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नए प्रधान और नए प्रभारी: भाजपा-कांग्रेस ने बदले प्रदेश अध्यक्ष और इंचार्ज, अब चुनावी रण में परीक्षा की बारी
Sun, 04 Oct 2026 10:30 AM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: Sharukh Khan
Updated Sun, 04 Oct 2026 10:30 AM IST
सार
भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले प्रधान और प्रभारी बदल दिए हैं। अब 2027 के रण में नई जोड़ी को दम दिखाना होगा। दोनों दलों के नए नेतृत्व के सामने संगठन को एकजुट कर बेहतर चुनावी प्रदर्शन की चुनौती होगी।
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BJP and Congress
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने अपने-अपने प्रदेश प्रभारियों और प्रधानों को बदल दिया है। हाल ही में भाजपा ने डॉ. सतीश पूनिया को नया प्रभारी और केवल सिंह ढिल्लों को नया प्रधान बनाया है। इसी तरह कांग्रेस ने भी बदलाव करते हुए सचिन पायलट को प्रभारी और ओलंपियन परगट सिंह को नया सूबा प्रधान बनाया है।
दोनों दलों की दोनों जोड़ियों के समक्ष अब 2027 के चुनावी रण में दम दिखाने की बड़ी चुनौती होगी। पंजाब में भाजपा इस बार बार-बार अकेले दम पर चुनाव लड़ने का एलान कर रही है। हालांकि, इस बीच शिरोमणि अकाली दल के साथ पार्टी के गठबंधन की अटकलें भी लगातार जारी हैं।
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दोनों दलों की दोनों जोड़ियों के समक्ष अब 2027 के चुनावी रण में दम दिखाने की बड़ी चुनौती होगी। पंजाब में भाजपा इस बार बार-बार अकेले दम पर चुनाव लड़ने का एलान कर रही है। हालांकि, इस बीच शिरोमणि अकाली दल के साथ पार्टी के गठबंधन की अटकलें भी लगातार जारी हैं।
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फिलहाल इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है लेकिन सियासी जमीनी हकीकत को भांपते हुए भाजपा आगे बढ़ रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, भाजपा को पंजाब में किसी से गठबंधन की जरूरत है या नहीं, इस पर अंतिम फैसला भाजपा के नए प्रभारी और प्रधान की समीक्षा के बाद ही होगा।
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ऐसे में यह भी प्रधान और प्रभारी के लिए बड़ी जिम्मेदारी है क्योंकि यह फैसला पंजाब में भाजपा की चुनावी रणनीति का बड़ा आधार बनेगा। 2027 के विधानसभा चुनाव में पंजाब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया की भूमिका संगठन और चुनावी रणनीति के दो अहम हिस्सों के रूप में होगी।
ढिल्लों के सामने प्रदेश संगठन को चुनावी मोड में लाने, जिला और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, पुराने-नए नेताओं के बीच तालमेल बनाने और सभी 117 सीटों पर मजबूत स्थानीय नेतृत्व तैयार करने की जिम्मेदारी है।
पिछले दिनों हुई बैठकों में जिला स्तर के पदाधिकारियों की चुनावी जिम्मेदारियां तय की गई हैं। वहीं, पूनिया केंद्रीय नेतृत्व के प्रतिनिधि के तौर पर रणनीति, संगठन की समीक्षा, बूथ प्रबंधन और चुनावी रोडमैप पर नजर रखेंगे। उन्होंने 117 सीटों पर पार्टी के अपने दम पर चुनाव लड़ने की बात कही है।
पायलट-परगट की चुनौतियां भी कम नहीं
पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट और प्रदेशाध्यक्ष परगट सिंह के सामने सबसे पहली चुनौती पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रही खींचतान को खत्म कर वरिष्ठ नेताओं को एक मंच पर लाने की होगी। पायलट के समक्ष चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के दावेदारों के बीच संतुलन बनाना भी कम चुनौती नहीं है। हालांकि, पायलट संकेत दे चुके हैं कि पहले सामूहिक रूप से चुनाव जीतना प्राथमिकता होगी और नेतृत्व का फैसला बाद में किया जाएगा।
पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट और प्रदेशाध्यक्ष परगट सिंह के सामने सबसे पहली चुनौती पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रही खींचतान को खत्म कर वरिष्ठ नेताओं को एक मंच पर लाने की होगी। पायलट के समक्ष चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के दावेदारों के बीच संतुलन बनाना भी कम चुनौती नहीं है। हालांकि, पायलट संकेत दे चुके हैं कि पहले सामूहिक रूप से चुनाव जीतना प्राथमिकता होगी और नेतृत्व का फैसला बाद में किया जाएगा।
दूसरी ओर, नए प्रधान परगट के सामने संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने, नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बनाने तथा टिकट वितरण में संतुलन की चुनौती होगी। पार्टी को मालवा, माझा और दोआबा, तीनों क्षेत्रों में मजबूत तालमेल बनाना होगा। इसके साथ ही वर्ष 2022 में 18 सीटों पर सिमटी कांग्रेस के लिए संगठनात्मक एकजुटता को सीटों में बदलना दोनों नेताओं की सबसे अहम चुनावी परीक्षा होगी।