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दो जिलों के बीच फंसा कंचौसी का विकास

Mon, 18 Jul 2016 10:55 PM IST
Auraiya, Uttar pradesh, India
Auraiya, Uttar pradesh, India Updated Mon, 18 Jul 2016 10:55 PM IST
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Trapped between two districts develop Kanchausi
विकास - फोटो : अमर उजाला
 तीन ब्लाक, तीन विधानसभा और दो लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाला कंचौसी कस्बा अपने विकास के लिए नेताओं और अफसरों का मुंह ताक रहा है। वजह कस्बा आधा औरैया जिले में लगता है तो आधा कानपुर देहात है। कस्बे के करीब दो दर्जन घरों की तो ऐसी स्थिति है कि उनके घर का आगे का हिस्सा औरैया जिले में है जबकि पीछे का हिस्सा कानपुर देहात में। यहां पर अक्सर पुलिस सीमा विवाद में उलझी रहती है। वहीं विकास योजनाएं भी सीमा विवाद के कारण परवान नही चढ़ पाती।  
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वर्तमान में कस्बे की आबादी करीब 25 हजार है। कानपुर देहात और औरैया जिले दोनों में कंचौसी का नाम दर्ज है। स्थिति यह है कि करीब दो दर्जन से अधिक परिवारों के घर तक दो जिलों में बने हैं। ऐसे में कई लोगों के पास दोनों जिले के राशन कार्ड हैं। वह दोनों जिलों में वह मतदाता भी हैं। यह कस्बा झींझक, सहार और भाग्यनगर ब्लाक के अलावा दिबियापुर, बिधूना और रसूलाबाद विधानसभा क्षेत्र में आता है। जबकि कन्नौज व इटावा दो लोकसभा क्षेत्र हैं। ऐसे में विकास की योजनाएं यहां दम तोड़ देती है। रामरतन इंटर कालेज कंचौसी के प्रबंधक सुरेश चंद्र गुप्ता, व्यापारी सुरेश चंद्र गुप्ता, संतोष यादव, राजेश बाथम, रामशंकर, शिवकांत शुक्ला व राकेश यादव के ऐसे परिवार है जो दोनो जिलों में आते हैं।
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अगर जमीन का विवाद से लेकर नाली का भी विवाद होता है तो मामला सीमा विवाद में फंस जाता है। यहां तक की कोई घटना होने पर भी पुलिस सीमा विवाद में सुस्त हो जाती है। कस्बे में पोस्ट आफिस भी दोनों जिलो में बटा है। संचालित यह औरैया से होता है मगर डाक वितरण का काम दोनो जिलो का करना है। कंचौसी को एक जिले में करके नगर पंचायत बनाने की मांग मुख्यमंत्री से तक हो चुकी और आश्वासन भी मिला। लेकिन दशकों पुरानी इस समस्या का आज तक कोई हल नही हो सका।
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कानपुर देहात का पता लिखने पर छूट गया इंटरव्यू
गुड्डू शंखवार कंचौसी कस्बे में रहते हैं। उनका घर कानपुर देहात में लगता है। राशनकार्ड भी वहीं का है। इन्होंने नौकरी के लिए आवेदन किया था। फार्म मूल पता कानपुर देहात का लिखा। उनको नौकरी के साक्षात्कार का लेटर इंटरव्यू के दिन ही मिला। मामले में डाक विभाग का कहना है कि औरैया पता लिखते तो सीधे डाक आती। समय से बट जाती। लेकिन कानपुर देहात लिखने से डाक झींझक गई फिर यहां आई। ऐसी तमाम समस्याओं से यहां के लोग रोज रूबरू होते हैं।
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