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Auraiya News: मेडिकल कॉलेज आएं तो पानी की बोतल साथ लाएं
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औरैया। अगर आप मरीज के संग मेडिकल कॉलेज चिचौली जा रहे हैं तो ठंडे पानी की बोतल संग लेकर जाएं, वरना वहां पर इस भीषण गर्मी में गला तर करने के लिए शीतल जल ढूंढते रह जाएंगे।
ऐसा नहीं है कि वहां वाटर कूलर लगे नहीं, मगर वो शीतल के बजाए गर्म पानी उगल रहे हैं। बुधवार रात मेडिकल कॉलेज में मरीजों के संग आए तीमारदार कुछ ऐसी ही दुश्वारियों से जूझ रहे थे। हालांकि, लोग प्यास बुझाने को मजबूरन कैंट्रीन से सील बंद चिल्ड पानी की बोतल खरीदने को विवश हैं। महज पानी की प्यास बुझाते हुए कैंटीन संचालक मोटी रकम सीधी कर रहा है। शायद मेडिकल कॉलेज प्रशासन को इसकी भनक नहीं है।
औरैया-दिबियापुर मार्ग पर बने 100 शैया जिला चिकित्सालय की बिल्डिंग में आने वाले मरीजों एवं तीमारदारों को पेयजल की बेहतर सुविधाएं मिलें, इसके लिए यहां पर जलापूर्ति के इंतजाम किए गए। दो वाटर कूलर लगाए गए हैं। शुरुआती दौर में तो यहां पर लगे वाटर कूलर के ठंडे पानी से तीमारदारों ने खूब प्यास बुझाई, लेकिन इस बार गर्मी में ये वाटर कूलर ठंडा के बजाए गर्म पानी उगल रहे हैं। ऐसे में इस भीषण गर्मी में वाटर कूलर का पानी लोगों के गले उतर नहीं रहा है। मजबूरन लोग अस्पताल परिसर में कैंटीन से सीलबंद ठंडी पानी की बोतल खरीद रहे हैं। इस सब के बीच कैंटीन संचालक की पौबारह है। दिन तो दिन रात में भी पानी की खूब बोतलें बिक रही हैं।
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मरीजों का दर्द बढ़ा रही टूटी स्ट्रेचर व व्हीलचेयर
औरैया। मेडिकल कॉलेज चिचौली के इमरजेंसी वार्ड में स्ट्रेचर व व्हीलचेयर तो रखी है, मगर ये उपकरण सही से काम नहीं करते। स्ट्रेचर का पहिया टूटा है तो व्हीलचेयर की बैक भी गायब है। दोनों उपकरण को इलाज की जरुरत है। ऐसे में ये टूटे उपकरण यहां आने वाले मरीजों का दर्द बढ़ा रही हैं।
इमरजेंसी वार्ड में गंभीर रूप से घायलों के साथ-साथ एक्सरे से लेकर गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीज आते हैं। यहां के अस्पताल में स्ट्रेचर व व्हीलचेयर रखे हैं, मगर ये उपकरण मरीजों के इस्तेमाल के लायक नहीं हैं। स्ट्रेचर का एक पहिया गायब है। इससे मरीजों के गिरने का खतरा भी बना रहता है। व्हीलचेयर की हालत और भी दयनीय है। व्हीलचेयर की बैक गायब है। हालांकि, सपोर्ट बनाए रखने के लिए व्हीलचेयर बैक में पट्टियां बंधी हैं। इन टूटी व्हीलचेयर के प्रयोग से ज्यादा परिजन मरीज को गोद में या अन्य विकल्पों की मदद से इमरजेंसी वार्ड तक ले जाते हैं। ऐसे में अगर किसी दिव्यांग व अन्य व्यक्ति को व्हीलचेयर की मदद से पहली या दूसरी मंजिल पर जाना पड़े तो कोई चुनौती से कम नहीं है।
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लिफ्ट खराब, सीढ़ियां चढ़ने में हांफ रहीं गर्भवती महिलाओं की सांसें
औरैया। मेडिकल कॉलेज अव्यवस्थाओं के रोग से खुद बीमार है। यहां पर 100 बेड की बिल्डिंग में लगी लिफ्ट काफी समय से बंद है। जिस कारण गर्भवती महिलाओं को सीढ़ियां चढ़ने में सांसें उखड़ रही हैं। इससे कभी भी कोई अनहोनी होने की आशंका बनी रहती है। हालांकि, बिल्डिंग में रोप बना है। जानकार लोग ही स्ट्रेचर व व्हीलचेयर के जरिए मरीजों को दूसरे माले पर ले जा पाते हैं। जानकारी के अभाव में ज्यादातर मरीजों को सीढि़यों से ही चढ़ना पड़ता है।
बेहतर सुविधाएं देने के लिए महिला विंग की तीन मंजिला इमारत बनी है। दूसरे माले पर प्रसूताएं व गर्भवती महिलाएं आसानी से पहुंच सकें, इसलिए परिसर में लिफ्ट तो लगी है, लेकिन ये लिफ्ट काफी समय से बंद पड़ी है। ऐसे में तीमारदार प्रसूता और गर्भवती को कंधों के सहारे सीढ़ी चढ़ाकर ले जाने पर मजबूर हैं। अक्सर सीढ़ी चढ़ते समय गर्भवती महिलाओं की सांसें अटकी हैं, लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते गर्भवती महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अभी तक इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया है। खास बात तो यह है कि इस खामी को छुपाने के लिए जिम्मेदारों ने लिफ्ट गेट के बाहर सामान रखते हुए खुद का बचाव कर लिया है। न लोगों की नजर पड़ेगी और न ही लिफ्ट का मसला उठेगा। हालांकि, अधिकारियों की माने तो लिफ्ट की दुरुस्ती को लेकर पत्र लिखा गया है।
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13 दिसंबर 2024 के बाद से इमरजेंसी वार्ड में नहीं बदला ड्यूटी चार्ट
औरैया। मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में गंभीर रोगियों को फौरी तौर पर इलाज मिलता है। इसके लिए रोजाना शिफ्टवार डॉक्टर समेत अन्य स्टाफ की ड्यूटी भी लगाई जाती है। ताकि इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के संग तीमारदारों को यह पता चल सके कि इमरजेंसी वार्ड में कौन डॉक्टर व अन्य स्टाफ डयूटी पर है। अमर उजाला पड़ताल के दौरान जब कैमरे के सामने इमरजेंसी वार्ड के बाहर लगे ड्यूटी चार्ट आया तो चौकाने वाली बात सामने आई।
ड्यूटी चार्ट पर 13 दिसंबर 2024 के बाद से इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टर व अन्य स्टाफ की तैनाती का ड्यूटी चार्ट बदला नहीं गया था। अंकित तारीख 13 दिसंबर 2024 ही पड़ी है। नए साल में 17 फरवरी को मेडिकल कॉलेज में 20 बेड की इमरजेंसी सेवा शुरू की गई थी। आहिस्ता-आहिस्ता दो महीने हो चुके हैं। मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान शायद इस ड्यूटी चार्ट पर नजर ही नहीं पड़ी है।
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कैंपस के भवनों व संसाधनों को अपग्रेड करते हुए मेडिकल कॉलेज में तब्दील किया गया है। अभी भी तमाम कमियों को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। पहले फेज में काफी हद तक सुधार हुआ है। दूसरे फेज में स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर सुविधाओं पर फोकस किया जाएगा। इसके लिए शासन को पत्र लिखे जा रहे हैं। चाहे वाटर कूलर हो स्ट्रेचर, स्टाफ की कमी से लेकर तमाम बिंदुओं पर काम चल रहा है। -डॉ. पवन कुमार, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज
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ऐसा नहीं है कि वहां वाटर कूलर लगे नहीं, मगर वो शीतल के बजाए गर्म पानी उगल रहे हैं। बुधवार रात मेडिकल कॉलेज में मरीजों के संग आए तीमारदार कुछ ऐसी ही दुश्वारियों से जूझ रहे थे। हालांकि, लोग प्यास बुझाने को मजबूरन कैंट्रीन से सील बंद चिल्ड पानी की बोतल खरीदने को विवश हैं। महज पानी की प्यास बुझाते हुए कैंटीन संचालक मोटी रकम सीधी कर रहा है। शायद मेडिकल कॉलेज प्रशासन को इसकी भनक नहीं है।
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औरैया-दिबियापुर मार्ग पर बने 100 शैया जिला चिकित्सालय की बिल्डिंग में आने वाले मरीजों एवं तीमारदारों को पेयजल की बेहतर सुविधाएं मिलें, इसके लिए यहां पर जलापूर्ति के इंतजाम किए गए। दो वाटर कूलर लगाए गए हैं। शुरुआती दौर में तो यहां पर लगे वाटर कूलर के ठंडे पानी से तीमारदारों ने खूब प्यास बुझाई, लेकिन इस बार गर्मी में ये वाटर कूलर ठंडा के बजाए गर्म पानी उगल रहे हैं। ऐसे में इस भीषण गर्मी में वाटर कूलर का पानी लोगों के गले उतर नहीं रहा है। मजबूरन लोग अस्पताल परिसर में कैंटीन से सीलबंद ठंडी पानी की बोतल खरीद रहे हैं। इस सब के बीच कैंटीन संचालक की पौबारह है। दिन तो दिन रात में भी पानी की खूब बोतलें बिक रही हैं।
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मरीजों का दर्द बढ़ा रही टूटी स्ट्रेचर व व्हीलचेयर
औरैया। मेडिकल कॉलेज चिचौली के इमरजेंसी वार्ड में स्ट्रेचर व व्हीलचेयर तो रखी है, मगर ये उपकरण सही से काम नहीं करते। स्ट्रेचर का पहिया टूटा है तो व्हीलचेयर की बैक भी गायब है। दोनों उपकरण को इलाज की जरुरत है। ऐसे में ये टूटे उपकरण यहां आने वाले मरीजों का दर्द बढ़ा रही हैं।
इमरजेंसी वार्ड में गंभीर रूप से घायलों के साथ-साथ एक्सरे से लेकर गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीज आते हैं। यहां के अस्पताल में स्ट्रेचर व व्हीलचेयर रखे हैं, मगर ये उपकरण मरीजों के इस्तेमाल के लायक नहीं हैं। स्ट्रेचर का एक पहिया गायब है। इससे मरीजों के गिरने का खतरा भी बना रहता है। व्हीलचेयर की हालत और भी दयनीय है। व्हीलचेयर की बैक गायब है। हालांकि, सपोर्ट बनाए रखने के लिए व्हीलचेयर बैक में पट्टियां बंधी हैं। इन टूटी व्हीलचेयर के प्रयोग से ज्यादा परिजन मरीज को गोद में या अन्य विकल्पों की मदद से इमरजेंसी वार्ड तक ले जाते हैं। ऐसे में अगर किसी दिव्यांग व अन्य व्यक्ति को व्हीलचेयर की मदद से पहली या दूसरी मंजिल पर जाना पड़े तो कोई चुनौती से कम नहीं है।
लिफ्ट खराब, सीढ़ियां चढ़ने में हांफ रहीं गर्भवती महिलाओं की सांसें
औरैया। मेडिकल कॉलेज अव्यवस्थाओं के रोग से खुद बीमार है। यहां पर 100 बेड की बिल्डिंग में लगी लिफ्ट काफी समय से बंद है। जिस कारण गर्भवती महिलाओं को सीढ़ियां चढ़ने में सांसें उखड़ रही हैं। इससे कभी भी कोई अनहोनी होने की आशंका बनी रहती है। हालांकि, बिल्डिंग में रोप बना है। जानकार लोग ही स्ट्रेचर व व्हीलचेयर के जरिए मरीजों को दूसरे माले पर ले जा पाते हैं। जानकारी के अभाव में ज्यादातर मरीजों को सीढि़यों से ही चढ़ना पड़ता है।
बेहतर सुविधाएं देने के लिए महिला विंग की तीन मंजिला इमारत बनी है। दूसरे माले पर प्रसूताएं व गर्भवती महिलाएं आसानी से पहुंच सकें, इसलिए परिसर में लिफ्ट तो लगी है, लेकिन ये लिफ्ट काफी समय से बंद पड़ी है। ऐसे में तीमारदार प्रसूता और गर्भवती को कंधों के सहारे सीढ़ी चढ़ाकर ले जाने पर मजबूर हैं। अक्सर सीढ़ी चढ़ते समय गर्भवती महिलाओं की सांसें अटकी हैं, लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते गर्भवती महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अभी तक इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया है। खास बात तो यह है कि इस खामी को छुपाने के लिए जिम्मेदारों ने लिफ्ट गेट के बाहर सामान रखते हुए खुद का बचाव कर लिया है। न लोगों की नजर पड़ेगी और न ही लिफ्ट का मसला उठेगा। हालांकि, अधिकारियों की माने तो लिफ्ट की दुरुस्ती को लेकर पत्र लिखा गया है।
13 दिसंबर 2024 के बाद से इमरजेंसी वार्ड में नहीं बदला ड्यूटी चार्ट
औरैया। मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में गंभीर रोगियों को फौरी तौर पर इलाज मिलता है। इसके लिए रोजाना शिफ्टवार डॉक्टर समेत अन्य स्टाफ की ड्यूटी भी लगाई जाती है। ताकि इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के संग तीमारदारों को यह पता चल सके कि इमरजेंसी वार्ड में कौन डॉक्टर व अन्य स्टाफ डयूटी पर है। अमर उजाला पड़ताल के दौरान जब कैमरे के सामने इमरजेंसी वार्ड के बाहर लगे ड्यूटी चार्ट आया तो चौकाने वाली बात सामने आई।
ड्यूटी चार्ट पर 13 दिसंबर 2024 के बाद से इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टर व अन्य स्टाफ की तैनाती का ड्यूटी चार्ट बदला नहीं गया था। अंकित तारीख 13 दिसंबर 2024 ही पड़ी है। नए साल में 17 फरवरी को मेडिकल कॉलेज में 20 बेड की इमरजेंसी सेवा शुरू की गई थी। आहिस्ता-आहिस्ता दो महीने हो चुके हैं। मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान शायद इस ड्यूटी चार्ट पर नजर ही नहीं पड़ी है।
कैंपस के भवनों व संसाधनों को अपग्रेड करते हुए मेडिकल कॉलेज में तब्दील किया गया है। अभी भी तमाम कमियों को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। पहले फेज में काफी हद तक सुधार हुआ है। दूसरे फेज में स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर सुविधाओं पर फोकस किया जाएगा। इसके लिए शासन को पत्र लिखे जा रहे हैं। चाहे वाटर कूलर हो स्ट्रेचर, स्टाफ की कमी से लेकर तमाम बिंदुओं पर काम चल रहा है। -डॉ. पवन कुमार, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज