फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Auraiya News ›   Victory, of tenacity will devotee of goddess worship shailaputree

विजय, तप की देवी शैलपुत्री की भक्तकरेंगे आराधना

Tue, 13 Oct 2015 12:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, औरैया।
अमर उजाला ब्यूरो, औरैया। Updated Tue, 13 Oct 2015 12:59 AM IST
विज्ञापन
Victory, of tenacity will devotee of goddess worship shailaputree

शारदीय नवरात्र के लिए देवी मंदिरों में तैयारियां पूरी हैं। 13 अक्तूबर से शुरु हो रहे नवरात्र को लेकर मंदिरों की सजावट का काम जोरों पर चल रहा है। दुर्गा पूजा को महोत्सव के रूप में मनाने के लिए भक्त जुटे है। वहीं नवरात्र को लेकर सोमवार को शहर के बाजारों में भी रौनक दिखाई पड़ी।

विज्ञापन



 भक्तों ने मैय्या के पोशाक, चुनरी से लेकर घंटा-घड़ियाल और पूजा सामग्री की जमकर खरीदारी की। पूरे दिन बाजारों में देवी भक्तों की भीड़ जुटी रही। शारदीय नवरात्र की पूर्व संध्या पर देवी भक्तों ने खूब खरीदारी की। मंदिरों में नवरात्र पर्व को महोत्सव के रुप में मनाए जाने की तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं।
विज्ञापन


 इस बार बाजार में 100 रुपए से लेकर एक हजार रुपए तक के देवी मैय्या के पोशाक बाजार में हैं। मोतियों से जड़ी माता की चुनरी भी हजार रुपए में बिक रही है। वहीं बहुत से भक्तों ने टेलर की दुकानों पर आर्डर देकर माता की पोशाक बनवाई हैं। कई दिन से मंदिरों चल रहीं तैयारियों को अंतिम रुप दिया जा चुका है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मंगलवार से शहर के एक दर्जन से अधिक देवी मंदिरों में जयकारे गूंजने लगेंगे। इस बार देवी भक्तों ने दुर्गा पूजा को धूमधाम से मनाने के लिए बाहर से कलाकार बुलाए हैं, जो मंदिरों में भजन संध्या का कार्यक्रम आयोजित करेंगे।

नवरात्र अर्थात नौ पवित्र रातें। यह नौ रातें चैत्र, आश्विन शुक्ल पक्ष की आरंभिक नौ रातें होती हैं।

जब मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरुपों की आराधना की जाती है। आचार्य लक्ष्मी नारायन दुबे ने बताया कि नवरात्र की इन रातों को मुख्य रुप से तीन-तीन रातों में बांटा गया है। प्रथम तीन रातों में मां की आराधना दुर्गा काली के रुप में की जाती है।

फिर अगले तीन दिन मां की अर्चना लक्ष्मी के रुप में होती है, जिसे हम भौतिक, आध्यत्मिक संपत्ति की अर्चना करना कह सकते हैं। अंतिम तीन दिनों में उनका स्वरुप मां सरस्वती का होता है। सरस्वती यानी ज्ञान जो जीवन की संपूर्ण सफलता के लिए जरुरी है।

आचार्य जगदीश दीक्षित के अनुसार देवी की स्तुति, पूजन, विर्सजन, पाठ आदि सभी कार्य प्रात: काल में शुभ होते हैं। यदि घट स्थापना करने के बाद सूतक हो जाए, तो दोष नहीं माना गया हैं। मगर घट स्थापन से पहले सूतक हो जाए, तो पूजा नहीं करनी चाहिए। प्रतिपदा के दिन घर के समीप नौ प्रकार के अनाज बोने का भी विधान हैं।

अष्टमी व नवमी महातिथि मानी जाती है। इन दिनों में पारायण के बाद हवन कर कन्याओं को भोजन कराना चाहिए।
स्वच्छ दीवार पर सिंदूर से देवी का मुख, आकृति बना लें। शुद्ध चौकी पर माता दुर्गा की तस्वीर स्थापित करें। मिट्टी के कलश पर घी और सिंदूर का स्वास्तिक बना कर सजाए। देवी के दांयी ओर जौ बोएं और सामने हवनकुंड रखें।


नौ दिनों तक नित्य स्नान, ध्यान से देवी की पूजा करें। बताशा, नारियल व खीर का भोग लगाएं। दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। संपूर्ण फल के लिए अष्टमी, नवमी तिथि को अनिवार्य रुप से देवी का पूजन करें। माता की जोत जलाकर उसके दर्शन करने और कन्या को भोजन कराने से मनो कामनाएं पूरी होती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed