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नहीं आई विसरा रिपोर्ट, तीन साल से न्याय की उम्मीद पर 32 परिवार
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विसरा रिपोर्ट का इंतजार : तीन साल से 32 परिवार को न्याय की आस
- प्रदेश के 75 जिलों के लिए सिर्फ तीन लैब, लंबित पड़ीं जांचे
अमर उजाला ब्यूरो
औरैया। जिले भर में पिछले तीन साल में लगभग 32 विसरा रिपोर्ट न आने से उनसे जुड़े परिवार आज भी न्याय के लिए भटकना पड़ रहा हैं। आलम यह है कि प्रदेश के 75 जिलों के लिए सिर्फ तीन लैब हैं। घटनाओं की संख्या अधिक होने के चलते भारी संख्या में जांचें लंबित पड़ी हैं। इससे न्याय की आस में बैठे परिजनों में भी आक्रोश व्याप्त है। हालांकि पुलिस अधिकारी विसरा की जांच रिपोर्ट में समय लगने की बात कह रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि जांच रिपोर्ट में हो रही देरी को देखते हुए और समय से रिपोर्ट तैयार कराने को लेकर शासन की ओर से भी मंडल स्तर पर एक-एक प्रयोगशाला बनाने की प्लानिंग की जा रही है।
हत्या की आशंका, जहर से होने वाली मौत, कीड़े से काटने से होने वाली मौत आदि के मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट न होने की स्थिति में पोस्टमार्टम विभाग की ओर से मृतक का विसरा सुरक्षित किया जाता है। जिसको पुलिस विभाग की तरफ से जांच के लिए लैब भेजकर उसकी जांच कराई जाती है। जिसमें मृतक के परिजनों को मिलने वाली जांच रिपोर्ट में मौत की वास्तविकता उजागर हो जाती है, अधिकांश मामलों में पीड़ित परिवार को न्याय भी मिल जाता है। अहम बात यह है कि पिछले तीन सालों में जिले भर से भेजे गए गईं 32 विसरा की जांचों में आज तक संबंधित थाना/कोतवाली को जांच रिपोर्ट प्राप्त नहीं हो सकी है। इससे इन मामलों से जुड़े पीड़ितों को आज तक न्याय नहीं मिल सका है। कई परिवार तो न्याय की उम्मीद ही छोड़ चुके हैं। ऐसे में उनमें पुलिस विभाग के प्रति आक्रोश भी व्याप्त है। ऐसे ही दो मामलों के पीड़ितों ने अमर उजाला से बात कर अपनी पीड़ा बयां करते हुए पुलिसिया व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
रिपोर्ट मिले तो आगे बढ़े कार्रवाई
केस 1
उम्र के 75 बसंत पार कर चुके प्रेम नारायण अग्निहोत्री के सामने जैसे ही उनके मृतक पुत्र श्याम जी का नाम आया तो उनकी आंखें भर आईं। बोले पुत्रवधू की हठधर्मिता के चलते उन्होंने अपना पुत्र खो दिया। बताया कि 13 सितंबर 2017 को उनके पुत्र की जीवनलीला समाप्त हो गई थी। इस प्रकरण में उन्होंने पुत्रवधू नीलम उर्फ रोली, उसका पिता अनिल तिवारी, भाई राहुल, बहन राजकुमारी व संतोष कुमार तिवारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें पुत्र के मौत का उन्हें जिम्मेदार ठहराया था। जिसमें जहर खाने का मामला दर्ज किया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट न होने के चलते विसरा सुरक्षित कर जांच के लिए भिजवाया गया था। लेकिन आज तक न तो रिपोर्ट ही आई और न ही उन्हें न्याय मिल सका।
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केस -2
शिक्षा अधिकारी के पद से रिटायर्ड हुए 72 वर्षीय नाथूराम दोहरे बताते हैं। उनके दो पुत्र थे। जिसमें दोनों पुत्र शिक्षा विभाग में कार्यरत हो गए। जिसमें दिल्ली बोर्ड में शिक्षक के पद पर तैनात पुत्र संजय की 17 फरवरी 2017 को मौत हो गई थी। संजय की ससुराल दिल्ली थी। सूचना मिली की उनके पुत्र संजय ने जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली है। इस मामले में उन्होंने पुत्रवधू अंजना दोहरे, अंजना की मां, अंजना के पिता मेवाराम, भाई नीतराज व चंद्रराज, बहन वंदना के अलावा विशाल व गज्जू के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। इस बीच उक्त लोगों ने हाईकोर्ट से बेल कराने का प्रयास किया लेकिन नहीं हो सकी। दो साल से भी ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन आज तक विसरा रिपोर्ट उन्हें प्राप्त नहीं हुई है। ऐसे में पुलिस की कार्यशैली कितनी तेज है इसका इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
इन थाना/कोतवाली से भेजे गए हैं विसरा के सैंपल---
थाना/कोतवाली का नाम भेजे गए सैंपल रिपोर्ट आनी शेष
सदर कोतवाली 28 16
कोतवाली अजीतमल 12 03
कोतवाली बिधूना 10 01
थाना अछल्दा 05 03
थाना दिबियापुर 18 05
थाना बेला 04 04
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बोले जिम्मेदार
पूरे प्रदेश में विसरा जांच के लिए लखनऊ, नोयडा और आगरा में लैब बनी हैं। विसरा की जांच होने में समय लगता है। फिर भी काफी जल्दी रिपोर्ट मंगाने का प्रयास किया जाता है। विसरा की जांच रिपोर्ट को समय से उपलब्ध कराए जाने को लेकर शासन की ओर से भी योजना तैयार की जा रही है। इसमें मंडल स्तर पर एक-एक लैब बनाए जाने की योजना है। शासन की यह योजना जब तक लागू नहीं होगी तब तक थोड़ा समय लगना संभव है। फिर भी संबंधित थाना/कोतवाली स्तर से जल्द रिपोर्ट मंगाने को लेकर लगातार पत्राचार किया जा रहा है।
कमलेश दीक्षित
एएसपी
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- प्रदेश के 75 जिलों के लिए सिर्फ तीन लैब, लंबित पड़ीं जांचे
अमर उजाला ब्यूरो
औरैया। जिले भर में पिछले तीन साल में लगभग 32 विसरा रिपोर्ट न आने से उनसे जुड़े परिवार आज भी न्याय के लिए भटकना पड़ रहा हैं। आलम यह है कि प्रदेश के 75 जिलों के लिए सिर्फ तीन लैब हैं। घटनाओं की संख्या अधिक होने के चलते भारी संख्या में जांचें लंबित पड़ी हैं। इससे न्याय की आस में बैठे परिजनों में भी आक्रोश व्याप्त है। हालांकि पुलिस अधिकारी विसरा की जांच रिपोर्ट में समय लगने की बात कह रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि जांच रिपोर्ट में हो रही देरी को देखते हुए और समय से रिपोर्ट तैयार कराने को लेकर शासन की ओर से भी मंडल स्तर पर एक-एक प्रयोगशाला बनाने की प्लानिंग की जा रही है।
हत्या की आशंका, जहर से होने वाली मौत, कीड़े से काटने से होने वाली मौत आदि के मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट न होने की स्थिति में पोस्टमार्टम विभाग की ओर से मृतक का विसरा सुरक्षित किया जाता है। जिसको पुलिस विभाग की तरफ से जांच के लिए लैब भेजकर उसकी जांच कराई जाती है। जिसमें मृतक के परिजनों को मिलने वाली जांच रिपोर्ट में मौत की वास्तविकता उजागर हो जाती है, अधिकांश मामलों में पीड़ित परिवार को न्याय भी मिल जाता है। अहम बात यह है कि पिछले तीन सालों में जिले भर से भेजे गए गईं 32 विसरा की जांचों में आज तक संबंधित थाना/कोतवाली को जांच रिपोर्ट प्राप्त नहीं हो सकी है। इससे इन मामलों से जुड़े पीड़ितों को आज तक न्याय नहीं मिल सका है। कई परिवार तो न्याय की उम्मीद ही छोड़ चुके हैं। ऐसे में उनमें पुलिस विभाग के प्रति आक्रोश भी व्याप्त है। ऐसे ही दो मामलों के पीड़ितों ने अमर उजाला से बात कर अपनी पीड़ा बयां करते हुए पुलिसिया व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
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रिपोर्ट मिले तो आगे बढ़े कार्रवाई
केस 1
उम्र के 75 बसंत पार कर चुके प्रेम नारायण अग्निहोत्री के सामने जैसे ही उनके मृतक पुत्र श्याम जी का नाम आया तो उनकी आंखें भर आईं। बोले पुत्रवधू की हठधर्मिता के चलते उन्होंने अपना पुत्र खो दिया। बताया कि 13 सितंबर 2017 को उनके पुत्र की जीवनलीला समाप्त हो गई थी। इस प्रकरण में उन्होंने पुत्रवधू नीलम उर्फ रोली, उसका पिता अनिल तिवारी, भाई राहुल, बहन राजकुमारी व संतोष कुमार तिवारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें पुत्र के मौत का उन्हें जिम्मेदार ठहराया था। जिसमें जहर खाने का मामला दर्ज किया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट न होने के चलते विसरा सुरक्षित कर जांच के लिए भिजवाया गया था। लेकिन आज तक न तो रिपोर्ट ही आई और न ही उन्हें न्याय मिल सका।
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केस -2
शिक्षा अधिकारी के पद से रिटायर्ड हुए 72 वर्षीय नाथूराम दोहरे बताते हैं। उनके दो पुत्र थे। जिसमें दोनों पुत्र शिक्षा विभाग में कार्यरत हो गए। जिसमें दिल्ली बोर्ड में शिक्षक के पद पर तैनात पुत्र संजय की 17 फरवरी 2017 को मौत हो गई थी। संजय की ससुराल दिल्ली थी। सूचना मिली की उनके पुत्र संजय ने जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली है। इस मामले में उन्होंने पुत्रवधू अंजना दोहरे, अंजना की मां, अंजना के पिता मेवाराम, भाई नीतराज व चंद्रराज, बहन वंदना के अलावा विशाल व गज्जू के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। इस बीच उक्त लोगों ने हाईकोर्ट से बेल कराने का प्रयास किया लेकिन नहीं हो सकी। दो साल से भी ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन आज तक विसरा रिपोर्ट उन्हें प्राप्त नहीं हुई है। ऐसे में पुलिस की कार्यशैली कितनी तेज है इसका इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
इन थाना/कोतवाली से भेजे गए हैं विसरा के सैंपल---
थाना/कोतवाली का नाम भेजे गए सैंपल रिपोर्ट आनी शेष
सदर कोतवाली 28 16
कोतवाली अजीतमल 12 03
कोतवाली बिधूना 10 01
थाना अछल्दा 05 03
थाना दिबियापुर 18 05
थाना बेला 04 04
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बोले जिम्मेदार
पूरे प्रदेश में विसरा जांच के लिए लखनऊ, नोयडा और आगरा में लैब बनी हैं। विसरा की जांच होने में समय लगता है। फिर भी काफी जल्दी रिपोर्ट मंगाने का प्रयास किया जाता है। विसरा की जांच रिपोर्ट को समय से उपलब्ध कराए जाने को लेकर शासन की ओर से भी योजना तैयार की जा रही है। इसमें मंडल स्तर पर एक-एक लैब बनाए जाने की योजना है। शासन की यह योजना जब तक लागू नहीं होगी तब तक थोड़ा समय लगना संभव है। फिर भी संबंधित थाना/कोतवाली स्तर से जल्द रिपोर्ट मंगाने को लेकर लगातार पत्राचार किया जा रहा है।
कमलेश दीक्षित
एएसपी