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Auraiya News: 26 साल पुराने छेड़छाड़ के मामले में आरोपी दोषमुक्त
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औरैया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने 26 साल पुराने छेड़छाड़ के मामले में अभियुक्त को बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। निचली अदालत ने रामलखन को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी।
सदर कोतवाली के एक गांव की महिला ने अदालत के आदेश पर मुकदमा दर्ज कराया था। महिला ने आरोप लगाया कि 31 मार्च 2000 की रात रामलखन उसके घर में घुसा। वह दीवार फांदकर घर में आया और छेड़छाड़ व अभद्रता की। शोर मचाने पर आरोपी धमकी देकर भाग गया। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र अदालत में प्रस्तुत किया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 14 नवंबर 2025 को रामलखन को दोषी ठहराया था।
निचली अदालत के निर्णय से क्षुब्ध होकर रामलखन ने दंड अपील दाखिल की। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि घटना 31 मार्च 2000 की थी, जबकि मुकदमा पांच महीने बाद 26 अगस्त 2000 को दर्ज हुआ। अभियोजन पक्ष विवेचना के दौरान नक्शा-नजरी व अन्य साक्ष्य अदालत में साबित नहीं कर सका। विवेचक को भी गवाही के लिए पेश नहीं किया गया, जिससे बचाव पक्ष को जिरह का अवसर नहीं मिला। बुधवार को पीठासीन अधिकारी कैलाश कुमार ने निचली अदालत का निर्णय रद्द कर रामलखन को बरी किया। उसके व्यक्तिगत बंधपत्र और जमानतनामे निरस्त कर दिए गए हैं।
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सदर कोतवाली के एक गांव की महिला ने अदालत के आदेश पर मुकदमा दर्ज कराया था। महिला ने आरोप लगाया कि 31 मार्च 2000 की रात रामलखन उसके घर में घुसा। वह दीवार फांदकर घर में आया और छेड़छाड़ व अभद्रता की। शोर मचाने पर आरोपी धमकी देकर भाग गया। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र अदालत में प्रस्तुत किया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 14 नवंबर 2025 को रामलखन को दोषी ठहराया था।
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निचली अदालत के निर्णय से क्षुब्ध होकर रामलखन ने दंड अपील दाखिल की। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि घटना 31 मार्च 2000 की थी, जबकि मुकदमा पांच महीने बाद 26 अगस्त 2000 को दर्ज हुआ। अभियोजन पक्ष विवेचना के दौरान नक्शा-नजरी व अन्य साक्ष्य अदालत में साबित नहीं कर सका। विवेचक को भी गवाही के लिए पेश नहीं किया गया, जिससे बचाव पक्ष को जिरह का अवसर नहीं मिला। बुधवार को पीठासीन अधिकारी कैलाश कुमार ने निचली अदालत का निर्णय रद्द कर रामलखन को बरी किया। उसके व्यक्तिगत बंधपत्र और जमानतनामे निरस्त कर दिए गए हैं।
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