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Auraiya News: ट्रॉमा सेंटर में तीन माह से नहीं आए मरीज... ड्यूटी पूरी कर रहा स्टाफ
Thu, 07 May 2026 12:23 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Thu, 07 May 2026 12:23 AM IST
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फोटो-41-रजिस्ट्रेशन कक्ष भी नहीं हो सका शुरू। संवाद
औरैया। जिले में आपात स्वास्थ्य सेवाओं की सच्चाई बेहद चिंताजनक है। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाया गया भगौतीपुर ट्रॉमा सेंटर लोकार्पण के पांच साल बाद भी चालू नहीं हो सका है।
फरवरी में तैनात किए गए पांच डॉक्टरों समेत 11 कर्मी पिछले तीन माह से रोज तीन शिफ्टों में ड्यूटी कर रहे हैं लेकिन अब तक एक भी मरीज का उपचार नहीं हो पाया है।
इस बीच, जिले के गंभीर मरीजों की किस्मत आज भी रेफरल सिस्टम पर टिकी है। सड़क हादसों व अन्य आपात स्थितियों में घायल मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद सैफई और कानपुर भेजा जा रहा है। दो से तीन घंटे की यह दूरी कई बार जिंदगी और मौत के बीच का फासला बन रही है लेकिन स्वास्थ्य विभाग ट्रॉमा सेंटर शुरू कराने में नाकाम साबित हो रहा है।
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करीब 2.64 करोड़ की लागत से बने इस ट्रॉमा सेंटर का नवंबर 2021 में लोकार्पण हो चुका है पर पांच साल बाद भी यह सिर्फ इमारत बनकर रह गया है। स्टाफ की तैनाती और वेतन भुगतान के बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं शुरू न होना सिस्टम की लापरवाही को उजागर करता है।
जनवरी माह में फरवरी माह में तत्कालीन डीएम डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने इस महत्वपूर्ण इकाई को शुरू कराने के प्रयास तेज किए तो यहां सीएचसी से स्टाफ की तैनाती कर दी गई, पर संसाधन नहीं जुटाए जा सके। डीएम ने हर हाल में दस अप्रैल तक इसे शुरू करने की डेडलाइन तय की थी पर इसे भी बीते एक महीना होने को है पर स्थिति जस की तस है।
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बिजली और स्टाफ की कमी में फंसा संचालन
ट्रॉमा सेंटर में 15 बेड और जरूरी संसाधन मौजूद हैं लेकिन निर्बाध बिजली आपूर्ति का इंतजाम नहीं हो सका है। ग्रामीण फीडर से जुड़े होने के कारण यहां पर्याप्त बिजली नहीं मिलती, जबकि ट्रॉमा सेंटर के लिए 24 घंटे बिजली अनिवार्य है। वहीं, दो साल पहले 50 अतिरिक्त स्टाफ की मांग शासन को भेजी गई थी जिस पर अब तक मंजूरी नहीं मिली। अधिकारियों के स्तर पर बातचीत जारी होने के दावे किए जा रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत में कोई बदलाव नहीं दिख रहा।
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रोजाना 10 से ज्यादा गंभीर मरीज रेफर, बढ़ रहा खतरा
जिले में हर दिन औसतन 10 से अधिक गंभीर मरीजों को बाहर रेफर किया जा रहा है। गोल्डन ऑवर में इलाज न मिलने से मरीजों की हालत बिगड़ रही है। अगर ट्रॉमा सेंटर चालू हो जाए तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं लेकिन फिलहाल यह सुविधा कागजों तक सीमित है।
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ट्रॉमा सेंटर का संचालन जल्द शुरू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्टाफ के लिए शासन स्तर पर संवाद जारी है। शासन स्तर से स्टाफ दिए जाने का आश्वासन मिला है। स्टाफ नियुक्त होते ही इसे शुरू कराया जाएगा।
- डॉ. सुरेंद्र कुमार, सीएमओ
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फरवरी में तैनात किए गए पांच डॉक्टरों समेत 11 कर्मी पिछले तीन माह से रोज तीन शिफ्टों में ड्यूटी कर रहे हैं लेकिन अब तक एक भी मरीज का उपचार नहीं हो पाया है।
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इस बीच, जिले के गंभीर मरीजों की किस्मत आज भी रेफरल सिस्टम पर टिकी है। सड़क हादसों व अन्य आपात स्थितियों में घायल मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद सैफई और कानपुर भेजा जा रहा है। दो से तीन घंटे की यह दूरी कई बार जिंदगी और मौत के बीच का फासला बन रही है लेकिन स्वास्थ्य विभाग ट्रॉमा सेंटर शुरू कराने में नाकाम साबित हो रहा है।
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करीब 2.64 करोड़ की लागत से बने इस ट्रॉमा सेंटर का नवंबर 2021 में लोकार्पण हो चुका है पर पांच साल बाद भी यह सिर्फ इमारत बनकर रह गया है। स्टाफ की तैनाती और वेतन भुगतान के बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं शुरू न होना सिस्टम की लापरवाही को उजागर करता है।
जनवरी माह में फरवरी माह में तत्कालीन डीएम डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने इस महत्वपूर्ण इकाई को शुरू कराने के प्रयास तेज किए तो यहां सीएचसी से स्टाफ की तैनाती कर दी गई, पर संसाधन नहीं जुटाए जा सके। डीएम ने हर हाल में दस अप्रैल तक इसे शुरू करने की डेडलाइन तय की थी पर इसे भी बीते एक महीना होने को है पर स्थिति जस की तस है।
बिजली और स्टाफ की कमी में फंसा संचालन
ट्रॉमा सेंटर में 15 बेड और जरूरी संसाधन मौजूद हैं लेकिन निर्बाध बिजली आपूर्ति का इंतजाम नहीं हो सका है। ग्रामीण फीडर से जुड़े होने के कारण यहां पर्याप्त बिजली नहीं मिलती, जबकि ट्रॉमा सेंटर के लिए 24 घंटे बिजली अनिवार्य है। वहीं, दो साल पहले 50 अतिरिक्त स्टाफ की मांग शासन को भेजी गई थी जिस पर अब तक मंजूरी नहीं मिली। अधिकारियों के स्तर पर बातचीत जारी होने के दावे किए जा रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत में कोई बदलाव नहीं दिख रहा।
रोजाना 10 से ज्यादा गंभीर मरीज रेफर, बढ़ रहा खतरा
जिले में हर दिन औसतन 10 से अधिक गंभीर मरीजों को बाहर रेफर किया जा रहा है। गोल्डन ऑवर में इलाज न मिलने से मरीजों की हालत बिगड़ रही है। अगर ट्रॉमा सेंटर चालू हो जाए तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं लेकिन फिलहाल यह सुविधा कागजों तक सीमित है।
ट्रॉमा सेंटर का संचालन जल्द शुरू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्टाफ के लिए शासन स्तर पर संवाद जारी है। शासन स्तर से स्टाफ दिए जाने का आश्वासन मिला है। स्टाफ नियुक्त होते ही इसे शुरू कराया जाएगा।
- डॉ. सुरेंद्र कुमार, सीएमओ