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यात्रियों की जान से खिलवाड़ कर रहा परिवहन विभाग
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बस में नहीं लगा फायर सिलिंडर। संवाद
- फोटो : AURAIYA
औरैया। सरकार की तरफ से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भले ही योजनाएं बनाई जाएं पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। उप्र परिवहन निगम द्वारा रोडवेज बसों में फायर सेफ्टी के इंतजामों को लेकर घोर लापरवाही बरती जा रही है। औरैया डिपो में मौजूद अधिकतर बसों में अग्निशमन यंत्र उपलब्ध नहीं हैं, ऐसे में अगर बस में आग लगती है तो बड़े पैमाने पर जान माल को नुकसान हो सकता है।
औरैया डिपो से 68 बसों का संचालन होता है। यह बसें कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, इटावा, आगरा, दिल्ली, झांसी व शाहजहांपुर रूट पर संचालित होती है। कुछ बसें लोकल में भी रहती हैं। ऐसे में बस स्टैंड पर प्रतिदिन दो से तीन हजार यात्रियों का आवागमन होता है।
उप्र राजकीय परिवहन निगम को सिर्फ अपनी कमाई से मतलब है, न कि यात्रियों के जान माल की। क्योंकि इन दिनों गर्मी का प्रचंड प्रकोप है, ऐसे में आग लगने की संभावना सबसे अधिक हो जाती है। रोडवेज के अधिकारी इस समस्या को दरकिनार करते हुए सिर्फ बसों का संचालन कर रहे हैं।
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जबकि डिपो से संचालित होने वाली अधिकांश बसों में आग से बचाव के लिए अग्निशमन यंत्र उपलब्ध नहीं हैं। यह हकीकत केवल लोकल रूट पर चलने वाले बसों में ही नहीं, लंबी दूरी तक चलने वाले बसों की भी है। बसों में मात्र एक ही प्रवेश और निकास द्वार होने पर यदि अचानक बस में आग लग जाए तो फिर यात्रियों का भगवान ही मालिक। जबकि इमरजेंसी गेट बमुश्किल से ही खुलता है।
सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक आरएस चौधरी ने कहा कि अधिकांश बसों में अग्निशमन यंत्र लगे हैं, कुछ में नहीं है। क्योंकि दो-तीन दिन पहले ही यंत्रों को इटावा भेजा गया है। ताकि फायर सिलिंडर में गैस भरकर आ सके। फर्स्ट एड बॉक्स में दवाएं खत्म हो गई हैं, उन्हें मंगवाया गया है। इसके अलावा सभी निर्धारित रूटों पर प्रतिदिन बसों का संचालन होता है।
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औरैया डिपो से 68 बसों का संचालन होता है। यह बसें कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, इटावा, आगरा, दिल्ली, झांसी व शाहजहांपुर रूट पर संचालित होती है। कुछ बसें लोकल में भी रहती हैं। ऐसे में बस स्टैंड पर प्रतिदिन दो से तीन हजार यात्रियों का आवागमन होता है।
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उप्र राजकीय परिवहन निगम को सिर्फ अपनी कमाई से मतलब है, न कि यात्रियों के जान माल की। क्योंकि इन दिनों गर्मी का प्रचंड प्रकोप है, ऐसे में आग लगने की संभावना सबसे अधिक हो जाती है। रोडवेज के अधिकारी इस समस्या को दरकिनार करते हुए सिर्फ बसों का संचालन कर रहे हैं।
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जबकि डिपो से संचालित होने वाली अधिकांश बसों में आग से बचाव के लिए अग्निशमन यंत्र उपलब्ध नहीं हैं। यह हकीकत केवल लोकल रूट पर चलने वाले बसों में ही नहीं, लंबी दूरी तक चलने वाले बसों की भी है। बसों में मात्र एक ही प्रवेश और निकास द्वार होने पर यदि अचानक बस में आग लग जाए तो फिर यात्रियों का भगवान ही मालिक। जबकि इमरजेंसी गेट बमुश्किल से ही खुलता है।
सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक आरएस चौधरी ने कहा कि अधिकांश बसों में अग्निशमन यंत्र लगे हैं, कुछ में नहीं है। क्योंकि दो-तीन दिन पहले ही यंत्रों को इटावा भेजा गया है। ताकि फायर सिलिंडर में गैस भरकर आ सके। फर्स्ट एड बॉक्स में दवाएं खत्म हो गई हैं, उन्हें मंगवाया गया है। इसके अलावा सभी निर्धारित रूटों पर प्रतिदिन बसों का संचालन होता है।

कानपुर जाने वाली रोडवेज बस में चढ़ते यात्री। संवाद- फोटो : AURAIYA