-एसटी में मिली आर्थिक सहायता वापस लेने के निर्देश भी दिए हैं।
दिबियापुर थाना क्षेत्र के गांव लछियामऊ में 2017 को घटना हुई थी। मामला 21 अप्रैल का है। वादी धर्मेंद्र कुमार ने तहरीर दी थी कि दिबियापुर थाना क्षेत्र के गांव लछियामऊ निवासी भाई अजय खेत की रखवाली कर रहा था। आरोप था कि वीरू यादव की भैंसों ने फसल को नुकसान पहुंचाया और जब अजय ने इसका विरोध किया तो वीरू ने तमंचे की बट से उसके सिर पर वार कर दिया। साथ ही जातिसूचक शब्द भी कहे। पुलिस ने मारपीट व एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था।
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उधर, बृहस्पतिवार को कोर्ट में सुनवाई के दौरान सभी चौंक गए। वादी धर्मेंद्र कुमार कहा कि उसे मारपीट की कोई जानकारी नहीं है और वह घटना के समय घर पर था। घटना में घायल अजय कुमार भी कोर्ट में वीरू यादव को पहचानने से मुकर गया। उसने कहा कि मारपीट कुछ लोगों ने की थी। वहीं खेत का मालिक विनोद कुमार भी अपनी बात से पलट गया। अदालत ने पाया कि डॉक्टर ने अजय को आई चोटों की पुष्टि की थी, लेकिन गवाहों के मुकरने के कारण यह साबित नहीं हो सका कि चोटें आरोपी वीरू यादव ने ही पहुंचाई थीं।
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विशेष न्यायाधीश विकास गोस्वामी ने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन अपना मामला साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। अदालत ने इस बात पर गंभीर आपत्ति जताई कि वादी धर्मेंद्र ने पहले मुकदमा दर्ज कराया और फिर शपथ लेने के बाद अदालत में झूठ बोला। कोर्ट ने आदेश दिया कि वादी धर्मेंद्र कुमार के खिलाफ झूठी गवाही के तहत अलग से मामला दर्ज कर नोटिस जारी किया जाए।

वहीं, विशेष न्यायाधीश विकास गोस्वामी ने डीएम को आदेशित किया है कि यदि पीड़ित को एससी-एसटी एक्ट के तहत कोई आर्थिक सरकारी सहायता मिली है तो उसे तत्काल वापस वसूला जाए। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि किसी को मात्र संदेह के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती लेकिन कानून का दुरुपयोग करने वालों को भी बख्शा नहीं जाएगा।
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