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औरैयाः जेल से रिहा डकैत सरला नहीं पहुंची अपने गांव
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अयाना (औरैया)। डकैत सरला जाटव जेल से रिहा होने के बाद रविवार शाम तक अपने पैतृक गांव नियामतपुर नहीं पहुंची। सरला जाटव को उच्च न्यायालय ने 17 मई 2022 को पैरोल पर छोड़ने के लिए परवाना भेजा था, पर किसी कारणवश जेल से रिहा नहीं हो सकी थी। परवाना भेजने के करीब 105 दिन बाद शुक्रवार शाम को उसे इटावा जेल से रिहा कर दिया गया।
दस्यु सम्राट निर्भय गुर्जर के असलहे व जेवर लेकर भागे मुन्ना-मुन्नी गैंग को नियामतपुर निवासी महाराम व लल्लू प्रसाद ने पनाह दी थी। क्षेत्र में दहशत का माहौल बनाने के लिए 18 अक्तूबर 1999 में निर्भय गुर्जर ने सरला जाटव, उसके पिता महाराम व चाचा लल्लू प्रसाद का अपहरण कर लिया था। अपहरण के तीन दिन बाद निर्भय गुर्जर ने सरला के चाचा लल्लू प्रसाद को गोलियों से भून कर शव अजीतमल कोतवाली क्षेत्र के नगला सिमार में फेंक दिया था। जिसकी जानकारी नगला सिमार निवासी राम नरेश यादव ने पुलिस को दी थी।
पुलिस ने 22 अक्तूबर 1999 में हत्या समेत अन्य संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। निर्भय गुर्जर के डर से दस्यु मुन्ना के मामा रामनरेश व भाई हीरेंद्र सिंह अपना घर छोड़कर चले गए थे। नाम न छापने की शर्त पर सरला जाटव के करीबी ने बताया कि सरला जाटव अपहरण के वक्त महज सात वर्ष की थी और प्राथमिक विद्यालय नियामतपुर में कक्षा दो की छात्रा थी। अपहरण के बाद निर्भय गुर्जर ने सरला की शादी अपने दत्तक पुत्र श्याम जाटव के साथ कर दी थी।
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इसके कुछ समय बाद कई वारदातों को अंजाम देने के बाद उसका नाम दस्यु सुंदरी के तौर पर उभरकर आने लगा। उसके खिलाफ औरैया, इटावा, जालौन व कानपुर देहात में करीब डेढ़ दर्जन मुकदमे दर्ज हैं। आठ सितंबर 2005 को सरला जाटव ने अपनी बागी व अपराध की दुनिया को छोड़ कर एसएसपी इटावा दलजीत चौधरी के समक्ष इटावा में सरेंडर कर दिया था। सरेंडर करने के 17 वर्ष बाद उच्च न्यायालय के आदेश पर शुक्रवार शाम सात बजे उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया। शनिवार शाम और रविवार सुबह तक लोग सरला के गांव आने की आस में बैठे रहे पर वह अपने पैतृक गांव नहीं पहुंची।
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दस्यु सम्राट निर्भय गुर्जर के असलहे व जेवर लेकर भागे मुन्ना-मुन्नी गैंग को नियामतपुर निवासी महाराम व लल्लू प्रसाद ने पनाह दी थी। क्षेत्र में दहशत का माहौल बनाने के लिए 18 अक्तूबर 1999 में निर्भय गुर्जर ने सरला जाटव, उसके पिता महाराम व चाचा लल्लू प्रसाद का अपहरण कर लिया था। अपहरण के तीन दिन बाद निर्भय गुर्जर ने सरला के चाचा लल्लू प्रसाद को गोलियों से भून कर शव अजीतमल कोतवाली क्षेत्र के नगला सिमार में फेंक दिया था। जिसकी जानकारी नगला सिमार निवासी राम नरेश यादव ने पुलिस को दी थी।
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पुलिस ने 22 अक्तूबर 1999 में हत्या समेत अन्य संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। निर्भय गुर्जर के डर से दस्यु मुन्ना के मामा रामनरेश व भाई हीरेंद्र सिंह अपना घर छोड़कर चले गए थे। नाम न छापने की शर्त पर सरला जाटव के करीबी ने बताया कि सरला जाटव अपहरण के वक्त महज सात वर्ष की थी और प्राथमिक विद्यालय नियामतपुर में कक्षा दो की छात्रा थी। अपहरण के बाद निर्भय गुर्जर ने सरला की शादी अपने दत्तक पुत्र श्याम जाटव के साथ कर दी थी।
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इसके कुछ समय बाद कई वारदातों को अंजाम देने के बाद उसका नाम दस्यु सुंदरी के तौर पर उभरकर आने लगा। उसके खिलाफ औरैया, इटावा, जालौन व कानपुर देहात में करीब डेढ़ दर्जन मुकदमे दर्ज हैं। आठ सितंबर 2005 को सरला जाटव ने अपनी बागी व अपराध की दुनिया को छोड़ कर एसएसपी इटावा दलजीत चौधरी के समक्ष इटावा में सरेंडर कर दिया था। सरेंडर करने के 17 वर्ष बाद उच्च न्यायालय के आदेश पर शुक्रवार शाम सात बजे उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया। शनिवार शाम और रविवार सुबह तक लोग सरला के गांव आने की आस में बैठे रहे पर वह अपने पैतृक गांव नहीं पहुंची।