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Auraiya News: लेखपाल ने पहले किया पट्टा फिर अपने भाई के नाम चढ़वाई वरासत
Wed, 09 Jul 2025 11:25 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Wed, 09 Jul 2025 11:25 PM IST
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औरैया। सदर तहसील के ककराही मौजा की बेशकीमती जमीन को हथियाने का मामला अजीबो-गरीब है। नियमों को ताक पर रखकर जीवित युवक को कागजों में मृत दिखाकर दूसरे के नाम वरासत चढ़ा दी। बाद में इस जमीन पर प्लाॅटिंग कर करोड़ों के वारे न्यारे हो गए। इस मामले में एक पूर्व लेखपाल के भाई के नाम वरासत चढ़ाई गई।
पीडित शाहब्दा निवासी भारत सिंह की ओर से की गई शिकायत राजस्व महकमे में हुए बड़े खेल की ओर इशारा कर रही है। इस पूरे मामले एक और बात सामने आ रही है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 1991 में ककराही के तत्कालीन सेवानिवृत्त लेखपाल मो हकम सिंह ने शाहब्दा निवासी भारत सिंह को पट्टा किया था। ग्राम पंचायत तो छोड़िए दूसरे ब्लॉक के युवक को बेशकीमती जमीन आवंटित कर दी गई थी। बाद में इसी जमीन को बड़े ही सफाई से हथियाया गया।
भारत सिंह को कागजों में मृत दर्शाया गया, यहां तक कि उसी पूर्व लेखपाल के भाई के नाम वरासत चढ़ा दी गई। बाद में इस जमीन पर प्लाॅटिंग कर मोटा मुनाफा कमाया गया। राजस्व के जानकारों की माने तो इस जमीन पर करोड़ों के प्लाॅट बेच दिए गए। पूरे मामले की जांच में पूर्व लेखपाल से लेकर वरासत चढ़ाने वाले राजस्व कर्मी सीधे तौर पर लपेटे में आते दिख रहे हैं।
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तत्कालीन लेखपाल के बांटे पट्टों की जांच खोलेगी कई राज
तत्कालीन लेखपाल की तैनाती के दौरान साल 1991 में कई लोगों को पट्टे आवंटित हुए थे। हाल फिलहाल सामने आए ऐसे मामले की तरह अन्य मामले सामने आने की संभावना बढ़ गई है।
वर्जन बाकी है:::::::::::::::
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पीडित शाहब्दा निवासी भारत सिंह की ओर से की गई शिकायत राजस्व महकमे में हुए बड़े खेल की ओर इशारा कर रही है। इस पूरे मामले एक और बात सामने आ रही है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 1991 में ककराही के तत्कालीन सेवानिवृत्त लेखपाल मो हकम सिंह ने शाहब्दा निवासी भारत सिंह को पट्टा किया था। ग्राम पंचायत तो छोड़िए दूसरे ब्लॉक के युवक को बेशकीमती जमीन आवंटित कर दी गई थी। बाद में इसी जमीन को बड़े ही सफाई से हथियाया गया।
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भारत सिंह को कागजों में मृत दर्शाया गया, यहां तक कि उसी पूर्व लेखपाल के भाई के नाम वरासत चढ़ा दी गई। बाद में इस जमीन पर प्लाॅटिंग कर मोटा मुनाफा कमाया गया। राजस्व के जानकारों की माने तो इस जमीन पर करोड़ों के प्लाॅट बेच दिए गए। पूरे मामले की जांच में पूर्व लेखपाल से लेकर वरासत चढ़ाने वाले राजस्व कर्मी सीधे तौर पर लपेटे में आते दिख रहे हैं।
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तत्कालीन लेखपाल के बांटे पट्टों की जांच खोलेगी कई राज
तत्कालीन लेखपाल की तैनाती के दौरान साल 1991 में कई लोगों को पट्टे आवंटित हुए थे। हाल फिलहाल सामने आए ऐसे मामले की तरह अन्य मामले सामने आने की संभावना बढ़ गई है।
वर्जन बाकी है:::::::::::::::