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Auraiya News: यूजीसी के विरोध में सवर्ण समाज व अधिवक्ताओं ने डीएम को सौंपा ज्ञापन

Fri, 30 Jan 2026 12:15 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 30 Jan 2026 12:15 AM IST
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Upper caste society and advocates submitted a memorandum to the DM in protest against UGC.
फोटो-22-यूजीसी के विरोध में डीएम को ज्ञापन सौंपते सवर्ण समाज के लोग।संवाद
औरैयाककोर। सवर्ण समाज के विभिन्न संगठनों व अधिवक्ताओं ने बृहस्पतिवार को जिला मुख्यालय पहुंचकर यूजीसी एक्ट के विरोध में डीएम डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी को ज्ञापन सौंपा। राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन में सरकार की नीतियों की आलोचना कर यूजीसी के नए नियमों को तत्काल रद्द करने की मांग की गई। ज्ञापन में शिक्षा व्यवस्था को संवैधानिक समानता की खुली अवहेलना करार दिया गया।
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बार एसोसिएशन अध्यक्ष इंद्रपाल भदौरिया, ब्राह्मण एकता परिषद के प्रदेश अध्यक्ष बृज किशोर तिवारी, कान्यकुब्ज ब्राह्मण महासभा के नीरज चौधरी, क्षत्रिय महासभा, राष्ट्रीय करणी सेना, चित्रांश सभा, वैश्य समाज व जन सामान्य मंच के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं की अगुवाई में दिए गए ज्ञापन में बताया कि यूजीसी की नीतियां सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और अभ्यर्थियों को सुनियोजित तरीके से हाशिये पर धकेल रही हैं।
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आरोप लगाया गया कि संविधान समान अवसर और योग्यता आधारित चयन की बात करता है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यूजीसी की नीतियां कागजों तक सीमित कर चुकी हैं। प्रवेश से लेकर शोध, फेलोशिप और अध्यापक नियुक्ति तक हर स्तर पर मेरिट को दरकिनार कर दिया गया है। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी सीमित सीटों के लिए असमान और असहनीय प्रतिस्पर्धा झेलने के लिए मजबूर हैं। आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए बनाई गई यह व्यवस्था न तो प्रभावी है और न ही न्यायपूर्ण है। इसलिए यह कानून किसी भी वर्ग के हित में नहीं है बल्कि यह सभी बच्चों को आपस में लड़ाने की साजिश है।
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कहा कि यह आंदोलन किसी वर्ग या समुदाय के खिलाफ नहीं बल्कि शिक्षा में समानता और न्याय की बहाली के लिए है। यदि सामाजिक न्याय के नाम पर किसी एक वर्ग के साथ अन्याय किया जाता है तो वह स्वयं असंवैधानिक है और इसके लिए सरकार और यूजीसी दोनों जिम्मेदार हैं। यहां पर प्रशांत मिश्रा, दिनेश मिश्रा, टीपी सिंह, अमित पाठक, अनुराग त्रिपाठी, अभिषेक पांडेय, ज्ञानेंद्र दुबे, शिवम शर्मा, विवेक सिंह, पंकज अवस्थी, रामजी सेंगर, राम बाबू भदौरिया, शिवकुमार, रामकुमार, अरविंद आदि रहे।
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