{"_id":"6935c8ae715d11ab5c041215","slug":"two-brothers-got-two-arms-licenses-issued-using-the-same-numbertwo-brothers-got-two-arms-licenses-issued-using-the-same-number-auraiya-news-c-211-1-ka11004-135666-2025-12-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Auraiya News: कारोबारी भाइयों ने एक ही नंबर पर जारी करा लिए दो शस्त्र लाइसेंस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Auraiya News: कारोबारी भाइयों ने एक ही नंबर पर जारी करा लिए दो शस्त्र लाइसेंस
Mon, 08 Dec 2025 12:04 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Mon, 08 Dec 2025 12:04 AM IST
विज्ञापन
औरैया। एनआईए की कार्रवाई के बाद कारोबारी भाइयों की कुंडली पुलिस और प्रशासन दोनों ही खंगाल रहे हैं।
इसी दौरान नेशनल डाटाबेस ऑफ आर्म्स लाइसेंस (एनडीएएल) की रिपोर्ट में कारोबारी भाइयों की आेर से एक ही नंबर पर दो शस्त्र लाइसेंस जारी कराने की पुष्टि हुई है। एक लाइसेंस इसमें कारोबारी भाई के नाम है तो वहीं दूसरा लाइसेंस एक ऐसे नाम पर दर्ज है जिसका कोई अता-पता ही नहीं है। अब इसकी आंतरिक जांच भी शुरू हो गई है।
कारोबारी भाई कमलकांत वर्मा, रविकांत वर्मा उर्फ लाले और अजयकांत वर्मा उर्फ शशि के यहां एनआईए ने छापा मारा था। आरोप है कि उनका गठजोड़ हरियाणा से उत्तर प्रदेश के रास्ते बिहार में सप्लाई किए जा रहे अवैध असलहों और कारतूस के सिंडीकेट से है।
एनआईए जांच के बाद अब पुलिस और प्रशासन भी कारोबारी भाइयों के बारे में हर पहलू पर जानकारी जुटा रहा है। इसी बीच भाइयों के नाम जारी शस्त्र लाइसेंस का ब्योरा खोजने के दौरान एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने सभी के होश उड़ा दिए हैं।
विज्ञापन
एनडीएएल पर दर्ज डाटा के अनुसार एक ही नंबर से कारोबारी भाइयों के दो शस्त्र लाइसेंस जारी हो गए। इसमें पहला शस्त्र लाइसेंस रविकांत वर्मा पुत्र महेश चंद्र वर्मा के नाम 11 जून 1992 को 5205/औरैया से जारी किया गया है। यह लाइसेंस इटावा से जारी किया गया था, क्योंकि तब औरैया जिला नहीं बना था। इसका यूनिक आईडी नंबर 336270021920672015 है, साथ ही इस पर पता गढ़ैया पुलिस थाना औरैया दर्ज है।
वहीं दूसरा शस्त्र लाइसेंस भी 5205/औरैया पर ही दर्ज है, यह संजय कुमार पुत्र महेश चंद्र वर्मा के नाम से स्वीकृत है। इस लाइसेंस के जारी करने की तिथि 16 जुलाई 2009 है और इसका यूनिक आईडी नंबर 336270005999062015 है, जो पूर्व में जारी यूनिक आईडी से अलग है। पते की अगर बात करें तो इस पर मकान नंबर 32, मोहल्ला गढ़ैया पुलिस थाना औरैया दर्ज है।
ये पूरा खेल एक सोची समझी साजिश के तहत किया गया क्योंकि न तो महेश चंद्र वर्मा का संजय नाम का कोई बेटा है और न ही औरैया जिला मजिस्ट्रेट द्वारा 5205 पर नंबर पर कोई शस्त्र लाइसेंस जारी किया गया। पूर्व में जारी लाइसेंस इटावा जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी था। ऑनलाइन डाटा में दोनों लाइसेंस कैसे दर्ज हो गए और दो यूनिक आईडी नंबर कैसे जनरेट हो गए ये बड़ा सवाल है। हालांकि प्रशासन ने अंदरखाने इसकी जांच भी शुरू करा दी है। (संवाद)
इटावा से आए रजिस्टर में केवल एक ही लाइसेंस दर्ज
1997 में जब औरैया जिला बना तो इटावा प्रशासन द्वारा औरैया जिले में शामिल हुए थानों पर जारी शस्त्र लाइसेंस के रजिस्टर यहां भेज दिए गए। इस रजिस्टर में 5205/औरैया में 11 जून 1992 में इटावा जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी रविकांत वर्मा को जारी लाइसेंस का रिकॉर्ड दर्ज है। इसके अलावा संजय का रिकॉर्ड न तो इटावा से आए रजिस्टर में 5205/औरैया पर अंकित है और न ही औरैया से 2009 में जारी हुए शस्त्र लाइसेंसों में इसका कोई रिकॉर्ड है।
गलत लाइसेंस में सही है मोबाइल नंबर, असली लाइसेंस में दर्ज ही नहीं
एनडीएएल की वेबसाइट पर संजय के नाम से 5205/औरैया पर दर्ज शस्त्र लाइसेंस में 9412184721 मोबाइल नंबर दर्ज है। यह मोबाइल नंबर रविकांत वर्मा उर्फ लाले का है। वहीं रविकांत वर्मा के नाम से जारी पर दर्ज शस्त्र लाइसेंस में मोबाइल नंबर का कॉलम खाली पड़ा है। यहां भी कहीं न कहीं दो जिलों का फायदा उठाकर ये पूरा खेल किया गया, जो अब तक किसी के पकड़ में नहीं आया।
व्यापार मंडल का पदाधिकारी है रविकांत वर्मा उर्फ लाले
औरैया। रविकांत वर्मा उर्फ लाले व्यापार मंडल में पदाधिकारी है, इसीलिए व्यापारियों में उसकी पकड़ अच्छी है। साथ ही अधिकारियों से भी व्यापार मंडल के नाते ही अच्छी पैठ बना ली। ऐसे में अब ये मामला सामने आने पर लोग असमंजस में हैं। अब लोगों को एनआईए की रिपोर्ट का इंतजार है। (संवाद)
एक ही नंबर पर जारी दो शस्त्र लाइसेंस की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट में पुष्टि होने के बाद शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर संबंधित के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
-डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, डीएम।
विज्ञापन
इसी दौरान नेशनल डाटाबेस ऑफ आर्म्स लाइसेंस (एनडीएएल) की रिपोर्ट में कारोबारी भाइयों की आेर से एक ही नंबर पर दो शस्त्र लाइसेंस जारी कराने की पुष्टि हुई है। एक लाइसेंस इसमें कारोबारी भाई के नाम है तो वहीं दूसरा लाइसेंस एक ऐसे नाम पर दर्ज है जिसका कोई अता-पता ही नहीं है। अब इसकी आंतरिक जांच भी शुरू हो गई है।
कारोबारी भाई कमलकांत वर्मा, रविकांत वर्मा उर्फ लाले और अजयकांत वर्मा उर्फ शशि के यहां एनआईए ने छापा मारा था। आरोप है कि उनका गठजोड़ हरियाणा से उत्तर प्रदेश के रास्ते बिहार में सप्लाई किए जा रहे अवैध असलहों और कारतूस के सिंडीकेट से है।
विज्ञापन
एनआईए जांच के बाद अब पुलिस और प्रशासन भी कारोबारी भाइयों के बारे में हर पहलू पर जानकारी जुटा रहा है। इसी बीच भाइयों के नाम जारी शस्त्र लाइसेंस का ब्योरा खोजने के दौरान एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने सभी के होश उड़ा दिए हैं।
विज्ञापन
एनडीएएल पर दर्ज डाटा के अनुसार एक ही नंबर से कारोबारी भाइयों के दो शस्त्र लाइसेंस जारी हो गए। इसमें पहला शस्त्र लाइसेंस रविकांत वर्मा पुत्र महेश चंद्र वर्मा के नाम 11 जून 1992 को 5205/औरैया से जारी किया गया है। यह लाइसेंस इटावा से जारी किया गया था, क्योंकि तब औरैया जिला नहीं बना था। इसका यूनिक आईडी नंबर 336270021920672015 है, साथ ही इस पर पता गढ़ैया पुलिस थाना औरैया दर्ज है।
वहीं दूसरा शस्त्र लाइसेंस भी 5205/औरैया पर ही दर्ज है, यह संजय कुमार पुत्र महेश चंद्र वर्मा के नाम से स्वीकृत है। इस लाइसेंस के जारी करने की तिथि 16 जुलाई 2009 है और इसका यूनिक आईडी नंबर 336270005999062015 है, जो पूर्व में जारी यूनिक आईडी से अलग है। पते की अगर बात करें तो इस पर मकान नंबर 32, मोहल्ला गढ़ैया पुलिस थाना औरैया दर्ज है।
ये पूरा खेल एक सोची समझी साजिश के तहत किया गया क्योंकि न तो महेश चंद्र वर्मा का संजय नाम का कोई बेटा है और न ही औरैया जिला मजिस्ट्रेट द्वारा 5205 पर नंबर पर कोई शस्त्र लाइसेंस जारी किया गया। पूर्व में जारी लाइसेंस इटावा जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी था। ऑनलाइन डाटा में दोनों लाइसेंस कैसे दर्ज हो गए और दो यूनिक आईडी नंबर कैसे जनरेट हो गए ये बड़ा सवाल है। हालांकि प्रशासन ने अंदरखाने इसकी जांच भी शुरू करा दी है। (संवाद)
इटावा से आए रजिस्टर में केवल एक ही लाइसेंस दर्ज
1997 में जब औरैया जिला बना तो इटावा प्रशासन द्वारा औरैया जिले में शामिल हुए थानों पर जारी शस्त्र लाइसेंस के रजिस्टर यहां भेज दिए गए। इस रजिस्टर में 5205/औरैया में 11 जून 1992 में इटावा जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी रविकांत वर्मा को जारी लाइसेंस का रिकॉर्ड दर्ज है। इसके अलावा संजय का रिकॉर्ड न तो इटावा से आए रजिस्टर में 5205/औरैया पर अंकित है और न ही औरैया से 2009 में जारी हुए शस्त्र लाइसेंसों में इसका कोई रिकॉर्ड है।
गलत लाइसेंस में सही है मोबाइल नंबर, असली लाइसेंस में दर्ज ही नहीं
एनडीएएल की वेबसाइट पर संजय के नाम से 5205/औरैया पर दर्ज शस्त्र लाइसेंस में 9412184721 मोबाइल नंबर दर्ज है। यह मोबाइल नंबर रविकांत वर्मा उर्फ लाले का है। वहीं रविकांत वर्मा के नाम से जारी पर दर्ज शस्त्र लाइसेंस में मोबाइल नंबर का कॉलम खाली पड़ा है। यहां भी कहीं न कहीं दो जिलों का फायदा उठाकर ये पूरा खेल किया गया, जो अब तक किसी के पकड़ में नहीं आया।
व्यापार मंडल का पदाधिकारी है रविकांत वर्मा उर्फ लाले
औरैया। रविकांत वर्मा उर्फ लाले व्यापार मंडल में पदाधिकारी है, इसीलिए व्यापारियों में उसकी पकड़ अच्छी है। साथ ही अधिकारियों से भी व्यापार मंडल के नाते ही अच्छी पैठ बना ली। ऐसे में अब ये मामला सामने आने पर लोग असमंजस में हैं। अब लोगों को एनआईए की रिपोर्ट का इंतजार है। (संवाद)
एक ही नंबर पर जारी दो शस्त्र लाइसेंस की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट में पुष्टि होने के बाद शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर संबंधित के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
-डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, डीएम।